गुजरात में इस साल अब तक 50 अपराधियों को सुनाई जा चुकी मौत की सजा, अदालतों में तेज हुई कार्यवाही
अहमदाबाद। गुजरात में अदालतों की कार्यवाही इस साल काफी तेज रही। यहां पिछले महीने तक, साल की शुरूआत से 8 महीनों में 50 लोगों को मौत की सजा सुनाई जा चुकी है, जबकि साल 2006 से 2021 के बीच (15 सालों के दरम्यान) केवल 46 लोगों को ही मौत की सजा सुनाई गई थी। यह खुलासा राज्य में मौजूद आदालतों के आंकड़ों से खुलासा हुआ है। वकीलों के अनुसार, गुजरात की निचली अदालतों में मामलों की सुनवाई तेजी से हो रही है।

गुजरात में कोर्ट की कार्यवाही ने पकड़ी रफ्तार
गौरतलब है कि, इसी साल फरवरी के महीने में स्पेशल कोर्ट ने अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट के केस में 38 आरोपियों को मौत की सजा सुनाई थी। वे सभी आतंकी और उनका साथ देने वाले लोग थे। अहमदाबाद में सीरियल ब्लास्ट वर्ष 2008 में किए गए थे। तब सिलसिलेवार हुए धमाकों में 200 से अधिक लोग घायल हुए थे और 56 लोगों की मौत हो गई थी। वह मामला तब कई सालों तक अदालतों में चला, हालांकि 2021 तक भी फैसला नहीं आ पाया। फिर, इस साल गुनहगारों को मौत की सजा सुनाई गई।

50 अपराधियों को सुनाई गई मौत की सजा
कानून के जानकर कह रहे हैं कि, गुजरात में इस साल अदालतों की कार्यवाही ने ये साबित कर दिया कि, ट्रायल कोर्ट ने मृत्युदंड का आदेश सुनाने के मामलों में तेजी से वृद्धि की है। इसका पता इस बात से चलता है कि साल 2022 के अगस्त तक कुल 50 लोगों को मौत की सजा सुनाई जा चुकी है, जबकि साल 2006 से 2021 के बीच (15 सालों के दौरान) केवल 46 लोगों को ही मौत की सजा सुनाई गई थी। आंकड़ों से ज्ञात हुआ है कि, सूबे के विभिन्न शहरों में निचली अदालतों ने यौन अपराधों के लिए बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत दर्ज नाबालिगों के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामलों में भी आरोपियों को मौत की सजा सुनाई गई।
यहां अदालतों में ऑनर किलिंग के 2 केसों में भी आरोपियों को मौत की सजा सुनाई गई। इनमें से एक केस में खेड़ा की एक अदालत ने फैसला दिया था। तब एक आरोपी को मौत की सजा सुनाई थी, उस पर एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म करने का आरोप था, हालांकि उसने लड़की की हत्या नहीं की थी। दूसरा केस भी गुजरात से था।

2011 में 11 दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई थी
आंकड़े जाहिर करते हैं कि, सूबे में वर्ष 2011 में अलग-अलग मामलों में 13 दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई थी, जबकि साल 2006 से लेकर 2021 के बीच इस संख्या में चार से अधिक वृद्धि नहीं हुई थी। वहीं, साल 2010, 2014, 2015 और 2017 में निचली अदालतों के द्वारा किसी भी अभियुक्त को मौत की सजा नहीं सुनाई गई। हां, वर्ष 2002 के गोधरा ट्रेन नरसंहार मामले में 13 में से 11 दोषियों को 2011 में मौत की सजा सुनाई गई थी।












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