gwalior News: चंबल का रुतबा लगातार हो रहा कम, तोमर विधानसभा अध्यक्ष बने तो अब केंद्र में अकेले बचे सिंधिया
संवाद सूत्र- पंकज श्रीमाली
Gwalior News: ग्वालियर चंबल में एक कहावत है कि सरपंची सर माथे लेकिन नाला यहीं से निकलेगा, मध्य प्रदेश में भाजपा वाला कमान द्वारा जिस तरह से नए मुख्यमंत्री दो डिप्टी सीएम और केंद्र में कद्दावर नेता नरेंद्र सिंह तोमर को विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया है। यह कहावत पूरी तरह चरितार्थ होती नजर आ रही है।
ददअसल, तमाम आशंकाओं और अपेक्षाओं को पीछे छोड़ते हुए भारतीय जनता पार्टी ने मोहन सिंह यादव को प्रदेश का सीएम बनाया है और केंद्र सरकार से इस्तीफा देने वाले नरेंद्र सिंह तोमर विधानसभा अध्यक्ष बने हैं ऐसे में अब बीजेपी सरकार में चंबल का रुतबा कम होता नजर आ रहा है और अब अकेले सिंधिया केंद्र में ग्वालियर चंबल अंचल की पैरवी करते नजर आएंगे।

उच्च शिक्षा मंत्री मोहन सिंह यादव को मुख्यमंत्री चुने जाने के बाद ग्वालियर चंबल अंचल के लोगों के हाथ निराशा लगी है क्योंकि विधानसभा चुनाव में ग्वालियर-अंचल ने पिछले विधानसभा चुनाव मुकाबले इस बार दो गुना सीटें इस भरोसे पर दी कि अंचल के नेताओं का केंद्र व प्रदेश में वजन बढ़ेगा और विकास भी गति पकड़ेगा।लेकिन दोगुनी सीट के बदले सितम भी दोगुना हो गया और चंबल का केंद्र में भी दबदबा कम हुआ है। राज्य भी तवज्जो नहीं मिली है। केंद्रीय कृषि मंत्री जैसे बड़े पद के बदले नरेंद्र सिंह तोमर को विधानसभा अध्यक्ष जैसा शक्तिहीन पद से संतोष करना पड़ा है।

लोगों की अपेक्षा थी कि सिंधिया या तोमर में से कोई एक बने सीएम
ग्वालियर चंबलांचल में इस विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा के भारी बहुमत से जीतने और अंचल में भाजपा की सीट बढ़ने के बाद पूरी अपेक्षा थी कि पूर्व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया में से किसी एक को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। इसी आशा में अंचल के नेता बीते रोज सुबह ही शताब्दी एक्सप्रेस से भोपाल के लिए रवाना हो गए थे। लेकिन बीजेपी वाला कमान के फैसले के बाद लोगों की उम्मीद पूरी तरह टूट गई. हालांकि नरेंद्र सिंह तोमर को विधानसभा अध्यक्ष बनाकर अंचल को भी साधने की कोशिश की गई है।

मोहन सिंह को कम चुने जाने के बाद कहीं खुशी कहीं गम
मोहन सिंह यादव को मुख्यमंत्री चुने जाने से अंचल में खुशी व निराशा का मिश्रित माहौल है। अब तक केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में अंचल के दो प्रभावशाली नेता नरेंद्र सिंह तोमर व ज्योतिरादित्य सिंधिया केंद्रीय मंत्री का दायित्व संभाल रहे थे। यही कारण है कि अंचल के विकास के लिए दिल्ली और भोपाल से भरपूर मदद मिल रही थी। ग्वालियर-चंबल प्रदेश की राजनीति की धुरी माना जाता है। दोनों ही दलों में अंचल के नेताओं का वर्चस्व रहता था। यही कारण है कि देश का ग्वालियर पहला ऐसा जिला था, जहां के दो नेता नरेंद्र सिंह तोमर व ज्योतिरादित्य सिंधिया केंद्र सरकार में केंद्रीय मंत्री थे। दोनों के पास वजनदार विभाग थे।
नरेंद्र सिंह तोमर की गिनती मोदी सरकार टाप फाइव मंत्रियों में होती थी। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने नरेंद्र सिंह तोमर को विधानसभाध्यक्ष का दायित्व सौंपकर उनकी दिल्ली वापसी के रास्ते पर बैरीकेट्स लगा दिया है। हालांकि विधानसभा अध्यक्ष की विधायिका में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है, लेकिन उनके अधिकार विधानसभा तक ही सीमित रहते हैं। इसलिए अंचल के लोग थोड़े से निराश भी हुए हैं।












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