गुजरात की इस सीट को 10 बार जीत चुकी कांग्रेस, क्या मोदी के नाम पर 2014 दोहरा पाएगी भाजपा?

Gujarat News In hindi, गांधीनगर। गुजरात में छोटा उदयपुर लोकसभा सीट कांग्रेस-भाजपा के बीच इस बार सबसे कड़े मुकाबले वाली सीट होगी। यहां सत्ताधारी भाजपा के उम्मीदवार 3 बार ही जीते हैं, जबकि कांग्रेस यहां 10 बार जीत चुकी है। 2019 के चुनाव के लिए कांग्रेस ने रणजीत सिंह राठवा को टिकट दिया है, जो कि कांग्रेस नेता मोहन सिंह राठवा के पुत्र हैं। राठवा 1975 से विधानसभा चुनाव जीत रहे हैं। उन्हें राजनीति विरासत में मिली है। रंजीत सिंह ने बीकॉम तक पढ़ाई की है।

कांग्रेस के रंजीत सिंह बीकॉम तो भाजपा की गीताबेन राठवा 12वीं पास

कांग्रेस के रंजीत सिंह बीकॉम तो भाजपा की गीताबेन राठवा 12वीं पास

छोटा उदयपुर ऐसी सीट है, जिसे कांग्रेस अपना वोटबैंक मानती है। यहां भाजपा ने इस बार गीताबेन राठवा को टिकट देकर रामसिंह राठवा को चुनाव से दूर कर दिया है। वह तीन दशकों से यहां की राजनीति में सक्रिय हैं। वह 12वीं तक पढ़ी हैं। भाजपा और कांग्रेस के ये दोनों उम्मीदवार जिला पंचायत से चुने गए हैं।

एसटी के लिये आरक्षित सीटों में शामिल है छोटा उदयपुर

एसटी के लिये आरक्षित सीटों में शामिल है छोटा उदयपुर

बता दें कि गुजरात में एसटी के लिये आरक्षित सीटों में बारडोली, वलसाड, दाहोद और छोटा उदयपुर शामिल हैं। राज्य के आदिवासी मतदाता केवल इन चार सीटों पर ही नहीं, बल्कि अन्य चार सीटों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होते हैं, जो आरक्षित नहीं हैं। वन भूमि के अधिकार के मुद्दे पर राज्य में आदिवासी लड़ रहे हैं। इस मुद्दे का सीधा असर लोकसभा चुनाव पर पड़ सकता है।

छोटा उदयपुर में 16.55 लाख मतदाता

छोटा उदयपुर में 16.55 लाख मतदाता

एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार ने नर्मदा जलाशय के पास स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का निर्माण किया है, जिसका शुरू से ही आदि​वासियों द्वारा विरोध किया जाता रहा है। इस जगह के आसपास भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर आदिवासी भाजपा से नाराज हैं। छोटा उदयपुर में 16.55 लाख मतदाता हैं, जिसमें 55.32 प्रतिशत मतदाता आदिवासी हैं।

ऐसे जीतती रही यहां कांग्रेस

ऐसे जीतती रही यहां कांग्रेस

1967 में कांग्रेस के मनुभाई पटेल और 1971 में कांग्रेस के प्रभुदास पटेल चुनाव जीते। 1977 से 1984 तक हुए चार लोकसभा चुनावों में, कांग्रेस के अमरसिंह राठवा ने चुनाव जीता, जिसके बाद 1989 से 1998 तक कांग्रेस चुनाव हार गई। 1999 में बीजेपी के रामसिंह राठवा चुनावों में सफल रहे, लेकिन 2004 में, नारन राठवा कांग्रेस से विजेता थे। 2009 और 2014 में, यह सीट भाजपा को आवंटित की गई, जिसमें रामसिंह राठवा चुनाव जीत गए।

2014 में मोदी लहर में हुई कांग्रेस की हार

2014 में मोदी लहर में हुई कांग्रेस की हार

स्थानीय जानकार कहते हैं कि यदि मोदी का जादू नहीं चला तो भाजपा की महिला उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि पिता नारण राठवा बेटे के लिए चुनाव प्रचार में हैं। नारण राठवा इस सीट पर 5 बार चुनाव जीत चुके हैं। 2014 में नरेंद्र मोदी का करिश्मा चला था, जिसमें भाजपा के उम्मीदवार रामसिंह राठवा को 1.79 लाख की बढ़त मिली थी। 2009 के चुनाव में उनके पास केवल 26,900 की बढ़त थी। 2004 में कांग्रेस के नारण राठवा 36000 के मार्जिन से चुनाव जीते थे।

गुजरात: लोकसभा चुनाव 2019 से जुड़ी सभी जानकारी यहां पढ़ें

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