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भरूच में 3 दलों के बीच जोर-आजमाइश, 17 उम्मीदवार ठोंक रहे हैं ताल, जानें किसका रहा गढ़

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lok sabha elections 2019 News, गांधीनगर। गुजरात की भरूच लोकसभा सीट पर इस बार कुल 17 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। यहां कांग्रेस, भाजपा और बीटीपी (भारतीय ट्राइबल पार्टी) के बीच त्रिपक्षीय मुकाबला होने जा रहा है, क्योंकि तीनों अपने-अपने स्तर पर जोर-शोर से दम झोंक रहे हैं। भाजपा ने यहां अपने पूर्व सांसद मनसुख वसावा को फिर से टिकट दिया है, तो कांग्रेस मुस्लिम उम्मीदावर शेरखान पठान को उतारा है। वहीं, तीसरे मोर्चे के तौर पर बीटीपी के मुखिया छोटू वसावा भी चुनाव लड़ रहे हैं।

भरूच में इस बार तीन दलों की जोर आजमाइश

भरूच में इस बार तीन दलों की जोर आजमाइश

कांग्रेस पहले यहां अपना कैंडिडेट नहीं उतारना चाहती थी, वह भाजपा के खिलाफ छोटू वसावा का समर्थन करने वाली थी। हालांकि, बाद में कांग्रेस के दिल्ली हाईकमान ने तय किया कि सूबे में सभी सीटों पर कांग्रेस के अपने प्रत्याशी होंगे। जिसके बाद कांग्रेस ने शेरखान पठान को लोकसभा उम्मीदवार बनाया। इधर, कांग्रेस से महत्व नहीं मिलने पर छोटू वसावा ने भी भरूच से अपना नामांकन भर दिया। ऐसे में इस सीट पर तीन दल चुनाव में आ उतरे। स्थानीय राजनीति के जानकार बताते हैं कि जो वोट कांग्रेस-बीटीपी की जोड़ी को मिलने वाले थे, अब वे इनके दो अलग-अलग प्रत्याशी खड़े होने की वजह से बिखर जाएंगे। ऐसे में भाजपा को फायदा पहुंचने की उम्मीद है।

पढ़ें: जिस सीट को 8 बार जीता, वहां अपना कैंडिडेट क्यों नहीं उतारना चाहती थी कांग्रेस? अहमद पटेल की वजह से आया छोटू वसावा का नाम?

भाजपा को फायदा होता यदि कांग्रेस-बीटीपी मिल जातीं?

भाजपा को फायदा होता यदि कांग्रेस-बीटीपी मिल जातीं?

मनसुख वसावा का इस क्षेत्र में आदिजाति समाज के बीच खास क्रेज है। उधर, बीटीपी के चीफ लीडर छोटू वसावा भी आदिजाति समाज के लिये काम करते हैं। वे झघडिया से अभी भी विधायक हैं। इस सीट से वह पिछले पांच चुनाव से जीतते आ रहे हैं। वोटरों की बात हो तो भरूच में 28 प्रतिशत मतदाता आदिवासी हैं। कुछ जानकारों का कहना है कि अगर भरूच में कांग्रेस ने छोटू वसावा का समर्थन किया होता, तो भाजपा के मनसुख वासवान की हार निश्चित थी, लेकिन कांग्रेस को लगा कि वह खुद का उम्मीदवार उतारकर ज्यादा फायदे में रहेगी, इसिलए कांग्रेस ने शेरखान को टिकट दे दिया।

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शुरूआत में कांग्रेस भरूच सीट से 8 बार जीती

शुरूआत में कांग्रेस भरूच सीट से 8 बार जीती

इतिहास पर नजर डालें तो भरूच सीट 9 कार्यकालों तक भाजपा का गढ़ रही है। यहां भाजपा के उम्मीदवार को हर चुनाव में फायदा हुआ, लेकिन इस बार छोटू वसावा के कारण इस सीट पर भाजपा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। वैसे, शुरूआती समय में भरूच सीट पर कांग्रेस का दबदबा था। तीन बार चंद्रशेखर भट्ट, दो बार मानसिंह राणा और तीन बार अहमद पटेल चुनाव जीत चुके थे। यानी कांग्रेस ने भरूच सीट पर कुल 8 बार लोकसभा चुनाव जीता।

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..और यूं भाजपा का गढ़ बन गई भरूच सीट

..और यूं भाजपा का गढ़ बन गई भरूच सीट

80 के दश में भाजपा के उदय के बाद से भरूच पर कांग्रेस की पकड़ कमजोर होती चली गई। 1989 से इस सीट से भाजपा के उम्मीदवार विजयी हो रहे हैं। यहां भाजपा के चंदूभाई देशमुख 5 बार लोकसभा का चुनाव जीते हैं। पिछले दो चुनावों में मनसुख वसावा को बदलने की बात हुई थी, लेकिन पार्टी ने उन्हें 2019 में भी उम्मीदवार बनाया है। भाजपा यहां कुल 9 बार जीत चुकी है।

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English summary
At this Gujarati seat, Tri-Competition As congress, BJP and BTP; know the history of Bharuch Lok Sabha
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