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बुलेट ट्रेन: फाइनेंशियल बिड खुली, 4 कंपनियां बाहर, परियोजना में लागू होगा जॉइंट सिटी कनेक्टिविटी सिस्टम

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अहमदाबाद। मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलने वाली देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना के बारे में नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन (एनएचएसआरसीएल) की ओर से अहम जानकारी दी गई है। एनएचएसआरसीएल के मुताबिक, अहमदाबाद-मुंबई हाई स्पीड बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में 28 स्टील ब्रिज निर्माण के लिए फाइनेंशियल बिड खुली है। इसमें 8 कंपनियों ने बोली लगाई थी, जिसमें से चार डिस्क्वालिफाई हो गईं। वहीं, अलग तरह के सिस्टम की बात भी सामने आई है। बताया गया है कि, बुलेट ट्रेन परियोजना में इंटर-यूरोपियन मिलान-रोम हाई स्पीड रेल जॉइंट सिटी कनेक्टिविटी सिस्टम लागू होगा। इसके तहत स्टॉपेज वाले शहर 'जॉइंट सिटी कनेक्ट' माने जाएंगे। जॉइंट सिटी कनेक्टिविटी सिस्टम यानी दो ऐसे शहरों के बीच कम समय में सफर कराना, जो नजदीक हों लेकिन एक में वे जरूरी सुविधाएं न हों जो दूसरे शहर में हैं। जैसे सूरत और वापी शहर हैं। इनमें से वापी में इंडस्ट्री तो है, लेकिन एयरपोर्ट व बड़े एजुकेशनल इंस्टीट्यूट या बड़े अस्पताल नहीं हैं। एयरपोर्ट सूरत में है। बड़े अस्पताल, यूनिवर्सिटी समेत अन्य बड़े एजुकेशनल इंस्टीट्यूट भी सूरत में हैं। ऐसे में इन शहरों में "जॉइंट सिटी कनेक्टिवटी" होगी। तब बुलेट ट्रेन से सफर से करने वाले लोग महज 29 मिनट में सूरत से वापी का सफर कर पाएंगे। यह कुछ वैसा होगा, जैसे मुंबई की फास्ट लोकल से चर्चगेट से अंधेरी जाना।

इन शहरों में होगी जॉइंट सिटी कनेक्टिविटी

इन शहरों में होगी जॉइंट सिटी कनेक्टिविटी

एनएचएसआरसीएल के मुताबिक, हमारी हाईस्पीड रेल परियोजना में इकोनॉमिक फुटप्रिंट और रेल ट्रांसपोर्टेशन केस स्टडी के आधार पर मिलान-रोम सिस्टम लागू करने का फैसला लिया गया है। तो जैसे वापी और सूरत के बीच ये सिस्टम लागू होगा, उसी तरह सूरत-भरूच और आणंद-अहमदाबाद में भी लागू किया जा सकता है। बुलेट ट्रेन से इन शहरों के बीच की दूरी आधे घंटे की रह जाएगी। बता दिया जाए कि, अहमदाबाद से मुंबई तक ये हाई स्पीड रेल कॉरिडोर 508 किलोमीटर लंबा है। मुंबई महाराष्ट्र की राजधानी व देश की आर्थिक राजधानी है, तो वहीं अहमदाबाद गुजरात का सबसे बड़ा शहर है। इन दोनों शहरों की विश्वस्तर पर भारत के लिए बड़ी अहमियत है।

दावा- किसानों के खेत नहीं होंगे प्रभावित

दावा- किसानों के खेत नहीं होंगे प्रभावित

बुलेट ट्रेन की लाइन के निर्माण कार्य के बारे में भी एनएचएसआरसी ने जानकारी दी है। बताया गया कि, 508 किलोमीटर लंबे अहमदाबाद-मुंबई हाई स्पीड ट्रेन कॉरिडोर में रूट के लिए केवल 17.5 मीटर चाड़ाई में ही जमीन का इस्तेमाल किया जाएगा। एनएचएसआरसी ने दावा किया है कि, रूट के आसपास की जमीन या किसानों की खेती को प्रभावित नहीं होने देंगे। एक अधिकारी ने कहा- "सभी क्रेन और अन्य कंस्ट्रक्शन वेहिकल दायरे में रहकर ही प्रोजेक्ट पूरा करेंगे। बुलेट ट्रेन के लिए लाइन बिछाने के लिए रूट मार्किंग का काम शुरू हो गया है। सबसे पहले यह काम आणंद से शुरू किया गया, जहां रूट अलाइनमेंट भी स्पष्ट हो गया है।"

पूरी परियोजना में 23 रिवर ब्रिज बनेंगे

पूरी परियोजना में 23 रिवर ब्रिज बनेंगे

पिछले दिनों ही एनएचएसआरसी द्वारा बताया गया था कि, पूरी परियोजना में कुल 23 रिवर ब्रिज बनाए जाएंगे। जिनमें से 5 कंक्रीट ब्रिज और 11 स्टील ब्रिज होंगे। इसका टेंडर पी-1 बी और पी-1 सी दो हिस्सों के पैकेज में जारी किया गया। जिसमें ब्रिज के निर्माण कार्य शामिल हैं। वहीं, बुलेट ट्रेन रूट के निर्माण-कार्य का जिम्मा लार्सन एंड टुब्रो के पास है। इसी साल लार्सन एंड टुब्रो को वडोदरा से वापी और वडोदरा से अहमदाबाद के बीच के बुलेट ट्रेन रूट बनाने का ठेका दिया गया है।

11 स्टील ब्रिज, जबकि 5 ब्रिज कंक्रीट वाले बनेंगे

11 स्टील ब्रिज, जबकि 5 ब्रिज कंक्रीट वाले बनेंगे

अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना देश की सबसे बड़ी और बहुप्रतीक्षित परियोजना है। इसके बारे में नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन की ओर से बताया गया है कि, बुलेट ट्रेन के लिए गुजरात में कुल 19 ब्रिज बनेंगे। जिसमें सबसे लंबा 1260 मीटर का ब्रिज भरूच जिले में नर्मदा नदी पर बनेगा। जबकि, अन्य चार ब्रिज महाराष्ट्र में बनेंगे, जिसमें वैतरणा नदी पर बनने वाला ब्रिज 2280 मीटर लंबा होगा। इन ब्रिज को 3 साल में बनाना होगा। एनएचएसआरसी द्वारा पी-1 बी पॅकेज के टेडंर में 237.1 किलोमीटर रूट शामिल है, जो वापी से सूरत-वडोदरा जिलों के बीच का हिस्सा है। इसमें जो ब्रिज बनाए जाएंगे वो दोहरी लाइन वाले ब्रिज होंगे। ये ब्रिज स्टील और कंक्रीट से बनेंगे। इस पूरे रूट में कुल 11 ब्रिज स्टील वाले, जबकि 5 ब्रिज कंक्रीट वाले बनेंगे।

फरवरी 2021 में खोला जाएगा टेंडर

फरवरी 2021 में खोला जाएगा टेंडर

परियोजना से जुड़े आॅफिशियल्स के मुताबिक, ब्रिज से जुड़े टेंडर को 18 फरवरी को खोला जाएगा। वहीं, पी-1 सी पॅकेज के लिए जारी टेंडर 19 फरवरी 2021 को खुलेगा। उधर, बुलेट ट्रेन के रूट मार्किंग की जानकारी भी सामने आई है। रूट मार्किंग का काम गुजरात के आणंद से शुरू हुआ बताया जा रहा है। यहां तक कि, बुलेट ट्रेन की रूट अलाइनमेंट भी स्पष्ट हो गई है। हालांकि, इससे पहले सी-6 पॅकेज में गुजरात के वडोदरा से अहमदाबाद शहर के बीच सिविल वर्क का डिजाइन कंस्ट्रक्शन, हाई स्पीड डबल लाइन (87.5), 25 क्रासिंग ब्रिज, 97.5 किलोमीटर पैरेलेल ब्रिज, मेंटिनेंस डिपो जैसे कार्य होने हैं। बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के सी-6 पॅकेज के अलावा पॅकेज सी-4 के निर्माण कार्य से जुड़ी जानकारी भी मिली है। बताया जा रहा है कि, इसमें परियोजना का कुल 46.66% हिस्सा शामिल है, जिसकी लंबाई 237 किलोमीटर है। सी-4 पॅकेज में भी सिविल, बिल्डिंग वर्क्स का डिजाइन व निर्माण और टेस्टिंग व कमीशनिंग शामिल है।

14 ट्रैक्शन, 16 डिस्ट्रीब्यूशन सबस्टेशन बनाए जाएंगे

14 ट्रैक्शन, 16 डिस्ट्रीब्यूशन सबस्टेशन बनाए जाएंगे

एनएचएसआरसीएल की ओर से पिछले दिनों यह भी बताया गया था कि, बुलेट ट्रेन की पावर सप्लाई के लिए 14 ट्रैक्शन और 16 डिस्ट्रीब्यूशन सबस्टेशन बनाए जाएंगे। ये सब-स्टेशन बुलेट ट्रेन के स्टेशनों के पास ही होंगे। इन सबस्टेशंस के जरिए परियोजना में बिजली खपत की जरूरत पूरी होगी। एक इलेक्ट्रिक सबस्टेशन सूरत के अन्तरोली में बनाया जाना है, वहां विद्युत सप्लाई के लिए गुजरात विद्युत की ओर से 32 लोकेशनों पर कनेक्शन दे दिए गए हैं। इसके अलावा बाकी की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना के सीएस-4 और सीएस-6 पैकेज के आॅर्डर (ठेका) सौंपने का काम पूरा हो ही चुका है।

रोलिंग स्टॉक मेंटेनेंस डिपो सूरत में बनाया जाएगा

रोलिंग स्टॉक मेंटेनेंस डिपो सूरत में बनाया जाएगा

सूरत में बुलेट ट्रेन का रोलिंग स्टॉक मेंटेनेंस डिपो बनाया जाएगा। यह बात नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) की तरफ से ही बताई गई। पिछले दिनों कहा गया कि, मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलने वाली देश की पहली हाई स्पीड बुलेट ट्रेन (शिंकासेन ट्रेन) के सेट समुद्री मार्ग से होते हुए भारत लाए जाएंगे। जापान से आने वाले इस ट्रेन के पहले सेट की अगवानी सूरत करेगा, क्योंकि सबसे पहले यहीं पानी के रास्ते पहला सेट पहुंचेगा। फिर, सूरत में बुलेट ट्रेन का रोलिंग स्टॉक मेंटेनेंस डिपो बनाया जाएगा। धीरे-धीरे डिब्बे और अन्य चीजें तैयार की जाएंगी। इसके अलावा देश की पहली बुलेट ट्रेन को जापान जैसी सुरक्षित रखने की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। जिसमें यहां बुलेट ट्रेन के सुरक्षित परिचालन और किसी भी तरह की रेल दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ऑटोमेटिक रेल ट्रैक फ्रैक्चर डिटेक्शन सिस्टम लगेगा। फिर उसके ट्रैक में गड़बड़ी होने पर पायलट को तत्काल इन्फोर्मेशन मिल सकेगी। कहा जा रहा है कि, यह जापानी प्रणाली रेल पटरियों के माध्यम से विद्युत नियंत्रण सर्किट का उपयोग करेगी। जिससे ट्रेन की पटरियों पर रेल फ्रैक्चर की पहचान हो जाया करेगी।

कुल 12 स्टेशन बनाए जाएंगे बुलेट ट्रेन के लिए

कुल 12 स्टेशन बनाए जाएंगे बुलेट ट्रेन के लिए

बुलेट ट्रेन परियोजना में कुल 12 स्टेशन बनेंगे। इन स्टेशनों से होते हुए गुजरने वाली हाई स्पीड रेल की रफ्तार 320 किमी प्रति घंटा होगी। यानी यह ट्रेन अहमदाबाद से मुंबई की दूरी 2 घंटे में तय कर सकेगी। तेज स्पीड के चलते एक ट्रेन सीमित स्टेशनों पर ही रुकेगी। वहीं, स्लो बुलेट ट्रेन यह दूरी 3 घंटे में तय करेगी और सभी 12 स्टेशनों पर ठहरेगी। बता दें कि, 508 किमी के इस पूरे हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का 155 किमी रूट महाराष्ट्र में, 4.3 किमी रूट यूनियन टेरेटरी दादरा नगर हवेली में और 348 किमी हिस्सा गुजरात में है। इस तरह देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलने वाली इस सेमी-हाई स्पीड ट्रेन का रूट 500 किलोमीटर से ज्यादा लंबा हो जाता है।

सबसे बड़ी बाधा जमीन अधिग्रहण का काम काफी हुआ

सबसे बड़ी बाधा जमीन अधिग्रहण का काम काफी हुआ

एनएचएसआरसीएल के अधिकारियों का कहना है कि, बुलेट ट्रेन के रूट में सबसे बड़ी बाधा जमीन अधिग्रहण का काम अब तक 80 प्रतिशत से ज्यादा पूरा हो चुका है। बाकी बची जमीन के अधिग्रहण का काम भी तेजी से किया जा रहा है। सूरत के 28 गांव में से 25 गांव के लोगों ने अपनी जमीन दे दी है। अब कामरेज तहसील के 3 गांव बचे हैं। इन गांवों के 18 में से 15 ब्लाॅक के मालिक मुआवजे को लेकर सहमत नहीं हो रहे हैं। कम मुआवजे की बात कहते हुए कुछ और इलाकों के भी किसान अभी अपनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं हैं। हालांकि, नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन के अधिकारियों का मानना है कि, भूमि अधिग्रहण समय से पूरा हो जाएगा।

प्रोजेक्ट से 25,000 लोगों को रोजगार का दावा

प्रोजेक्ट से 25,000 लोगों को रोजगार का दावा

बुलेट ट्रेन परियोजना से हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) के मैनेजिंग डायरेक्टर अचल खरे के मुताबिक, बुलेट ट्रेन परियोजना हेतु लगभग 25,000 लोगों को काम-धंधे में लिया जाएगा। अचल खरे ने यह बात पिछले साल बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में आ रही अड़चनों का जिक्र करते वक्त कही। जिसमें लोगों को रोजगार मुहैया कराने का वादा करते हुए खरे ने यह भी कहा कि, यह बिलियन डॉलर्स का प्रोजेक्ट है तो इसमें कर्मचारियों की संख्या भी काफी ज्यादा होगी। 24 हजार करोड़ रुपए बड़ी राशि का अनुबंध तो अकेले एलएंडटी के साथ हुआ है।

देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजनादेश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना

किराया कितना होगा हमारी पहली बुलेट ट्रेन का?

किराया कितना होगा हमारी पहली बुलेट ट्रेन का?

मुंबई-अहमदाबाद के 508 किमी लंबे मार्ग पर दौड़ने वाली बुलेट ट्रेन के किराए की बात अभी स्पष्ट नहीं हुई। हालांकि, नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) के एक अधिकारी ने कहा था कि, इसमें सफर करने के लिए करीब 3000 रुपये चुकाने होंगे। महज 2:07 घंटे में इसके जरिए 508 किमी की दूरी तय की जा सकेगी। यानी ट्रेन की रफ्तार लगभग 320 किमी प्रति घंटे होगी।

English summary
like Europe, Joint city connectivity system will be implemented in India's first bullet train project
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