Gwalior News: ग्वालियर-15 से टिकट नहीं, अब किस भूमिका में होंगे बजरंगी दादा ? समर्थक भी परेशान
ग्वालियर 15 विधानसभा सीट से सिंधिया समर्थक मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को बीजेपी से टिकट मिलने के बाद इस सीट से भाजपा के टिकट पर तीन चुनाव लड़ चुके मूल भाजपाई जयभान सिंह पवैया का पत्ता साफ हो गया। पवैया इस सीट से दो बार हारे और एक बार जीत चुके है। लेकिन अब उनके लिए चुनाव लड़ने का ही संकट पैदा हो गया है।
सिंधिया परिवार और महल के खिलाफ आवाज बुंलद कर राजनीति में चमकते सितारे बने पवैया सिंधिया समर्थक की ही वजह से इस बार चुनाव लड़ने से फिलहाल वंचित हो चुके है।

जयभान सिंह लोकसभा के बाद ग्वालियर 15 विधानसभा सीट से ही चुनाव लड़े है। किसी और सीट के लिए पवैया की अब तक दावेदारी और इच्छा सामने नही आई है। ग्वालियर ग्रामीण, ग्वालियर 15, भितरवार, डबरा सीट पर बीजेपी प्रत्याशी घोषित हो चुके है। अब केवल ग्वालियर पूर्व और ग्वालियर दक्षिण सीट ही बाकी है कुछ महीने पहले इस बात की चर्चा जरूर चली थी कि पवैया ग्वालियर दक्षिण से मन बना सकते है। लेकिन उसके बाद मामला ठंडा पड़ गया। वैसे भी वहां से अनूप मिश्रा लगातार ताल ठोंक रहे है। पवैया ग्वालियर पूर्व से सतीश के खिलाफ चुनाव नही लडेंगें, ये भी तय है।तो अब जयभान सिंह पवैया के सामने प्रदेश की चुनावी राजनीति में शामिल होने का क्या विकल्प है ? क्या विकल्प फिलहाल बंद हो चुके है? खुद पवैया समर्थक भी इस बात को लेकर परेशान है। सवाल ये है कि अगर पवैया विधानसभा चुनाव नही लड़ेंगे, तो क्या भाजपा उनसे अब संगठन मे काम लेगी। या फिर पवैया लोकसभा चुनाव की तरफ रूख करेंगें, लेकिन भाजपा की मध्यप्रदेश में रणनीति विधानसभा चुनाव को लेकर जो इस बार रही है उससे इस बात के भी संकेत कम ही लगते है।
उम्र के लिहाज से देखा जाए तो इस बार अगर पवैया को चुनावी लड़ाई में शामिल नही किया जाता है तो भविष्य में वो भाजपा द्वारा टिकट के लिए बनाए एज फैक्टर के दायरे में आकर बाहर हो सकते है। ऐसे में ये कहना गलत नही होगा कि पवैया जिस सिंधिया परिवार (जब सिंधिया कांग्रेस में थे) के खिलाफ अब तक मुखर होकर बोलते रहे, उन्ही सिंधिया के समर्थक ने भाजपा में आकर पवैया की सीट पर काबिज पवैया को फिलहाल खाली हाथ बिठा दिया है।












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