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Gujarat Election 2022: आदिवासी सीटों पर बीजेपी क्यों दिख रही है मजबूत ? जानिए

गुजरात विधानसभा चुनाव में इस बार यूं तो राज्य की बाकी सीटों की तरह ही आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटों पर भी त्रिकोणीय मुकाबला नजर आ रहा है। आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस का आधार छीनने के लिए कम जतन नहीं किए हैं। लेकिन, जमीनी स्तर पर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी इस समय कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की तुलना में ज्यादा मजबूत नजर आ रही है। गुजरात विधानसभा की 182 सीटों में से अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के लिए 27 सीटें आरक्षित हैं। इस समय इनमें से 13 सीटे फिलहाल भाजपा के कब्जे में हैं। उसका संगठन कांग्रेस और अरविंद केजरीवाल की नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी के मुकाबले ज्यादा मजबूत है और दोनों ही विपक्षी दल इसकी तुलना में फिलहाल जमीन पर कमजोर नजर आ रहे हैं।

आदिवासी सीटों पर फिलहाल भाजपा मजबूत

आदिवासी सीटों पर फिलहाल भाजपा मजबूत

2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस आदिवासी सीटों पर बीजेपी से ज्यादा मजबूत थी। उसे यहां 17 सीटें मिली थीं। इनमें से 5 कांग्रेसी विधायक अब भाजपा में आ चुके हैं। सबसे अंत में 10 बार के एमएलए मोहन सिंह रथावा आए हैं, जो छोटा उदयपुर के सीटिंग विधायक हैं। बीजेपी ने इस बार इसी सीट पर उनके बेटे राजेंद्रसिंह रथावा को टिकट दिया है। इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक गुजरात में आदिवासी मतदाताओं की संख्या करीब 14% है। यहां के ज्यादातर स्थानीय निकायों पर भारतीय जनता पार्टी की कब्जा है।

गुजरात चुनावों आदिवासियों के मुद्दे

गुजरात चुनावों आदिवासियों के मुद्दे

2017 में भाजपा ने आदिवासियों के लिए आरक्षित 27 सीटों में से सिर्फ 8 पर जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में कांग्रेस का भारतीय ट्राइबल पार्टी (BTP) से गठबंधन था, जिसने दो सीटें जीती थीं। इन 27 सीटों में से 14 दक्षिण गुजरात में हैं, जिनमें से बीजेपी के पास 8 हैं। मध्य गुजरात में 10 सीटें हैं और भाजपा के पास उनमें से 5 हैं। उत्तर गुजरात में तीन सीटें हैं, जिनमें से कांग्रेस की दो सीटें खाली हैं और एक अभी भी उसके कब्जे में है। हर बार की तरह इस बार भी आदिवासियों के मुद्दों की बात करें तो बेरोजगारी, स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा, जाति प्रमाण पत्र और पंचायत ऐक्ट (Panchayat Extension to the Scheduled Areas Act) या PESA ऐक्ट लागू करना है।

आदिवासी क्षेत्रों में कैसे कमजोर हुई कांग्रेस ?

आदिवासी क्षेत्रों में कैसे कमजोर हुई कांग्रेस ?

गुजरात में आदिवासियों की आबादी मुख्यतौर पर 14 जिलों में फैली हुई है। उत्तर में अंबाजी से लेकर दक्षिण उमरगांव तक। ये आदिवासी बहुल जिले राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की सीमाओं से सटे हुए हैं। करीब चार दशकों तक गुजरात में आदिवासी मुख्य रूप से कांग्रेस के साथ जुड़े देखे गए हैं। 1980 के दशक में पार्टी ने क्षत्रीय, हरिजन, आदिवासी और मुस्लिमों का एक KHAM गठबंधन बनाने की कोशिश की थी, जिनकी जनसंख्या प्रदेश की आबादी के 50% से अधिक है। लेकिन, पार्टी का वह तिलिस्म अब टूट चुका है।

आदिवासियों के लिए भाजपा के पास मुद्दे क्या हैं ?

आदिवासियों के लिए भाजपा के पास मुद्दे क्या हैं ?

सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी 2018 में नर्मदा जिले में बनी विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को 'आदिवासियों के विकास का मॉडल' और रोजगार बढ़ाने वाले कदम के तौर पर पेश कर रही है। जबकि, विपक्षी पार्टियां इस मूर्ति के लिए हुए जमीन अधिग्रहण और पेसा कानून को नहीं लागू करने को मुद्दा बना रही हैं। पेसा कानून के तहत मूल जमीन मालिकों को उनकी जमीन पर पूर्ण अधिकार दिया जाना है।

पीएम मोदी का भी 'खास कनेक्ट' है

पीएम मोदी का भी 'खास कनेक्ट' है

आदिवासी वोट बैंक पर नजर रखककर ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 नवंबर को वलसाड जिले के करवाडा से चुनाव अभियान की शुरुआत की है। यहां पर उन्होंने कहा था कि उनके लिए 'अ' का मतलब आदिवासी है। कुछ ही दिन पहले पीएम मोदी राजस्थान में मानगढ़ भी पहुंचे, जहां उन्होंने 1913 में अंग्रेजों के हाथों मारे गए आदिवासियों को श्रद्धांजलि दी। द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्रपति बनना भी भाजपा के हक में जाता दिख रहा है और पीएम मोदी पिछले कुछ समय से आदिवासी बहुल क्षेत्रों की यात्रा पर लगातार पहुंचे हैं, जिनमें दाहोद, तापी, पंचमहाल और जम्बुघोड़ा शामिल हैं।

भाजपा को आदिवासी सीटों पर जीत का भरोसा क्यों है ?

भाजपा को आदिवासी सीटों पर जीत का भरोसा क्यों है ?

तथ्य यह भी है कि आदिवासी-बहुल जिलों के सभी तालुका और जिला पंचायतों पर इस समय बीजेपी का कब्जा है। भरूच के बीजेपी सांसद और दक्षिण गुजरात में एसटी सीटों के पार्टी प्रभारी मनसुख वसावा ने अंग्रेजी अखबार के सामने यह माना है कि पेसा कानून जैसे मुद्दों पर आदिवासी पार्टी से थोड़े नाराज हैं, लेकिन उनकी संख्या कम है। उन्होंने ऐसे लोगों के पास पहुंचने की बात करते हुए कहा कि 'मुख्य बात ये है कि इन सीटों पर हम इतने मजबूत हैं, जैसे पहले कभी नहीं रहे। सरपंचों से लेकर तालुका पंचायत और जिला पंचायत में बीजेपी सभी सीटें जीत चुकी है और इसका हमारे विधानसभा सीटों के परिणामों पर सीधा असर पड़ेगा। हमें पक्का भरोसा है।'

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