मजबूत दीवारें सीमाओं की रक्षा करती हैं, मजबूत इरादे मजबूत राष्ट्र का निर्माण करते हैं - अमृता चौरसिया

DDU University Gorakhpur Latest News: "मजबूत दीवारें सीमाओं की रक्षा करती हैं मजबूत इरादे मजबूत राष्ट्र का निर्माण करते हैं" - यह बात विशिष्ट अतिथि अमृता चौरसिया (सीनियर जर्नलिस्ट) ने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर के रक्षा एवं स्त्रातजिक अध्ययन विभाग तथा ICSSR के संयुक्त तत्वाधान में "राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा मजबूत भारत की नींव: सरदार वल्लभभाई पटेल का योगदान" विषय पर आधारित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र में कहा।उन्होंने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए भारत के पास सर्वाधिक युवा शक्ति है साथ ही उन्होंने कहा कि भारत की एकता और अखंडता इसके दो टूल्स है जो इसे मजबूत और सशक्त बनाते हैं तथा भारत से विविधता पूर्ण देश कहीं और नही है।

समापन सत्र के मुख्य अतिथि प्रकाशमणि त्रिपाठी ने कहा राष्ट्र की शक्ति एकता में निहित होती है तथा इन्होंने पटेल जी को याद करते हुए उन्हें राजनीतिक दूरदर्शी, नेतृत्वकर्ता कहा । उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता अखंडता की जब बात आती है तो पटेल जी का नाम प्रखर श्रेणी में लिया जाता है एवं राष्ट्र के लिए राष्ट्र रत्न पटेल का योगदान अग्रणी है उन्होंने पटेल जी को संकल्प के धनी व्यक्ति कहा।
उन्होंने सामरिक सुरक्षा की बात करते हुए कहा एक राष्ट्र सशक्त राष्ट्र तब बनता है जब समग्र रूप से सभी का योगदान होता है।

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इस संगोष्ठी के समापन सत्र में मुख्य वक्ता डॉ ओमप्रकाश सिंह ने स्वाधीनता के बाद भारत देश में राजनीतिक एकीकरण में सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक आदान-प्रदान की परंपरा सॉफ्ट पावर के रूप में तथा देश के भावनात्मक एकीकरण में मदद करेगा। उन्होंने अपने वक्तव्य में जे.पी. आंदोलन सत्याग्रह तथा संविधान निर्माण में सरदार पटेल जी की भूमिका तथा नागपुर में झंडा आंदोलन में सरदार पटेल जी की नेतृत्व की भूमिका को याद दिलाया।

इस संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, के पूर्व कुलपति प्रो.राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि विचार और कर्म दो ऐसे तत्व हैं जिनकी बदौलत व्यक्ति मन, वचन और कर्म से हमेशा याद किया जाता है एक वैसे ही प्रखर व्यक्तित्व सरदार पटेल जी का था। उन्होंने भौगोलिक सीमाओं की सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा भौगोलिक सीमाएं होती हैं जिस पर शांति, अशांति और विकास निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि जिस तरह देश का एकीकरण सरदार पटेल जी ने किया है उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में सदैव अंकित रहेगा।

संगोष्ठी के समापन सत्र में अतिथियों का स्वागत विभाग के अध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार सिंह द्वारा किया गया, जिन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि यह संगोष्ठी अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में काफी सफल रही है। इस संगोष्ठी की संयोजक सचिव डॉ. आरती यादव ने इस संगोष्ठी के आयोजन में योगदान के लिए सभी वर्गों शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं पड़ोसी देश नेपाल से आए विशेषज्ञों और प्रत्यक्ष एवम परोक्ष रूप से जुड़े सभी का आभार ज्ञापित किया। इस अवसर पर विभिन्न प्रदेशों से आए प्रतिभागीगण, विषय विशेषज्ञ विभाग के आचार्य प्रो सतीश चंद्र पांडेय, प्रो हर्ष कुमार सिन्हा, प्रो श्रीनिवास मणि त्रिपाठी, प्रो प्रदीप कुमार यादव, प्रो हरि सरन, डॉ प्रवीन कुमार सिंह, डॉ जितेंद्र कुमार, डॉ विजय कुमार, डॉ अभिषेक सिंह, एवं विश्वविद्यालय के अन्य विभागों के शिक्षकगण, विभिन्न महाविद्यालयों से आए शिक्षक गण, देश के अलग अलग प्रदेशों से आए प्रतिभागी व विभाग के शोध छात्र छात्राएं एवं परास्नातक व स्नातक के छात्र उपस्थित रहे।

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