इकलौते बेटे को खोकर तनाव में जी रही थी मां, 50 साल की उम्र में ऐसे दिया बच्चे को जन्म
सूरत। यहां एक महिला के इकलौते बेटे ने 21 साल की उम्र में आत्महत्या कर ली थी। इसी कारण वह मानसिक तनाव में रहने लगी। वह 50 साल की हो गई, ऐसे में उसे और संतान होना मुश्किल था। बेटे की आत्महत्या की घटना के करीब 2 साल बाद महिला ने आईवीएफ टेक्नोलॉजी की मदद से एक बच्चे को जन्म दिया। उसके जिस बेटे ने आत्महत्या की थी, उसका नाम अभिजित सिंह था। उसने आईआईटी यूनिवर्सिटी रूड़की में 18 मार्च 2018 को सुसाइड कर लिया था।

21 साल के आईआईटी स्टूडेंट ने किया था सुसाइड
संवाददाता ने बताया कि, सूरत के अडाजल में रहने वाली भागीरथी बेन ने विगत 19 मार्च 2020 को 50 साल की आयु में बच्चे को जन्म दिया है। भागीरथी बेन का कहना है कि 2018 के मार्च महीने का वो दिन मेरी जिंदगी का काला दिन था, जब कंप्यूटर इंजीनियरिंग में तीसरे वर्ष की पढ़ाई करने वाले मेरे बेटे अभिजित सिंह ने आईआईटी यूनिवर्सिटी रूड़की में खुदकुशी कर ली। लेकिन भला हो विज्ञान का, जिसकी मदद से आज मेरी गोद में अभिजित ने एक बार फिर अपने होने का अहसास दिलाया है।'

इकलौते बेटे को खोने के 2 साल बाद हुआ एक और बच्चा
भागीरथी बेन आगे बोलीं- ''अभिजित की खुदकुशी के बाद हम तनाव में रहते थे। हमें रातों को नींद नहीं आती थी। अब मैं डॉ. पूजा नाडकर्णी की आभारी हूं, जिन्होंने मुझे यह सौभाग्य दिलाया। मुझे किसी ने आईवीएक टेक्नोलॉजी के बारे में बताया था तो मैंने पूजा नाडकर्णी से संपर्क किया था।' वहीं, गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. पूजा नाडकर्णी ने बताया कि नि:संतान दम्पति को तकनीक रूप से संतान देने की पद्धति को आईवीएफ कहा जाता है। भागीरथी की व्यथा को सुनकर मुझे दुख हुआ था। तब मैंने मदद की। आज उनके पास बच्चा है।'

इस गायनेकोलॉजिस्ट को दाद दे रही महिला
बकौल गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. पूजा नाडकर्णी, 'पति-पत्नी के क्रोमोजोम्स को हमने गर्भाशय में प्रविष्ट कराया था। कुछ सप्ताह बाद भागीरथी बेन के गर्भवती होने का पता चला और 9 महीनों बाद उन्होंने संतान को जन्म दिया। जिसके बाद वह मानसिक तनाव से बाहर आ गईं। साथ-साथ उनके परिवार में भी खुशी की किलकारियां गूंजने लगीं।












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