Gwalior news: पराली से हो रही लाखों की कमाई, जलाने के बजाय बना रहे तरह-तरह की चीजें
गौशाला में सोफा सेट, मवेशियों के लिए चारा और विभिन्न प्रकार की साज-सज्जा का सामान भी तैयार किया जा रहा है।

मध्य प्रदेश में धान की पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए प्रशासन अनेक प्रयास कर रही है। तो वहीं ग्वालियर में पराली से रोजगार के नए साधन भी बन रहे हैं। इसका उदाहरण ग्वालियर की लाल टिपारा गौशाला में देखने को मिला। जहां पराली के उपयोग से तरह-तरह के डिस्पोजल और सामान तैयार कर लाखों की कमाई कर रहे हैं।
लाल टिपारा गौशाला के प्रबंधन समिति के ऋषभ देव महाराज ने जानकारी दी कि गौशाला में पराली से डिजाइन डिजाइन के खिलौने और अन्य सामग्री तैयार की जा रही है। जिसे लोगों के देखने के लिए भी रखा गया है। इसके अलावा ग्वालियर के रानीघाटी में पराली से अलग-अलग चीजें बनाई जाती है।
जिसमें कप प्लेट, डिस्पोजल, दोना, पत्तल आदि सामान शामिल है। इतना ही नहीं गौशाला में पुआल के जरिए सोफा सेट, मवेशियों के लिए चारा और तरह-तरह के डेकोरेशन के सामान भी तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एक तरफ तो यह बेहद आकर्षक लग रहा है। तो वहीं दूसरी तरफ ये पर्यावरण को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। इसलिए हो सके तो हमें इस तरह के सामग्री का अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए।
बताते चलें कि देश में बड़े पैमाने पर पराली जलाना प्रदूषण का एक बड़ा कारण है। जिससे प्रदूषित वातावरण से कई तरह की बीमारियां भी फैलने लगती है। जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। लेकिन अगर अब इस पराली को रोजगार के तौर पर इस्तेमाल किया जाए तो बड़े पैमाने पर लोगों को मुनाफा मिलेगा।












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