ग्वालियर में निकाय चुनाव में मिली हार के बाद बीजेपी नेताओं ने भोपाल भेजी गोपनीय रिपोर्ट
ग्वालियर में निकाय चुनाव में मिली हार के बाद समीक्षा के लिए बीजेपी नेताओं मे भोपाल भेजी गोपनीय रिपोर्ट
ग्वालियर, 25 जुलाई। ग्वालियर के निकाय चुनाव में महापौर सीट गंवाने के बाद अब हार के कारणों पर बीजेपी पार्टी ने समीक्षा करना शुरू कर दिया है। इसी से संबंधित एक गोपनीय रिपोर्ट ग्वालियर के बीजेपी नेताओं द्वारा अपने प्रदेश नेतृत्व को भेजी गई है और इस रिपोर्ट में हार के कारणों के बारे में जानकारी भी दी गई है।

57 साल बाद नगर निगम की महापौर सीट पर मिली हार
बीजेपी का बीते 57 साल से ग्वालियर नगर निगम की महापौर सीट पर कब्जा था, लेकिन इस बार के निकाय चुनाव में बीजेपी के हाथ से यह सीट पर निकल गई और कांग्रेस की शोभा सिकरवार महापौर सीट पर काबिज हो गई। हार मिलने के बाद अब बीजेपी में हार के कारणों को जानने के लिए मंथन जारी है। इसके लिए जिले के नेताओं ने अपनी-अपनी गोपनीय रिपोर्ट बनाकर वरिष्ठ नेतृत्व को भेज दी है।
टिकट वितरण को लेकर पार्टी के नेताओं में पनप असंतोष
पार्षद प्रत्याशियों के टिकट वितरण को लेकर ही पार्टी के नेताओं में असंतोष पनप गया था। इस बात का उल्लेख भोपाल भेजी गई रिपोर्ट में नेताओं द्वारा किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि जब टिकट वितरण किया जा रहा था तब कई नेता टिकट कटने की वजह से नाराज हो गए थे और इस वजह से उन नेताओं ने पार्टी के खिलाफ काम किया।
चुनाव के लिए नहीं तैयार की गई कोई मजबूत रणनीति
रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि निकाय चुनाव के लिए पार्टी में कोई रणनीति तैयार नहीं की गई थी, न ही ठीक से कार्य विभाजन किया गया था। यही वजह रही की पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को अंत तक यह जानकारी नहीं मिल सकी कि कौन सा कार्य किसको करना है।
तकनीकी खामियों को भी बताया गया जिम्मेदार
हार का सामना करने वाली सुमन शर्मा ने चुनाव हारने के पीछे का जिम्मेदार तकनीकी खामियों को बताया है, हालांकि उन्होंने यह बात भी कही है कि प्रशासन मैनेज हो गया था और अधिकारियों ने सामने वाले प्रत्याशी का सहयोग किया था।
गोपनीय रिपोर्ट के आधार पर हो सकती है कार्रवाई
प्रदेश नेतृत्व को भेजी गई गोपनीय रिपोर्ट के आधार पर कुछ नेताओं पर कार्यवाही भी हो सकती है। गोपनीय रिपोर्ट भोपाल पहुंचने के बाद अब यह कयास लगाए जा रहे हैं कि जिन पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं ने चुनाव के समय पार्टी के साथ विश्वासघात किया या अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निर्वहन नहीं की थी उन पर कार्रवाई होना लगभग तय है।












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