मछुआरों के कल्याण के लिए समर्पित गुजरात सरकार, संवर रहा जीवन, मजबूत हो रही अर्थव्यवस्था
गांधीनगर: गुजरात सरकार आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के कल्याण के लिए कई योजनाएं लागू कर रही है। सागर खेड़ू सर्वांगी विकास योजना उन्हीं कल्याणकारी योजनाओं में से एक है। यह योजना राज्य के दक्षिण और सौराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों में रहने वाले मछुआरों और समुद्री व्यवसाय से जुड़े हजारों परिवारों के लिए वरदान साबित हुई है। सागर खेड़ू सर्वांगी विकास योजना तटीय क्षेत्र में रहने वाले परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार और उस क्षेत्र के समग्र विकास को ध्यान में रखकर ही शुरू की गई थी। राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2007 में इस योजना की शुरुआत की थी। यह योजना राज्य के 13 जिलों के 38 तालुकों में चल रही है। इसके तहत मत्स्य पालन और समुद्री व्यवसाय से जुड़े लोगों के आर्थिक कल्याण और उत्थान के लिए कई उप-परियोजनाओं को भी शामिल किया गया है।

नीली अर्थव्यवस्था के विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध
राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की ओर से हाल ही में पेश किए गए बजट में इन 13 जिलों के तटीय क्षेत्र के समग्र विकास के लिए 260 करोड़ रुपए की राशि निर्धारित की गई है। राज्य सरकार की ओर से नीली अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और इससे जुड़े व्यवसायों में शामिल लोगों को आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए कई वित्तीय राहत और सब्सिडी प्रदान की जा रही है। मछली पकड़ने के व्यवसाय में शामिल लोगों को प्रशिक्षण देने और उन्हें कारोबार शुरू करने के लिए नाव, जाल और मछली पालन की तमाम सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए राज्य सरकार की ओर से सहायता दी जा रही है।
भावनगर के राजेश सोलंकी ने कहा-
हम पारंपरिक मछली पकड़ने के व्यवसाय में शामिल हैं, अब हम प्रौद्योगिकी का उपयोग करके मछली पकड़ने का व्यवसाय कर रहे हैं, क्योंकि हमें सरकार द्वारा इलेक्ट्रिक नावों और मछली पकड़ने के व्यवसाय में विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षित किया जा रहा है। वित्तीय बाधाएं दूर हो गई हैं और हम सिस्टम की मदद से व्यापार कर सकते हैं
मांगरोल में मत्स्य बंदरगाह तैयार
सागर खेड़ू सर्वांगी विकास योजना के तहत गुजरात सरकार द्वारा समुद्री व्यापार को बढ़ावा देने के लिए मांगरोल में 143 करोड़ रुपए की लागत से एक मत्स्य बंदरगाह तैयार किया गया है। इससे मछुआरों को आसानी से अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध हो गया है। इस तरह मत्स्य पालन से जुड़े मछुआरों और निर्यातकों को आर्थिक लाभ हो रहा है और अन्य उद्यमियों को भी प्रोत्साहन मिला है।
मछुआरों के परिवारों का भी सरकार रखती है ख्याल
सागर खेड़ू सर्वांगी विकास योजना मछुआरों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाकर आजीविका के वैकल्पिक साधन उपलब्ध कराने की दिशा में बहुत ही कारगर साबित हुई है। समुद्री मछली पकड़ने के दौरान अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने के कारण पाकिस्तानी जेलों में बंधक बनाए गए या मारे गए मछुआरों के परिवारों को भी राज्य सरकार की ओर से 4 लाख रुपए की सहायता दी जाती है। इससे उनके परिवार को आर्थिक मदद मिलती है।
सौराष्ट्र के तटीय शहर ऊना निवासी हरेशभाई राठौड़ ने कहा-
समुद्री नमक की मात्रा बढ़ रही है, जिससे कृषि भूमि भी प्रभावित हो रही है, जिसे रोकने के लिए सागर खेड़ू योजना के माध्यम से समुद्री क्षेत्र में नमक के प्रसार को नियंत्रित किया जा सकता है
राज्य की समुद्री पट्टी के विकास के लिए राज्य सरकार ने शुरुआत में 15 हजार करोड़ रुपए की इस योजना को लागू किया था। जिससे तटीय क्षेत्र के हजारों परिवार लाभांवित हुए हैं। इस योजना के कारण कई परिवारों के जीवन स्तर में सुधार हुआ है और क्षेत्री के बुनियादी ढांचे का विकास हुआ है। (तस्वीर-सांकेतिक)












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