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जापान से समुद्र के रास्ते भारत लाए जाएंगे बुलेट ट्रेन के सेट, अगवानी कर सूरत रचेगा इतिहास

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सूरत। मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलने वाली देश की पहली हाई स्पीड बुलेट ट्रेन (शिंकासेन ट्रेन) के सेट समुद्री मार्ग से होते हुए भारत लाए जाएंगे। जापान से आने वाले इस ट्रेन के पहले सेट की अगवानी सूरत करेगा, क्योंकि सबसे पहले यहीं पानी के रास्ते पहला सेट पहुंचेगा। सूरत में बुलेट ट्रेन का रोलिंग स्टॉक मेंटेनेंस डिपो बनाया जाएगा। फिर धीरे-धीरे डिब्बे और अन्य चीजें तैयार की जाएंगी। यह जानकारी नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) के एक अधिकारी की तरफ से आई है। मालूम हो कि, एनएचएसआरसी ने बीते 23 सितंबर को मुंबई-अहमदाबाद के 508 किमी के हाई स्पीड रेल प्रोजेक्ट के सबसे बड़े 47% हिस्से के वापी-बिलिमोरा-सूरत और वडोदरा के बीच 237 किमी कॉरिडोर बनाने की तकनीकी बिड जारी की थी।

कब तक पूरा होगा प्रोजेक्ट, यह पक्का नहीं

कब तक पूरा होगा प्रोजेक्ट, यह पक्का नहीं

भारत में पहली बुलेट ट्रेन के प्रोजेक्ट को वर्ष 2023 तक पूरा करना लक्ष्य रखा गया था। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन के एमडी ने पिछले साल ही इस बारे में स्पष्ट कहा था कि, प्रोजेक्ट 2023 तक पूरा हो जाएगा। जबकि, रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वी.के. यादव ने माना कि इस प्रोजेक्ट के लिए अभी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया ही पूरी नहीं हो सकी है।उन्होंने यह स्वीकार किया था कि 1396 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होना बाकी है। सितंबर 2020 में एक अधिकारी ने कहा कि, गुजरात और महाराष्ट्र दोनों प्रदेशों में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए अब तक कुल 63.4% जमीन ही अधिग्रहीत की जा सकी है। यहां जिस तरीके से जमीन अधिग्रहण में विलंब हो रहा है, उससे ऐसा लगता है कि बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के कंप्लीट होने में 5 वर्ष और लग जाएंगे। गुजरात प्रदेश की बात करें तो यहां अब तक करीब 82 फीसदी जबकि, महाराष्ट्र में करीब 23 फीसदी भूमि अधिग्रहण हुआ है। अधिग्रहण में बड़ी बाधा यह है कि काफी किसान अभी अपनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं हैं। हालांकि, नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन (NHRCL) के अधिकारियों का मानना है कि, भूमि अधिग्रहण समय से पूरा हो जाएगा।

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किस जिले से कितनी भूमि अधिग्रहित की जानी है?

किस जिले से कितनी भूमि अधिग्रहित की जानी है?

गुजरात के राजस्व मंत्री नितिन पटेल के अनुसार, विगत 3 वर्षों में बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए, राज्य के 8 जिलों में 74,62,493 वर्ग मीटर भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया चली। जिसके तहत आणंद में 47,7672 वर्ग मीटर, खेड़ा में 1093987 वर्ग मीटर, वडोदरा में 951783 वर्ग मीटर, भरूच में1283814 वर्ग मीटर, सूरत में 1411997 वर्ग मीटर, नवसारी में 862088 वर्ग मीटर और वलसाड में 109,389 वर्ग मीटर जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। यानी गुजरात में कुल 746 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित करने की प्रक्रिया चल रही है। 2019 में एक रिपोर्ट में यह बताया गया था कि, कुल 1396 हेक्टेयर में से अब तक 885 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण हो चुका है, जो करीब 63.4% तक है। उधर, एक जानकारी यह भी मिली कि एमएमआरसी-एमसीजीएम से ज्यादा नेशनल हाईस्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) पेड़ कटवा रहा है।

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प्रोजेक्ट से 25,000 लोगों को रोजगार का दावा

प्रोजेक्ट से 25,000 लोगों को रोजगार का दावा

एनएचआरसीएल के मैनेजिंग डायरेक्टर अचल खरे ने पिछले साल बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में आ रही अड़चनों का जिक्र किया था। जिसमें खरे ने यह भी बताया था कि बुलेट ​कब तक रूट पर दौड़ सकती है। उन्होंने कहा था कि देश की पहली हाईस्पीड ट्रेन 2023 के अंत तक दौड़ सकती है। इस हाई स्पीड रेल की रफ्तार 320 किमी प्रति घंटा होगी। इसमें सफर करने के लिए करीब 3000 रुपये चुकाने होंगे। महज 2:07 घंटे में इसके जरिए 508 किमी की दूरी तय की जा सकेगी। लोगों को रोजगार मुहैया कराने का वादा करते हुए खरे ने यह भी कहा कि बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत 25,000 लोगों को रोजगार दिया जाएगा।

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English summary
Bullet train sets will be brought from japan to India by sea route, Surat will be the first destination
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