गिर गाय क्यों हैं खास ? गुजरात में इन्हें 'सरोगेट मदर' बनाने की है तैयारी, दूध उत्पादन का मेगा प्रोजेक्ट
गुजरात में दूध का उत्पादन और गिर गायों की जनसंख्या बढ़ाने के लिए एक मेगा प्रोजेक्ट लॉन्च किया गया है। इसके तहत सामान्य गायों का इस्तेमाल 'सरोगेट मदर' के रूप में हो रहा है।

गिर वन के शेरों के बारे में बच्चों को बचपन से बताया जाता है। उसी तरह गुजरात की गिर गायें दुनिया भर में मशहूर हैं। यह गायों की ऐसी नस्ल है, जो विपरीत परिस्थितियों का मुकाबला करने में भी काफी सक्षम हैं और अधिक दूध देने में भी इनका नाम है। 8-9 सामान्य देसी गायों के मुकाबले यह अकेली ही उतना दूध उत्पादन करने में सक्षम हैं। इन गायों की इस विशेषता का लाभ उठाने के लिए गुजरात में एक बहुत ही महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। इन गायों की जनसंख्या बढ़ाने के लिए सामान्य देसी गायों की सहायता ली जा रही है। वह सरोगेसी मदर की भूमिका निभाएंगी और कम से कम समय में गिर गायों की आबादी बढ़ाने में सहयोग करेंगी, ताकि दूध का उत्पादन बढ़ाया जा सके।

गुजरात में गायों को 'सरोगेट मदर' बनाने की तैयारी
जो माताएं सामान्य तरीके से गर्भधारण नहीं कर पाती हैं, उनके लिए विज्ञान ने IVF (in-vitro fertilization) और सरोगेसी जैसी तकनीक विकसित की है। विज्ञान की मदद से अब ऐसी माताओं की सूनी गोद में भी किलकारियां गूंज रही हैं। लेकिन, गुजरात में एक दूध संघ ने केंद्र सरकार के सहयोग से एक ऐसी महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की है, जिसमें दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए गायों को 'सरोगेट मां' बनाया जाएगा। अमरेली स्थित अमर डेयरी इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की है।

रोजाना 20 से 30 लीटर दूध देती हैं गिर गाय
इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत गिर सांडों की अच्छी गुणवत्ता वाले वीर्य और गिर गायों की अच्छी गुणवत्ता वाले अंडाणुओं से लैबोरेटरी में भ्रूण तैयार किया जा रहा है। फिर इस भ्रूण को स्वस्थ गैर-गिर गायों के गर्भ में डाल दिया जा रहा है, जिससे भविष्य में ज्यादा दूध देने वाली स्वस्थ गिर गायों की जनसंख्या बढ़ाई जा सके। एक गिर गाय 1.5 साल में एक बछिया या बछड़ा दे सकती है। लेकिन, एक स्वस्थ गिर गाय रोजना 20 से 30 लीटर दूध देती हैं। जबकि, बाकी नस्ल की गाएं 3 से 5 लीटर ही दूध दे पाती हैं।

कैसे हो रही है गिर गायों की सरोगेसी ?
ToI की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमर डेयरी के मैनेजिंग डायरेक्टर आरएस पटेल ने कहा, 'हम वर्षों से कृत्रिम गर्भाधान की प्रक्रिया अपना रहे हैं, लेकिन उसकी सफलता का अनुपात सीमित है। इसलिए हमने गायों को सरोगेट मदर बनाने का पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया है। कॉन्सेप्ट यहां भी टेस्ट ट्यूब बेबी वाला ही है। लैबोरेटरी में भ्रूण तैयार किया जाता है, 8 दिनों तक इंक्यूबेटर में रखा जाता है और फिर चुनी हुई गायों में डाल दिया जाता है।' दूग्ध संघ को गिर सांड का वीर्य नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB)की ओर से चलने वाले गौशाला से मिला है। गिर गायों के अंडाणु अमरेली और पोरबंदर के ब्रीडरों से लिया गया है, जो दशकों से शुद्ध गिर नस्ल को संरक्षित कर रहे हैं।

किन गायों को बनाया जा रहा है सरोगेट मदर ?
एक गाय आमतौर पर एक महीने में 12 से 15 अंडे रिलीज करती है। लेकिन, अगर सामान्य तौर पर वह गर्भवती होती है तो 12 से 15 में एक ही बच्चे दे सकती है। बाकी के अंडे बेकार चले जाते हैं। पटेल के मुताबिक 'लेकिन इस तकनीक के माध्यम से हम ज्यादा दूध उत्पादन करने वाली गायों के अंडों का इस्तेमाल करके साल में 20 से 25 बच्चे पैदा करा सकते हैं। बछियों की अगली पीढ़ी ज्यादा मात्रा में दूध देने वाली गायें होंगी।' इस कृत्रिम गर्भाधान तकनीक के इस्तेमाल के लिए जरूरr मेडिकल उपकरण खरीदने पर अमर डेयरी ने 90 लाख रुपए खर्च किए हैं। इसके पैनल में तीन पशुचिकित्सक हैं और बाहर से भी दो एक्सपर्ट चिकित्कों की सेवाएं ली जा रही हैं। ये एक्सपर्ट किसानों के घर जाते हैं और उन स्वस्थ गायों की तलाश करते हैं, जिन्हें 'सरोगेट मदर' बनाया जा सकता है।

200 गायों को सरोगेट मदर बनाने का शुरुआती लक्ष्य
इसकी पूरी लागत दुग्ध संघ, गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन और केंद्र सरकार की ओर से उठाई जा रही है। पटेल ने बताया है कि, 'पहली कोशिश में हमने 54 अंडे निकाले। उनमें से हम 15 भ्रूण तैयार करने में सफल हुए, जिन्हें हमने पिछले हफ्ते गायों (सरोगेट मदर)में डाल दिया है। एक महीने बाद हम इसकी सफलता का अनुपात देखने आएंगे। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से हमने दिसंबर के अंत तक 200 गायों को गर्भवती (सरोगेट मदर) बनाने का लक्ष्य तय किया है। '
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गिर गाय क्यों हैं खास ?
गिरऑर्गेनिक डॉट कॉम के मुताबिक गिर गाय भारत की एक प्रसिद्ध डेयरी पशु की नस्ल है। गिर पशुओं का मूल आवास गिर की पहाड़ियां और काठियावाड़ के जंगलों में माना जाता है। इनमें गुजरात के अमरेली, भावनगर, जूनागढ़ और राजकोट जिले शामिल हैं। यह नाम गुजरात के बहुतचर्चित गिर के जंगलों से जुड़ा है। गिर नस्ल की गायों की भारत के बाहर के देशों में भी बहुत ज्यादा डिमांड है। अमेरिका, मेक्सिको, वेनेजुएला और बार्जील में इसका निर्यात भी हुआ है और वहां इनसे बच्चे भी पैदा हो रहे हैं। गिर गायों की नस्ल बहुत ज्यादा दूध उत्पादन की वजह से तो जानी ही जाती हैं, उष्णकटिबंधीय इलाकों में होने वाले रोगों और विभिन्न विपरीत परिस्थितियों का सामना करने में भी काफी सक्षम मानी जाती हैं। (तस्वीरें सांकेतिक और सौजन्य-सोशल मीडिया वीडियो)












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