गुजरात में अब नमक बनाने वाले 3000 श्रमिकों से सौर ऊर्जा खरीदेगी सरकार, बनी ये योजना
Gujarat News, गांधीनगर। गुजरात में कच्छ के रण में नमक बनवाने वाली श्रमिक महिलाओं से यहां की कंपनियां सौर बिजली खरीदा करेंगी। गुजरात विद्युत नियामक आयोग (The Gujarat Electricity Regulatory Commission / GERC) ने हाल ही में राज्य की विद्युत डिस्कॉम और गुजरात उर्जा विकास निगम लिमिटेड GUVNL को ऑफ-सीज़न अवधि के दौरान स्व-रोजगार महिला संघ (Self-Employed Women Association / SEWA) के अगरिया के सौर पैनलों से उत्पन्न हुई बिजली खरीदने की अनुमति दी है।

बता दें कि कच्छ के छोटे रण में 3,000 से अधिक अगिआरे या नमक पैन श्रमिक हैं, जिन्हें लाभ पहुंचाने की कोशिश के तहत राज्य सरकार ने उनकी सौर बिजली ऑफ-सीज़न में खरीदने का फैसला लिया है। इसके लिए यहां एक सौर पार्क की योजना बनाई गई है, जिससे ऑफ सीज़न के दौरान अगरिया उर्जा निगम को आपूर्ति किए लगभग 2.7 मेगावाट बिजली उत्पन्न करने के लिए सौर पैनल स्थापित किये हैं। इसका श्रमिक महिलाओं द्वारा नेतृत्व किया जा रहा है।

इस महिला संगठन के प्रमुख रीमाबेन नानावती ने कहा कि, एक गरीब समुदाय पारंपरिक रूप से गुजरात में नमक का मुख्य उत्पादक रहा है। यह पहली बार है कि जब कोई बिजली कंपनी सीधे नमक के पैन श्रमिकों से बिजली खरीद कर रही है। सौर बिजली एक स्वच्छ ऊर्जा विकल्प है, जो कच्छ के रन में सैकड़ों अगियारों के लिए सफलता प्रदान कर रहा है, जिससे उन्हें बेहतर आजीविका मिल रही है।

देश का 70% नमक गुजरात से पैदा होता है
गुजरात देश में 70% नमक का उत्पादन करता है और कच्छ का छोटा रण दुनिया में नमक उत्पादन के सबसे बड़े स्थान के लिए मशहूर है। बता दें कि, यहां 2.7 मेगावाट की कुल क्षमता के साथ लगभग 3,000 सौर पैनल लगाये गये हैं। जीईआरसी ने अपने आदेश में कहा है कि उसने नमक पैन श्रमिकों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान को ध्यान में रखते हुए एक विशेष मामले के रूप में GUVNL की दरखास्त को मंजूरी दी है।












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