• search
गुजरात न्यूज़ के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  

पिता का अंतिम संस्कार करने के 2 हफ्ते बाद बेटे को मिला मैसेज- उन्हें दूसरे अस्पताल भेजा गया है

|

अहमदाबाद। कोरोना-महामारी की दहशत के बीच पीड़ितों के परिजनों को अस्पताल के कर्मियों की लापरवाही से भी जूझना पड़ रहा है। यहां एक 30 वर्षीय ट्यूशन शिक्षक सागर शाह अपने पिता का अंतिम संस्कार करने के 2 हफ्ते बाद उस वक्त शॉक्ड रह गए, जब उन्हें अस्पताल से यह ​एसएमएस मिला कि, आपके पिता को दूसरे अस्पताल अस्पताल पहुंचाया गया है। यानी वो जीवित हैं।'

पहले 16 मई को बताया कि मौत हो गई, फिर कहा दूसरे अस्पताल में हैं

पहले 16 मई को बताया कि मौत हो गई, फिर कहा दूसरे अस्पताल में हैं

सागर शाह ने बताया कि, 'अंत्येष्टि क्रिया के बाद हम अपने घर पर पिता की मृत्यु का शोक मना रहे थे और तभी मोबाइल पर पिता के बारे में मैसेज आए- "किशोरभाई हीरालाल शाह को 30 मई को शाम 6:38 बजे अहमदाबाद के असरवा स्थित कोविड हॉस्पिटल ट्रांसफर कर दिया गया है।" जबकि इससे कई रोज पहले हमें बताया गया था कि 16 मई को किशोरभाई की मृत्यु हो गई है।'

'मुश्किल से मिली थी लाश, अब ये मैसेज पढ़ा तो हैरान हू'

'मुश्किल से मिली थी लाश, अब ये मैसेज पढ़ा तो हैरान हू'

''अस्पताल से आए मैसेज पढ़कर मैं हैरान रह गया और मुझे ठेस भी पहुंची। मुझे एहसास हुआ कि यह अस्पतालों की ओर से सरासर लापरवाही का एक और उदाहरण है। मैंने खुद 16 मई को अपने पिता का अंतिम संस्कार किया था।" यह कहकर सागर ने नाराजगी जताई और सिविल अस्पताल से अपने 64 वर्षीय पिता की लाश का दावा करने के लिए किए अपने संघर्ष को याद किया। कहा कि, पिता द्वारा पहन रखे जेवरों के लिए एफआईआर दर्ज कराने हमें पुलिस स्टेशन के चक्कर लगाने पड़े थे और साथ-साथ वॉलेट से 10,000 रुपये की नकदी भी चुरा ली गई थी।''

'समझ नहीं आ रहा कि अस्पताल ने ऐसा क्यों किया'

'समझ नहीं आ रहा कि अस्पताल ने ऐसा क्यों किया'

सागर ने कहा कि, "हमें अस्पताल से पिता के मरने की सूचना मिली थी तो कांग्रेस विधायक इमरान खेडावाला के हस्तक्षेप के बाद कई घंटों के बाद हमें लाश सौंपी गई थी। 16 मई के बाद अब 30 मई को हमें ये सूचना दी गई है कि, हमारे पिता मरे नहीं हैं और उन्हें सिविल हॉस्पिटल से दूसरे अस्पताल पहुंचा दिया गया है। हम बहुत परेशान हो गए, कि भला कि आमजन के साथ "घोर लापरवाही" क्यों हो रही है। इससे पहले भी एक माामले से दो-चार हो चुके हैं, जब कुछ रिश्तेदारों को सिविल अस्पताल से संबद्ध गुजरात कैंसर एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (जीसीआरआई) में भर्ती कराया गया था, जो कि, वही अस्पताल है, जिसे गुजरात उच्च न्यायालय ने पिछले सप्ताह "कालकोठरी" करार दिया था।

अस्पताल ने दिया जवाब— सर्वर डाउन हो गया था'

अस्पताल ने दिया जवाब— सर्वर डाउन हो गया था'

बकौल सागर, "हमने अस्पताल से लापरवाही के कारण जानने चाहे तो कोविड हॉस्पिटल के रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर डॉ संजय कपाड़िया ने जवाब दिया कि "समान नाम वाले दो मरीज़ थे, जिन्होंने भ्रम पैदा किया और सर्वर डाउन हो जाने के बाद डेटा प्रविष्टि में त्रुटि हुई थी, जिसे ठीक कर लिया गया है।"

पहले भी हुई थी ऐसी घटना

पहले भी हुई थी ऐसी घटना

हाल ही अहमदाबाद में इसी तरह की एक और घटना सामने आई थी जब निकोले के निवासी नीलेश निकटे को फोन आया था कि उनके ससुर देवराम भीसीकर की कोविद रिपोर्ट नकारात्मक आई है और उन्हें एक गैर-कोविद वार्ड में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। निलेश को भी झटका लगा, क्योंकि देवराम का 29 मई की दोपहर को निधन हो गया था और निलेश ने खुद ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया था।

ससुर का अंतिम संस्कार कर घिर गए थे दामाद

ससुर का अंतिम संस्कार कर घिर गए थे दामाद

अस्पताल से ससुर के जीवित होने की सूचना मिलने पर नीलेश ने कहा, "एक पल के लिए मैं बहुत परेशान हो गया था। फिर सोचा कि, मैंने किसी और का अंतिम संस्कार किया होगा। लेकिन बाद की पूछताछ में पता चला कि अस्पताल एडमिनिस्ट्रेशन ने अपनी रिपोर्ट को अपडेट नहीं किया है। तब मैंने मीडिया से संपर्क किया और आपबीती सुनाई। क्योंकि मेरे समुदाय के सदस्यों ने मेरी पत्नी के परिवार के मामले को गलत तरीके से पेश करने के लिए मुझ पर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे।"

सरकार ने इसे लापरवाही मानने से इनकार किया

सरकार ने इसे लापरवाही मानने से इनकार किया

ऐसे मामले पर, राज्य सरकार ने बाद में एक विज्ञप्ति जारी की। जिसमें कहा गया कि कॉल सेंटर के व्यक्ति ने परिवार के सदस्यों को गलत सूचना दी कि देवराम का पहले ही निधन हो चुका है। सरकार ने इस बात से इनकार किया कि इस घटना के पीछे "लापरवाही" थी।

गुजरात का अब एक और भाजपा विधायक कोरोना की चपेट में, गरीबों को बांटे थे मास्क-खाना

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Gujarat man's father rises from the dead, when he receive SMS from hospital
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more