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ग्वालियर-चंबल संभाग के लाइसेंसी हथियारों ने बढ़ाया प्रशासन का टेंशन

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ग्वालियर, 2 जून। नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव की घोषणा होने के साथ ही अब ग्वालियर-चंबल संभाग के प्रशासन के लिए लाइसेंसी हथियार टेंशन बढ़ाने का काम कर रहे हैं, क्योंकि तय समय सीमा में हजारों की संख्या में मौजूद लाइसेंसी हथियारों को थानों में जमा करवाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।

weapons
पंचायत चुनाव के बाद नगरीय निकाय चुनाव की घोषणा होने के साथ ही ग्वालियर-चंबल संभाग के जिलों में प्रशासनिक अधिकारियों की टेंशन बढ़ गई है, क्योंकि इस चुनाव से पहले तय समय सीमा के अंदर जिले में मौजूद सभी लाइसेंसी शस्त्र थाने में जमा करवाए जाने हैं। इसके लिए बाकायदा सूचना भी जारी कर दी गई है लेकिन तय समय के अंदर सभी लाइसेंसी हथियार थानों में जमा करवाना प्रशासन के लिए परेशानी खड़ा कर रहा है।
2 जून है ग्वालियर में लाइसेंसी शस्त्र थानों में जमा करने की अंतिम तारीख
ग्वालियर में पंचायत चुनाव को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण अंचल के लाइसेंसी हथियारों को 2 जून तक जिले के थानों में जमा करने के आदेश जारी किए गए थे लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में अभी महज 40 फ़ीसदी लाइसेंसी हथियार जिले के अलग-अलग थानों में जमा हो पाए हैं। अगर पूरे ग्वालियर जिले की बात करें तो जिले भर में 33,000 से ज्यादा लाइसेंसी हथियार हैं ऐसे में तय समय के अंदर सभी लाइसेंसी हथियारों को थानों में सुरक्षित तरीके से जमा करवाना प्रशासन के लिए किसी चुनौती से कम नहीं।
भिंड और मुरैना में भी है लाइसेंसी हथियारों की भरमार
भिंड और मुरैना में भी लाइसेंसी हथियारों की भरमार है। मुरैना जिले में जहां 27000 लाइसेंसी हथियार हैं तो वहीं भिंड में तकरीबन 24000 लाइसेंसी हथियार है। इतनी बड़ी संख्या में लाइसेंसी हथियार होना भी प्रशासन के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है, क्योंकि प्रशासन को सभी लाइसेंसी हथियार जिले के अलग-अलग स्थानों में जमा करवाना है।
चंबल अंचल में चुनाव के दौरान गोलीबारी की होती है घटनाएं
चंबल अंचल में होने वाले प्रत्येक चुनाव में गोलीबारी की घटनाएं देखने को मिलती है। कई बार घटनाएं बहुत बड़ा रूप भी ले लेती है। इन हिंसक घटनाओं को रोकने के लिए एहतियातन सभी लाइसेंसी शस्त्रों को थानों में जमा करवा लिया जाता है और चुनाव के बाद लाइसेंसी शस्त्रों को वापस कर दिया जाता है, लेकिन इस बार अभी तक लाइसेंसी हथियार थानों में जमा नहीं हो सके हैं।
पिछली बार भी आचार संहिता लागू होने पर जमा किए गए थे लाईसेंसी हथियार
पिछली बार जब पंचायत चुनाव की आचार संहिता लागू की गई थी उस वक्त भी बड़ी संख्या में ग्वालियर, भिंड और मुरैना के थानों में लाइसेंसी हथियार जमा करने की प्रक्रिया की गई थी। इस दौरान 60% से ज्यादा लोगों ने अपने अपने लाइसेंसी हथियार थानों में जमा कर दिए थे। चुनाव निरस्त होने की वजह से पुलिस प्रशासन द्वारा की गई यह पूरी मेहनत बेकार चली गई थी।
थाने में बंदूकों के रखरखाव में होती है पुलिस विभाग को परेशानी
भिंड, मुरैना और ग्वालियर के थानों में लाइसेंसी हथियारों को रखने में पुलिस विभाग को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। भिंड, मुरैना और ग्वालियर में थानों की संख्या बहुत कम है जबकि लाइसेंसी हथियारों की संख्या बहुत ज्यादा है। ऐसे में हजारों की संख्या में लाइसेंसी हथियार थानों में जमा होने पहुंचते हैं तो थाने के अंदर लाइसेंसी हथियार जमा करने की जगह तक नहीं बचती है। सभी लाइसेंसी हथियारों को सुरक्षित तरीके से थानों में माल खाने समेत अन्य स्थानों पर जमा करना पुलिस विभाग के लिए भी परेशानी खड़ी कर देता है।
लाइसेंसधारी लोगों को अपने हथियारों की रहती है चिंता
चुनाव आते ही लाइसेंसधारी लोगों को अपने अपने लाइसेंसी हथियार नजदीक के थानों में जमा करना होते हैं लेकिन ऐसे में लाइसेंस धारकों को अपने अपने हथियार की चिंता भी सताती रहती है। उन्हें इस बात का डर रहता है कि थानों में उनके हथियार कितने सुरक्षित रखे जाएंगे। कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं कि लाइसेंसी हथियारों में टूट-फूट हो जाती है इसलिए लाइसेंस धारक लोग हथियारों की सुरक्षा को लेकर भी चिंतित बने रहते हैं।

नेता प्रतिपक्ष नें लिखा भिंड कलेक्टर को पत्र

नेता प्रतिपक्ष डॉ.गोविंद सिंह नें इस सब के बीच भिंड कलेक्टर डॉ.सतीश कुमार एस. को पत्र लिखकर ये मांग की है कि प्राईवेट संस्थानों में नौकरी कर रहे सुरक्षाकर्मियों को आचार संहिता के दौरान अपने लाईसेंसी हथियार थाने में जमा करने में छूट प्रदान की जाए। डॉ.गोविंद सिंह ने पत्र में लिखा है कि भिंड के कई लोग देश के अन्य राज्यों मे सुरक्षाकर्मी की ड्यूटी कर रहे हैं, ऐसे में अगर उन्होंने अपने हथियार थानों मे जमा किए तो उनके सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।

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English summary
licensed weapons increased the tension between panchayat and urban body elections
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