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गांधीवादी शिक्षक: बच्चों ने गलती की तो खुद 51 घंटे चरखा चलाया, सजा में पिलाते हैं नीम का जूस

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सूरत। महात्मा गांधी राष्‍ट्रपिता के रूप में भारतीयों के बीच हमेशा प्रासंगिक रहेंगे। उनकी जिंदगी के समय के तौर-तरीके और शिक्षाएं कुछ शिक्षकों के जरिए आज भी वैसे ही बच्‍चों को विद्या के रूप में मिल रही है। गांधीजी गुजरात में जन्‍मे थे। इसलिए यहां गांधीजी के किस्‍से-किवदंतियां ज्‍यादा कही-सुनी जाती हैं। सूरत के महेश पटेल तो मानो बिल्‍कुल गांधीजी के नक्‍शे-कदम पर चल रहे हैं। हां जी, वह सूरत में तीन भाषाओं में 5 स्कूल चलाते हैं। जिनमें हिंदी, गुजराती और अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा दी जाती है।

'गांधीवादी' शिक्षक की कहानी

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महेश पटेल के स्‍कूल ऐसे हैं, जहां बच्‍चों को गांधीवादी तरीके से शिक्षा दी जा रही है। या यूं कहें कि गांधीवादी-शिक्षा दी जाती है। इन स्‍कूलों में शिक्षक विद्यार्थियों को महात्मा गांधी की सीखों से करुणा, दया और देशप्रेम का महत्व समझाते हैं। यहां शिक्षक बच्चों को शारीरिक तौर पर ऐसे प्रताडि़त नहीं करते, जैसी पिटाई की खबरें देश के बहुत से सरकारी या प्राईवेट स्‍कूलों से आती हैं। महेश पटेल कहते हैं- बच्चों से मारपीट करना उन्‍हें द्वेष करने वाला बना सकता है, वो उस शिक्षक का सम्‍मान नहीं करेंगे।

सूरत में इनके 3 भाषाओं में 5 स्‍कूल

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बकौल महेश, ''हम ये मानते हैं जब तक बच्‍चों के हृदय में शिक्षकों के प्रति आदर नहीं होगा, उनके चरित्र और व्यवहार में बदलाव नहीं आएगा। मार से वे आपके शत्रु जैसा व्यवहार करेंगे। और, डर से उनका विकास भी कम होगा। जब वे खुद चीजों को समझने लगेंगे तो वे तेजी से 'ग्रो' करेंगे।'

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बच्‍चों को बुरी तरह नहीं पीटना चाहिए। इसके बजाए उन्‍हें गलती करने पर अन्‍य तरीकों से दंडित किया जा सकता है। जैसे यहां स्‍कूल में नीम के पत्तों से जूस निकालने की मशीन लगाई है। जब किसी बच्‍चे को दंडित करना पड़ता है, तो उसे नीम का जूस पीने की सजा देते हैं। जिससे उसे कुछ समय तक ही कड़वाहट सहनी पड़ती है...और ये सजा उसे शारीरिक तौर पर नुकसान नहीं पहुंचाती। बल्कि नीम शरीर के लिए फायदेमंद ही होता है।

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बच्‍चों को प्रताडि़त न करें, उन्‍हें अन्‍य तरीके से सुधारें

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महेश कहते हैं कि, "हम गांधी जी के रास्तों पर चलने की बातें सुनते सुनते बड़े हुए। वे अपने सभी कार्य स्वयं करते थे। हमने भी ये किया और अपने विद्यार्थियों को भी यही शिक्षा दे रहे हैं।"

अब तक 7 हजार बच्‍चों को सिखाया ऐसा पाठ

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बता दें कि, महेश पटेल पिछले 18 वर्षों से बच्‍चों को पढ़ा रहे हैं। अब तक उन्‍होंने लगभग 7000 बच्चों को गांधीवादी तरीके से करुणा का पाठ पढ़ाया है। वे सूरत में 1992 से स्कूल चला रहे हैं। वर्ष 2016 में उन्‍होंने लगातार 51 घंटे चरखा चलाया था। उसकी वजह यह थी कि उनके स्कूल में बच्चे साफ-सफाई रखने की बात नहीं मान रहे थे। तब उन्‍होंने चरखा चलाकर बात मनवाई।

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51 घंटे चरखा चलाया, बच्‍चों ने अगले दिन माफी मांगी

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उन्‍होंने कहा था, ''मैं सजा के तौर पर 51 घंटे तक चरखा चलाऊंगा।" उन्‍होंने चरखा चलाया। फिर बच्चों ने अगले दिन ही माफी मांग ली। लोग कहते हैं कि, उनके यहां ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। स्‍कूल में आने वाले उनके बच्‍चे सुधर गए। वह गांधीजी के रास्ते पर चलते हैं।'

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English summary
Surat Teacher Mahesh Patel: Meet Gandhiji's true follower, 5 schools in 3 languages, since 2003 he teached lessons In Gandhian way to 7000 children
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