मिशन गुजरात में नरेश पटेल और प्रशांत किशोर की खिचड़ी पकेगी? कांग्रेस में क्या चल रहा है, जानिए
अहमदाबाद, 31 मार्च: गुजरात में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। यूपी का चुनाव खत्म होते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने गृहराज्य में जबर्दस्त रोडशो कर के एक तरह से चुनाव अभियान का आगाज भी कर दिया है। 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंकी थी और 182 सीटों में से उसे 77 पर जीत मिली थी। इसबार पार्टी इससे आगे निकलकर बहुतमत के आंकड़े को पार कर प्रदेश की सत्ता से दो दशकों से ज्यादा के अपने वनवास को खत्म करने का लगभग आखिरी दांव लगा रही है। आखिरी दांव इसलिए क्योंकि पंजाब की तरह आम आदमी पार्टी भी वहां सक्रिय है और यह कांग्रेस के लिए ही मुश्किल खड़ी करती दिख रही है। कांग्रेस के भीतर इस समय जो उम्मीद की किरण दिख रही है, वह दो किरदारों पर टिकी है, जो अभी कांग्रेस से नहीं जुड़े हुए हैं। एक हैं पाटीदार नेता नरेश पटेल और दूसरे चुनावी रणनीतिकार-प्रशांत किशोर।

नरेश पटेल और प्रशांत किशोर की खिचड़ी पकेगी?
खबरें हैं कि गुजरात में पाटीदार समाज से आने वाले प्रभावशाली लेउआ पटेलों के नेता नरेश पटेल के कांग्रेस में जाने की संभावना काफी ज्यादा है। जानकारी के मुताबिक बात सिर्फ इसपर अटक रही है कि वे चाहते हैं कि गुजरात में कांग्रेस की चुनावी रणनीति का जिम्मा पूरी तरह से प्रशांत किशोर को सौंप दिया जाए। लेकिन, कांग्रेस में कई ऐसे नेता भी हैं, जो प्रशांत किशोर के नाम पर सहमत नहीं हैं। ऐसे नेताओं का मानना है कि पटेल और किशोर के बीच जुगलबंदी है। उनका दावा है कि किशोर चाहते हैं कि पार्टी नरेश पटेल को मुख्यमंत्री का चेहरा प्रोजेक्ट करे और इसके बदले पटेल चाहते हैं कि वह पार्टी की चुनाव की कमान संभालें। गुजरात कांग्रेस के उपाध्यक्ष हेमंग वासवदा दावा कर चुके हैं, 'नरेश पटेल जल्द ही कांग्रेस पार्टी में शामिल होंगे।'

कौन हैं नरेश पटेल ?
उद्योगपति नरेश पटेल श्री खोडलधाम ट्रस्ट के चेयरमैन हैं, जो राजकोट के पास स्थित विशाल देवी खोडियार मंदिर को संचालित करता है। खोडियार माता को लेउआ पटेलों का संरक्षक माना जाता है। कांग्रेस में जो लोग पटेल के शामिल होने के समर्थक हैं, उन्हें लगता है कि नरेश पटेल के प्रभाव से लेउआ पटेल उससे जुड़ सकते हैं, जिनका मूल रूप से सौराष्ट्र और मध्य गुजरात में प्रभाव माना जाता है। इसकी वजह ये है कि गुजरात में पाटीदारों या पटेलों की जनसख्या प्रदेश की करीब 6.5 करोड़ आबादी में लगभग 1.5 करोड़ है। यह प्रदेश का राजनीतिक रूप से सबसे प्रभावशाली और संपन्न समाज माना जाता है। पाटीदार समाज में भी दो मुख्य उपजातियां हैं। लेउआ पटेल और कडवा पटेल। इन दोनों में लेउआ पटेल की जनसंख्या थोड़ी अधिक है।

लेउआ और कडवा पटेल की राजनीति
हालांकि, गुजरात में एक ओबीसी कोली जाति भी है, जो जनसंख्या में पाटीदार समाज पर भारी पड़ते हैं। लेकिन, यह समाज कई उपजातियों में बंटा है, इसलिए इसने प्रदेश की राजनीति में कभी उतना प्रभाव नहीं जमा पाया है, जैसा दबदबा पाटीदारों का रहा है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल गुजरात के 17वें सीएम हैं, लेकिन इस पद पर बैठने वाले वे पांचवें पाटीदार नेता हैं। इस साल के अंत में होने वाले चुनाव से पहले बीजेपी ने फिर से इसलिए पटेल समाज को यह कुर्सी दी है, क्योंकि दो दशक से ज्यादा के उसकी सत्ता में पाटीदारों के समर्थन ने बहुत बड़ा रोल निभाया है। लेकिन, भूपेंद्र पटेल पहले कडवा पटेल हैं, जो मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे हैं। हालांकि, यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल लेउआ पटेल हैं, लेकिन उनकी शादी कडवा पटेल से हुई है। कांग्रेस के रणनीतिकारों के दिमाग में लेउआ और कडवा पटेल की अंदरूनी राजनीति का भी रोल हो सकता है, जिसकी वजह से नरेश पटेल पर दांव लगाने का प्रयास हो रहा है। पाटीदार समाज पर नरेश पटेल के दबदबे को बीजेपी भी महसूस करती है। यही वजह है कि खुद सीएम भूपेंद्र पटेल भी उन्हें अपनी पार्टी में आने की सलाह दे चुके हैं।

गुजरात कांग्रेस में क्या चल रहा है ?
कांग्रेस पिछले चुनाव से ही पाटीदार नेता हार्दिक पटेल को आगे कर रही है और अब तो वे औपचारिक तौर पर कांग्रेस में शामिल हैं। हार्दिक, भूपेंद्र पटेल की तरह ही कडवा पाटीदार हैं। लेकिन, गुजरात की राजनीति को अंदर से समझने वाले जानते हैं कि वैसे परंपरागत तौर पर खुद को भगवान राम के वंशज मानने वाले पाटीदार दो दशकों से ज्यादा से एक ही राजनीतिक पार्टी के साथ डटे हुए हैं। क्रमश: खुद को लव (लेउआ पटेल) और कुश (कडवा पटेल) का वंशज मानने वाला यह समाज 1980 के दशक से ही भाजपा के साथ जुड़ा रहा है। इसके पीछे कांग्रेस की क्षत्रिय-हरिजन-आदिवासी और मुस्लिमों के गठबंधन के खिलाफ प्रतिक्रिया थी। अब देखने वाली बात है कि अगर नरेश पटेल कांग्रेस के साथ आते हैं और हार्दिक पांच साल पहले से ही जोड़ लगा रहे हैं, तो क्या कांग्रेस प्रशांत किशोर की बनाई रणनीति पर चलकर बीजेपी को हराकर दशकों का अपना वनवास खत्म कर पाती है? वैसे प्रशांत किशोर ऐसी किसी ऐसी पार्टी को चुनाव जिताने में मदद कर पाए हों, जो जमीन पर खुद बहुत कमजोर हो, इसका रिकॉर्ड शायद ही नजर आता है। उन्होंने उस पार्टी की राह जरूर आसान बनाने में सहायता की है, जो खुद से भी मजबूत रही है। (तस्वीरें-फाइल)
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