क्या गुजरात में भाजपा को फंसाने के लिए केजरीवाल ने चला नोटों पर लक्ष्मी-गणेश का दांव
Arvind Kejriwal Gujarat: गुजरात में विधानसभा चुनावों के ऐलान से पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भारतीय जनता पार्टी के हिंदुत्व कार्ड से ही उसे उलझाने की कोशिश की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भारतीय करेंसी पर गांधी जी के साथ लक्ष्मी-गणेश की तस्वीरें छापने की भी अपील की है। आम आदमी पार्टी सुप्रीमो को पता है कि उनकी मांग पर अमल करना या सीधे तौर पर खारिज कर देना, दोनों ही केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी सरकार के लिए आसान विकल्प नहीं होगा। लेकिन, सवाल है कि गुजरात चुनाव में कांग्रेस के जनाधार में सेंध लगाने की कोशिशों में जुटी आम आदमी पार्टी को इससे कितना फायदा मिलेगा ?

गुजरात में चुनाव के ऐलान से पहले केजरीवाल की बड़ी मांग
27 अक्टूबर यानि गुरुवार से आम आदमी पार्टी गुजरात विधानसभा चुनावों के लिए अपना औपचारिक प्रचार अभियान शुरू कर रही है। पार्टी नेताओं के मुताबिक 28 अक्टूबर से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पंजाब के सीएम भगवंत मान भी तीन दिनों तक राज्य में रहेंगे और 6 सार्वजनिक सभाओं और रोड शो में हिस्सा लेंगे। पार्टी के बाकी नेता भी पूरे राज्य में जनसभाएं करने जा रहे हैं। लेकिन, चुनाव प्रचार की औपचारिक शुरुआत से पहले ही अरविंद केजरीवाल ने भारतीय करेंसी नोट पर लक्ष्मी-गणेश की तस्वीरें लगाने की मांग करके केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की उलझनें बढ़ाने की कोशिश की हैं।
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लक्ष्मी-गणेश की तस्वीर के जरिए बीजेपी को घेरने वाला दांव
दिल्ली के मुख्यमंत्री ने बुधवार को कहा, "एफर्ट तभी फलीभूत होते हैं, जब हमारे ऊपर देवी-देवताओं का आशीर्वाद होता है। हम सब अपनी-अपनी जिंदगी में एफर्ट्स करते हैं। लेकिन, कई बार देखते हैं कि एफर्ट्स कर रहे हैं, लेकिन नतीजे नहीं आ रहे। उस समय लगता है कि देवी-देवताओं का आशीर्वाद हो तो एफर्ट्स फलीभूत होने लगते है, उसके नतीजे आने लगते हैं।" आम आदमी पार्टी के नेता कहा, "आज मेरी केंद्र सरकार से, प्रधानमंत्री जी से अपील है- भारतीय करेंसी के ऊपर एक तरफ गांधी जी की तस्वीर है, वो वैसे ही रहनी चाहिए। लेकिन, दूसरी तरफ श्रीगणेश जी और श्रीलक्ष्मी जी की तस्वीर लगाई जाए।"

अर्थव्यवस्था की चुनौतियों से चुनावी लाभ लेने की कोशिश
इससे पहले केजरीवाल ने सवाल किया कि आजादी के 75 साल बाद भी हम कब तक विकासशील देश बने रहेंगे। उन्होंने देश की अर्थव्यस्था को लेकर भी मोदी सरकार को घेरने की कोशिश की। शायद केजरीवाल को लगता है कि गुजरात में करीब ढाई दशकों से सत्ता पर काबिज भाजपा को घेरना है तो पीएम मोदी के सामने खड़ी चुनौतियों का फायदा उठाया जा सकता है। भारतीय करेंसी पर लक्ष्मी-गणेश की तस्वीरों वाला दांव उनकी इसी रणनीति का हिस्सा लग रहा है। उन्होंने इंडोनेशिया का भी हवाला दिया है कि मुस्लिम देश होते हुए भी वह अपनी करेंसी पर गणेशजी की तस्वीरें लगाता है।

'बॉल बीजेपी के पाले में डाल दिया है'
केजरीवाल के इस चुनावी दांव को लेकर वनइंडिया ने गांधीनगर में मौजूद गुजरात कैडर के भारतीय वन सेवा के रिटायर्ड अधिकारी अरुण कुमार मिश्रा से खास बातचीत की है। उन्होंने कहा, "इसका कुल मिलाकर ज्यादा असर तो नहीं पड़ेगा...लेकिन यह मांग बीजेपी की लाइन के मुताबिक ही की गई है। बीजेपी हिंदू-हिंदू करती है। अब उन्होंने इसी मसले पर बॉल बीजेपी के पाले में डाल दिया है......लेकिन, केजरीवाल की पार्टी को इससे ज्यादा फायदा नहीं होने वाला है। उन्होंने सिर्फ बीजेपी को मुश्किल में डालने की कोशिश की है।" उन्होंने ये भी कहा कि "व्यक्तिगत रूप से कुछ वोटरों पर असर हो भी सकता है तो उसका अभी अनुमान नहीं लगाया जा सकता। इसका तात्कालिक कोई प्रभाव नहीं होगा।" गुजरात में केजरीवाल की पार्टी के बाकी प्रभाव के बारे में उनका कहना है, "ये सच है कि समाज के निचले तबके में आम आदमी पार्टी थोड़ा-बहुत असर जरूर डालती दिख रही है। इसके अलावा फ्री की सेवाओं की उम्मीद रखने वाले वोटरों पर भी उनकी पार्टी का असर पड़ सकता है।"

केजरीवाल की चुनावी गुगली का भाजपा कैसे करेगी सामना ?
2017 के गुजरात विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी से अच्छा मुकाबला किया था। राज्य की 182 सीटों में से बीजेपी 99 सीटें जीती थी और उसे कुल 49.05% वोट मिले थे। जबकि, कांग्रेस को 77 सीटें मिली थीं और वह 41.44% वोट ले पाई थी। इन दोनों दलों के अलावा किसी भी पार्टी ने कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ा था। लेकिन, आम आदमी पार्टी के मैदान में उतरने से पूरा चुनावी समीकरण बदल चुका है। वैसे तो निकाय चुनावों के नतीजे बताते हैं कि केजरीवाल की पार्टी कांग्रेस की राह ज्यादा मुश्किल कर रही है। लेकिन, गुजरात जैसे राज्य में बीजेपी के सामने जीत के अलावा कोई विकल्प नहीं है। क्योंकि, इससे सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिष्ठा और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का चुनावी कौशल जुड़ा हुआ है; और सबसे बड़ी बात की तैयारी 2024 की शुरू हो चुकी है। इसलिए, बीजेपी केजरीवाल की इस गुगली का सामना कैसे करती है, यह देखना होगा।












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