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Dingucha: गुजरात का वो गांव, जहां का 1 परिवार अम‍ेरिका बसने का सपना पाले बर्फ में हमेशा के लिए जम गया

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डिंगुचा (गुजरात): गुजरात के गांधीनगर जिले का एक गांव डिंगुचा इन दिनों दुनियाभर में चर्चा का विषय बना हुआ है, ऐसा इसलिए क्योंकि यहां के रहने वाले एक परिवार की लाशें हजारों किलोमीटर दूर अमेरिका-कनाडा बॉर्डर एरिया में मिली हैं। अमेरिका-कनाडा के उत्तरी भागों में भयंकर सर्दी पड़ रही है और वहां टेंपरेचर माइनस 35 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे गिर गया है। अमेरिकन अधिकारियों का कहना है कि, उक्‍त परिवार के दंपति और उनके 2 बच्चे अवैध रूप से कनाडा-अमेरिका बाॅर्डर पार करने का प्रयास करते समय मौत के मुंह में गिरे। दंपति का सपना था कि वे अमेरिका में बसेंगे। और, इसके लिए उन्‍होंने न बर्फीली मुसीबत की परवाह की, न ही अमेरिकन वीजा-नियमों की।

अमेरिका-कनाडा बॉर्डर एरिया में बर्फ में जमी मिलीं 4 लाशें

अमेरिका-कनाडा बॉर्डर एरिया में बर्फ में जमी मिलीं 4 लाशें

अमेरिका-कनाडा बॉर्डर एरिया में मृत मिले परिवार की पहचान गुजरात के गांधीनगर जिला निवासी पटेल परिवार के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि, कलोल तहसील के डीगुंचा गांव से ताल्‍लुक रखने वाले परिवार के जगदीश बलदेवभाई पटेल (35), उनकी पत्नी वैशालीबेन (33), बेटी विहंगा (गोपी) (12) और 3 साल के बेटे धार्मिक को लेकर 12-13 दिन पहले कनाडा गए थे। उन्‍हें दुबे-चुपके अमेरिका पहुंचना था, इसी दौरान भीषण ठंड की चपेट में आकर यह परिवार हादसे का शिकार हो गया।
उक्‍त पटेल परिवार की जान चले जाने की खबर से गांव के लोग गमगीन हैं और वे उनके बारे में बाते कर रहे हैं।

गुजरात के इस गांव से गया था परिवार

गुजरात के इस गांव से गया था परिवार

स्थानीय निवासियों के मुताबिक, डिंगुचा गुजरात का ऐसा गांव है, जहां से बड़ी संख्या में लोग विदेशों में बसे हुए हैं, मुख्य रूप से अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में और उन्होंने गांव में पंचायत भवन, स्कूल, मंदिर, स्वास्थ्य केंद्र और कम्‍युनिटी हॉल बनवाने के लिए उदारतापूर्वक धन दान किया है। उन्‍होंने कहा कि, गुजरात के इस गांव के निवासियों को बेहतर भविष्य के लिए अमेरिका और अन्य विकसित देशों में प्रवास करने के सपने आते रहते हैं, और उसे हकीकत में बदलने की यह इच्छा उनमें इतनी प्रबल है कि उनमें से कुछ अवैध रास्‍ते के जरिए अपने जीवन को खतरे में डालने से भी गुरेज नहीं करते हैं।

यहां के ज्‍यादातर लोगों का सपना विदेश बसने का

यहां के ज्‍यादातर लोगों का सपना विदेश बसने का

अच्‍छी नौकरी के अवसरों की कमी के रहते और अपने 'अम‍ेरिका ड्रीम' को पूरा करने के लिए वे विभिन्‍न तरीकों से अमेरिका में दाखिल होने पर आमादा हो जाते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि, जिस परिवार के अमेरिका-कनाडा बॉर्डर इलाके में मारे जाने की खबर है, उससे पहले कई और लोग बेहतर अवसरों की तलाश में विदेश जा चुके थे, सच कहें तो यहां के लोग हमेशा ऐसे अवसर की तलाश में रहते हैं। लिहाजा डिंगुचा में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है, यह कोई गांव ही न हो।

लगे हुए हैं कनाडा-अमेरिका की अंग्रेजी सिखाने के पोस्‍टर

लगे हुए हैं कनाडा-अमेरिका की अंग्रेजी सिखाने के पोस्‍टर

डिंगुचा के पंचायत भवन में एक दीवार पर पेंटिंग का एड यूके-कनाडा आदि के विश्वविद्यालय में प्रवेश दिलाने हेतु अंग्रेजी सिखाने का वादा करता है। यह गांव अहमदाबाद से लगभग 40 किमी दूर स्थित है। इस गाँव में "कनाडा और अमेरिका में स्‍टडी" कराने के कुछ अन्य होर्डिंग्स गाँव के उन युवाओं को लक्षित करते हैं जो हमेशा बेहतर अवसरों की तलाश में विदेश जाने का सपना देखते हैं।

अब तक बहुत से लोग अमेरिका जाकर बस चुके

अब तक बहुत से लोग अमेरिका जाकर बस चुके

अमृत पटेल नामक शख्‍स, जो अपने परिवार को वहां ले जाने से पहले 33 साल पहले खुद अमेरिका चले गए थे, ने कहा, यहां अवसरों की कमी ही लोगों को विदेश जाने के लिए प्रेरित कर रही है। उन्‍होंने कहा कि, "सिर्फ डिंगुचा ही नहीं, मैं पूरे गुजरात के बारे में बात करूंगा। लोगों को उनकी शिक्षा के अनुरूप वेतन नहीं मिल रहा है, इसलिए वे सोचते हैं, क्यों न विदेश जाकर अधिक कमाएं?" पटेल ने कहा, हम खुद अपने बेटे के साथ अमेरिका में बाल्टीमोर के पास एक रेस्तरां खोले हैं। वहीं तीन बेटियों की शादी भी हो चुकी है।'

जो 4 लोगों की लाशें मिलीं, वे आखिर हैं किसकी

जो 4 लोगों की लाशें मिलीं, वे आखिर हैं किसकी

गांव में बतियाते दिखे कुछ लोग कह रहे थे कि, अभी हालांकि ये पुष्टि नहीं हुई कि जो हमारे से यहां से गए थे वे ही मरे हैं। मगर जैसा कि अमेरिका से आई खबर के अनुसार, एक विवाहित जोड़ा और उनके दो बच्चे, जो हाल ही में एक ट्रैवल वीजा पर कनाडा गए थे, लापता हो गए हैं। ग्रामीणों को लगता है कि वे वही परिवार हो सकते हैं, जो कनाडा के रास्ते अमेरिका में अवैध रूप से प्रवेश करने की कोशिश करते हुए मौत के मुंह में चले गए, खासकर, तब जबकि उनकी पहचान के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

कानूनन हर कोई वहां नहीं जा सकता, इसलिए दुबे छुपके जाते हैं

कानूनन हर कोई वहां नहीं जा सकता, इसलिए दुबे छुपके जाते हैं

अमृत पटेल ने कहा, हम हर साल कुछ महीनों के लिए अपने पैतृक गांव आते हैं। हमने यह देखा है कि लोग अमेरिका या कनाडा में अवसरों की तलाश कर रहे हैं, क्योंकि यहां अवसर की कमी है... चूंकि हर कोई कानूनी रूप से विदेश नहीं जा सकता है, इसलिए वे अवैध रूप से प्रवेश करने के तरीकों की तलाश कर रहे हैं - कुछ ऐसा जो दुर्भाग्यपूर्ण जोड़े (जो मृत पाए गए) अपने बच्चों के साथ कर रहे थे।,"
पटेल ने कहा कि अमेरिका या कनाडा में अवैध रूप से प्रवास करने के लिए, सभी को एनआरआई समुदाय के बीच अच्‍छे लिंक की जरूरत पड़ती है। जिनके संबंध अच्‍छे होंगे, वे वहां बसने में सफल हो जाते हैं।

संपन्‍न नहीं, गैर-संपन्‍न परिवार ज्‍यादा बाहर जाते हैं

संपन्‍न नहीं, गैर-संपन्‍न परिवार ज्‍यादा बाहर जाते हैं

पटेल ने कहा, "आपको विदेश जाने के लिए संपन्न होने की आवश्यकता नहीं है। वास्तव में, संपन्न लोगों को अवसरों की तलाश में विदेश जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, वह भी इतना जोखिम उठाकर। आपको विदेश जाना है और यदि आप आर्थिक रूप से कमजोर हैं, तो वहां रहने वाले कोई रिश्तेदार या दोस्त पैसे से मदद करेंगे। वे आपकी यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए लाखों रुपये की मदद कर सकते हैं।,"

ट्रैवल वीजा पर कनाडा गई थी एक फैमिली

ट्रैवल वीजा पर कनाडा गई थी एक फैमिली

पिछले हफ्ते जब से अमेरिका-कनाडा सीमा पर एक परिवार के 4 सदस्यों की लाशें मिलने की खबर यहां पहुंची है, तब से गांव में पूर्वाभास हो गया है। गांव तलाठी के जयेश चौधरी (राजस्व अधिकारी) ने कहा कि.. ऐसा कहा जा रहा है कि जगदीश पटेल, उनकी पत्नी और उनके दो बच्चे, जो लापता हैं, वे बहुत कम भूखंड वाले किसानों के औसत मध्यम वर्गीय परिवार से हैं, और वे हाल ही में कनाडा के लिए ट्रैवल वीजा पर रवाना हुए थे।'

इसी गांव में रहते थे दंपति के घरवाले

इसी गांव में रहते थे दंपति के घरवाले

चौधरी ने कहा, "यह सच है कि जगदीश पटेल डिंगुचा के मूल निवासी हैं, और उनके माता-पिता इसी गाँव में रहते थे, जबकि वह पास के शहर कलोल में रहते थे। तकरीबन दो साल पहले, कोरोना महामारी के दौरान, वह अपने परिवार के साथ गाँव में शिफ्ट हो गए थे। और, तीन से चार महीनों पहले, वह परिवार फिर से कलोल के लिए रवाना हुआ।," चौधरी ने आगे कहा, "वह दिवाली के त्योहार के दौरान कलोल में थोड़े समय के लिए कपड़े बेचते थे।"

रिश्तेदारों को सुखद खबर का इंतजार

रिश्तेदारों को सुखद खबर का इंतजार

उनके रिश्तेदारों के अनुसार, पटेल खेती-किसानी में अपने पिता का साथ दिया करते थे और यहां तक कि एक स्कूल में भी कुछ समय के लिए काम किया। हालांकि, रिश्तेदारों का कहना है कि चूंकि अमेरिका-कनाडा बॉर्डर एरिया में मारे गए दंपति और उनके दो बच्चों की पहचान की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, तो अभी हम सरकार से पुष्ट खबर मिलने का इंतजार कर रहे हैं। हमें खबरों से बस इतना पता चला है कि, वहां कनाडा के रास्ते अमेरिका में अवैध रूप से प्रवेश करने की कोशिश करते हुए एक परिवार जान गंवा बैठा।

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आधिकारिक सूचना मिले तो हो यकीन

आधिकारिक सूचना मिले तो हो यकीन

अधिकारियों से एक आधिकारिक सूचना मिले तो यह बात कन्‍फर्म होगी कि वे वही थे। अन्‍यथा अधिकारिक सूचना के अभाव में, न तो परिवार के सदस्य और न ही ग्रामीण जगदीश पटेल, उनकी पत्नी वैशाली और उनके दो बच्चों के मरने की संभावना को पूरी तरह से खारिज कर पाएंगे।

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English summary
know about Dingucha village Gandhinagar of gujarat, A Family That lost lives in Cold with The American Dream | US canada border news
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