गुजरात में 'पूर्णा योजना' से सुरक्षित हो रहा है किशोरियों का स्वास्थ्य

गुजरात में किशोरियों/महिलाओं के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए भूपेंद्र पटेल की सरकार एक विशेष पोषण अभियान चला रही है। इस पोषण अभियान का नाम 'पूर्णा योजना' है, जिसका उद्देश्य समाज को कुपोषण मुक्त बनाना है। 'पूर्णा योजना' में पूर्णा अंग्रेजी के शब्दों से बना है, जिसका अर्थ है- 'प्रिवेंशन ऑफ अंडर-न्यूट्रीशन एंड रिडक्शन इन न्यूट्रिशनल एनीमिया'। यह योजना राज्य के महिला एवं बाल कल्याण विभाग की ओर से चलायी जा रही है। इस स्कीम के तहत किशोरियों को कुपोषण और एनीमिया से रक्षा की ही जाती है, उनके कौशल विकास पर भी जोर दिया जाता है। इस योजना का मकसद किशोरियों और भविष्य की माताओं के शीरीरिक फिटनेस पर जोर, जिसे आमतौर पर समाज पहले तबज्जो नहीं देता था।

Purna Yojana:Adolescent girls health is getting better in Gujarat, society is becoming healthier

किशोरियों को पोषण की सुविधा देने की योजना
गुजरात सरकार की यह योजना मुख्य रूप से दूर-दराज के इलाकों में बेटियों और माताओं के स्वास्थ्य की रक्षा करने और स्वस्थ समाज बनाने के साथ ही माताओं तथा उसके होने वाले बच्चे को सेहतमंद बनाए रखने के लिए है। इस योजना के तहत 14 से 18 वर्ष की उम्र की किशोरियों/लड़कियों के भोजन एवं पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करना है। जिसके तहत उन्हें आवश्यक चिकित्सा सुविधा और पोषक तत्वों से युक्त टेक होम राशन उपलब्ध कराया जाता है। गुजरात सरकार सिर्फ इस योजना में हर महीने एकमुश्त राशन उपलब्ध करवाती है। राज्य सरकार ने 2018 में यह योजना शुरू की थी, जिसके लिए 270 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की गई थी।

इस संबंध में वाव की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता चंद्रीकाबेन ने कहा कि

उचित पोषण वाले आहार की अनदेखी के कारण हमारे क्षेत्र में किशोर लड़कियों को पूर्ण रूप से पोषण नहीं मिल पाता था। अब इस पूर्णा योजना के माध्यम से उचित राशन और जानकारी प्रदान की जाती है।

गुजरात में यह योजना राज्य के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से चलाई जाती है। राज्य सरकार की योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और आवश्यक डेटा मॉनिटरिंग के लिए आंगनबाड़ी केंद्र प्रबंधकों को स्मार्ट फोन से लैस किया गया है। प्रदेश में 53 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से 60 लाख से अधिक किशोरियों को इस योजना के अंतर्गत शामिल किया गया है।

थराद की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता राधाबेन ने कहा कि

पूर्णा योजना से महिलाओं में कुपोषण की दर में कमी आई है और बच्चों में भी कुपोषण की दर में कमी आई है।

वहीं भावना बेन ने कहा,

आंगनबाडी से उन्हें जो पोषण राशन किट मिलता है, वह शरीर के विकास के लिए बहुत जरूरी है।

स्वस्थ समाज की दिशा में बढ़ रहा गुजरात
गुजरात की मौजूदा भूपेंद्र पटेल की नेतृत्व वाली सरकार राज्य से कुपोषण के कलंक को मिटाने और एक स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार की ओर से हाल के बजट में इस योजना के लिए 220 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। यही वजह है राज्य सरकार की कोशिशों से प्रदेश से कुपोषण का कलंक दूर होने लगा है और स्वस्थ समाज का निर्माण संभव हो पा रहा है।(तस्वीर-प्रतीकात्मक)

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