हेलमेट को लेकर गुजरात सरकार का यू-टर्न, हाईकोर्ट में बोली- लोगों को ये पहनना ही पड़ेगा
गांधीनगर. गुजरात सरकार ने यू-टर्न लेते हुए हाई कोर्ट में एक हलफनामा पेश किया है। हलफनामे में दावा किया गया है कि उसने कभी दोपहिया वाहन सवारों के लिए हेलमेट नहीं पहनने जैसी कोई अधिसूचना या आदेश जारी नहीं किए। सरकार ने कहा कि, हेलमेट पहनना अनिवार्य ही रहेगा। इससे पहले सरकारी वकील ने मौखिक रूप से 27 जनवरी को अदालत को सूचित किया था। अदालत ने 30 जनवरी यानी आज तक इस संबंध में एक हलफनामा दायर करने को कहा था।

'हेलमेट न पहनने का कोई आदेश जारी नहीं किया'
सरकार ने अब मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति ए जे शास्त्री की अदालत के समक्ष 5 पृष्ठ का हलफनामा प्रस्तुत किया है, जिसमें उसने स्पष्ट रूप से कहा है कि उसने कोई अधिसूचना, आदेश जारी नहीं किया है। गुजरात सरकार ने हेलमेट को वैकल्पिक बनाने के लिए कोई विनियमन नहीं किया है, यहां तक कि हेलमेट को पीलर सवारों के लिए भी अनिवार्य कर दिया गया था।

परिवहन मंत्री आर सी फालदू ने कहा था लोगों की मर्जी..
इससे पहले 4 दिसंबर को राज्य के परिवहन मंत्री आर सी फालदू ने कहा था कि राज्य मंत्रिमंडल ने राज्य में नगर निगम और नगर पालिका सीमा में हेलमेट नहीं पहनने का नियम बनाने का फैसला किया है। हालांकि, यह राजमार्गों के लिए अनिवार्य बना रहेगा। बाद में जब सड़क सुरक्षा परसुप्रीम कोर्ट की समिति ने गुजरात सरकार को लताड़ लगाई, तो उन्होंने कहा कि यह निर्णय अस्थायी था।

राज्य में हैलमेट पहनना अनिवार्य ?
इधर, सूरत के निवासी संजीव भार्गव द्वारा एक जनहित याचिका दायर की है, जिन्होंने अस्थायी रूप से वैकल्पिक रूप से हेलमेट पहनने के सरकारी फैसले को चैलेंज किया था, जो मोटर वाहन(संशोधन) अधिनियम 2019 की धारा 129 के उल्लंघन में था। यह खंड के मुताबिक़ राज्य में हैलमेट पहनना अनिवार्य था।

हेलमेट नहीं पहनने पर 500 रुपये का जुर्माना
विशेष रूप से, गुजरात इस साल सितंबर में नए मोटर वाहन अधिनियम द्वारा निर्धारित यातायात उल्लंघन के जुर्माना को कम करने के लिए देश के पहले राज्यों में से एक था। नए अधिनियम के तहत हेलमेट नहीं पहनने पर 500 रुपये का जुर्माना लगता है।

'ढील नहीं दी है, तो भ्रम की स्थिति खत्म'
याचिकाकर्ता संजीव भार्गव ने संवाददाताओं से कहा कि अब जब राज्य शासन के अधिकारी ने हलफनामा पेश किया है, जिसमें कहा गया है कि सरकार ने हेलमेट नियमों में ढील नहीं दी है, तो भ्रम की स्थिति खत्म हो गई।












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