कोरोना: गुजरात के सभी स्कूल-कॉलेज, सिनेमा हॉल, आंगनबाड़ी बंद, पब्लिक प्लेस पर थूकने पर भी पाबंदी
गांधीनगर. कोरोनावायरस के खौफ के चलते गुजरात के सभी शिक्षण संस्थान- जैसे स्कूल, विश्वविद्यालय, कॉलेज, कोचिंग क्लासेस और आंगनबाड़ी केंद्र 29 मार्च तक बंद कर दिए गए हैं। राज्य सरकार के मुख्य सचिव अनिल मुकिम ने इस आदेश की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि, उपरोक्त संस्थान एवं केंद्रों के साथ ही राज्य के सभी सिनेमा हॉल और स्वीमिंग पूल भी 29 मार्च तक बंद रहेंगे। सरकार के यह आदेश 16 मार्च यानी, आज ही के दिन से लागू हो चुके हैं।

कोरोना वायरस: राज्य सरकार ने दिए ये आदेश
अनिल मुकिम ने कहा कि, कोरोना के मामलों को देखते हुए मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने बैठक की थी। जिसमें यह फैसला लिया गया कि, यहां सभी शिक्षण संस्थान 16 से 29 मार्च तक बंद रखे जाएं। फिलहाल, राज्य में कोरोना वायरस से जुड़ा एक भी पॉजीटिव केस सामने नहीं आया है। मगर, जो लोग भी विदेशों से लौटे हैं, सभी को निगरानी में रखा गया। चीन से लौटने वालों की संख्या सर्वाधिक थी। जिन्हें 14-15 दिन तक निगरानी में रखा गया।

गैर-शैक्षणिक कार्य अभी पाबंदी से बाहर
राज्य सरकार की तरफ से यह निर्देश भी दिए गए हैं कि, लोग सार्वजनिक स्थानों पर न थूकें। थूकने-फेंकने पर 500 रुपए का जुर्माना लगेगा। हालांकि, नॉन टीचिंग स्टाफ पर कोई पाबंदी नहीं है। यह जरूर है कि,16 से 29 मार्च तक की अवधि में राज्य में किसी तरह का शैक्षणिक कार्य नहीं किया जाएगा।

हाईकोर्ट ने दिए ये निर्देश
वहीं, सरकारी हुकूम से पहले गुजरात हाईकोर्ट ने भी सावधानी बरतने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने बार एसोसिएशन के सदस्योंं, रजिस्ट्री के सदस्यों तथा हाईकोर्ट के स्टाफ सहित अन्य के लिए कहा कि, भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। यह भी कहा कि, कोरोना वायरस से बचाव के लिए हाथ न मिलाएं। लोग नमस्ते करें। वकील भी इन दिनों अपने मुवक्किलों को अदालती कार्रवाई में न लाएं, तो बेहतर होगा।

एक हफ्ते में हलफनामा पेश करना होगा
हाईकोर्ट ने संज्ञान याचिका के तहत राज्य सरकार को नोटिस देते हुए कहा कि, कोरोना को लेकर अगली सुनवाई 20 मार्च को होगी। सरकार से राज्य में कोरोना वायरस से प्रभावित लोगों के विवरण भी लाने को कहा है। इसके अलावा साथ मरीजों के उपचार को लेकर भी सरकार से ब्यौरा मांगा जाएगा।

प्रतिवादियों में ये पक्ष शामिल
उपर्युक्त प्रतिवादियों में राज्य सरकार, राज्य के स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग के प्रधान सचिव, विधि विभाग के प्रधान सचिव शामिल हैं। खंडपीठ ने इन सभी प्रतिवादियों से एक सप्ताह के भीतर हलफनामा पेश करने को कहा है।












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