तीन दोस्तों ने बंजर धरती समेत गांवभर में लगाए 3,000 पेड़, बारिश से छाई हरियाली, चमकी सूरत

जूनागढ़। गुजरात में कच्छ के रण समेत कुछ इलाके ऐसे हैं..जहां पेड़-पौधों की बड़ी कमी है। नमकीले पानी की झीलें और खादर होने से हरियाली नहीं पनपती। मगर, यहां वृक्षारोपण करने वाले लोगों ने अनूठे तरीके अपनाकर पेड़-पौधे लगाए हैं। जूनागढ़ जिले में तिरूपति मंदिर के लिए प्रसिद्ध खोरासा (आहीर) गांव ने ऐसे ही लोगों की वजह से आज हरियाली की चादर ओढ़ ली है। बारिश में पेड़-पत्तों से टपकता पानी...यहां की बंजर धरती वाली तस्वीर से एकदम उल्टी तस्वीर ले आया है।

three friends three thousand trees plantation in village

तीन दोस्तों बटुक चावड़ा, कमलेश लुहार और रमेश भरवाड़ ने कुछ साल पहले वृक्षारोपण का संकल्प लिया था। वे नीम, आम, पीपल आदि के पेड़ लगाने लगे। उन्होंने न सिर्फ अपने गांव के अंदर, बल्कि श्मशान से लेकर आस-पास की खाली जमीन पर भी वृक्षारोपण किया। पेड़ों को नियमित पानी दिया। जिससे हालत सुधरने लगे। करीब 3 हजार पेड़ लगे, जिनसे वहां पेड़-पौधों की कमी दूर हो गई। पर्यावरण के प्रति उनके लगाव के चलते ही साबली डैम के पास स्थित हनुमान मंदिर भी अब हरे-भरे वातावरण के बीच चमकता नजर आता है।

बटुक चावड़ा बताते हैं कि, वे मंदिर परिसर और उसके आस-पास 200 से ज्यादा पेड़ लगा चुके हैं। उन्हें वृक्षों से बेहद लगाव है। उन्होंने वन विभाग की नर्सरी से पौधे प्राप्त किए, वनकर्मियों की समय-समय पर मदद भी की। जहां-जहां उन्होंने अपने दोस्तों के साथ पेड़ लगाए..वहां चार से पांच वर्ष तक पेड़ों को जानवरों से बचाया गया और जहां कभी श्मशान घाट एवं मंदिर की जमीनें बंजर पड़ी रहती थीं...वहां चारों ओर अब हरियाली है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+