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क्राइम रिकॉर्ड: 5 सालों में गुजरात में 26907 महिलाएं गुम, 7973 किडनैप, सरकारी दावों की पोल खुली

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Gujarat News, गांधीनगर। सरकार ने गुजरात में महिलाओं के लिए 48 वुमन पुलिस स्टेशन और तत्कालिक हेल्प के लिए टोल फ्री-181 की व्यवस्था की हुई है, बावजूद इसके महिला से अत्याचार की वारदातें दिनों-दिन बढ़ रही हैं। बीते पांच वर्षों में यहां 26,907 महिलाएं गुम हो गईं, करीब 8 हजार किडनैप कर ली गईं और 4 हजार से ज्यादा ने रेप की शिकायत दर्ज कराई।

5970 महिलाओं के साथ छेड़छाड़

5970 महिलाओं के साथ छेड़छाड़

इतना ही नहीं, छेड़छाड़ के मामले भी गुजरात में बढ़ रहे हैं। पिछले 5 वर्षों में यहां 5970 महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं सामने आईं। यह खुलासा राज्य के गृह विभाग के आधिकारिक आंकड़ों से हुआ है। एक ओर राज्य सरकार का दावा है कि गुजरात में अपराध दर में कमी आई है, लेकिन फिर भी ऐसे अपराध काबू से बाहर हैं।

पांच साल में 4365 बलात्कार के केस दर्ज

पांच साल में 4365 बलात्कार के केस दर्ज

इन आंकड़ों को देखा जाए स्पष्ठ होता है कि देश के सबसे संपन्न राज्यों में से एक गुजरात भी ​महिला हिंसा पर काबू नहीं कर पा रहा। पुलिस स्टेशनों में दर्ज किये कुल मामलों में 4365 बलात्कार के थे।

कंप्यूटर ऑपरेटर थी 20 साल की युवती, उस पर सीनियर जमाता था धौंस, वो बॉस से शिकायत करने चली तो किचन में पकड़ लिया और पत्थर से गला गूंचकर मार डालीकंप्यूटर ऑपरेटर थी 20 साल की युवती, उस पर सीनियर जमाता था धौंस, वो बॉस से शिकायत करने चली तो किचन में पकड़ लिया और पत्थर से गला गूंचकर मार डाली

आए रोज 2 महिलाएं रेप का शिकार

आए रोज 2 महिलाएं रेप का शिकार

यहां आए रोज औसतन 2 महिलाएं रेप का शिकार होती हैं, जबकि कम से कम 14 महिलाएं गुम होती हैं। गुम होने वाली इन महिलाओं में ज्यादातर की मौत हो जाती है। राज्य के कई शहरों में ​महिलाओं के सामूहिक रूप से आत्महत्या किए जाने की खबरें आती हैं।

रोजाना 3 महिलाओं का अपहरण किया जा रहा

रोजाना 3 महिलाओं का अपहरण किया जा रहा

पांच वर्षों का क्राइम रिकॉर्ड देखें तो यह भी अंदाजा लगता है कि इस राज्य में हर रोज महिलाओं के अपहरण की तीन घटनाएं होती हैं। इसके अलावा दिनभर में तीन महिलाओं के साथ छेडछाड़ होती है।

रेप और मर्डर पीड़ितों का मुआवजा गुजरात सरकार ने किया दोगुना, एसिड अटैक झेल चुकीं महिला का इलाज भी मुफ्तरेप और मर्डर पीड़ितों का मुआवजा गुजरात सरकार ने किया दोगुना, एसिड अटैक झेल चुकीं महिला का इलाज भी मुफ्त

थानों में नहीं दर्ज हो पातीं शिकायतें

थानों में नहीं दर्ज हो पातीं शिकायतें

एक हकीकत यह भी है कि, महिला पुलिस थानों के बावजूद अत्याचार से पीड़ित महिलाएं महिला पुलिस थानों में शिकायत दर्ज कराने नहीं जा पातीं, क्योंकि जो महिला शिकायत करने जाती है उसे पुलिस आरोपी के रूप में सवाल पूछती है। महिलाएं किसी ऐसे पुलिस स्टेशन में जाना बहुत ही कम पसंद करती हैं जहां पुरुष कर्मचारी तैनात हों। ऐसा इसलिए कहा जा रहा ​है कि क्योंकि रेप के बाद कई महिलाएं आत्महत्या करने को मजबूर हुई हैं।

युवती को किडनैप कर मां-बाप की मदद से 4 माह साथ रखा, पीड़िता ने तीनों के खिलाफ किया केसयुवती को किडनैप कर मां-बाप की मदद से 4 माह साथ रखा, पीड़िता ने तीनों के खिलाफ किया केस

ज्यादातर थानों में सीसीटीवी, मगर 20% कैमरे बंद

ज्यादातर थानों में सीसीटीवी, मगर 20% कैमरे बंद

आश्चर्य की बात यह है कि राज्य के ज्यादातर पुलिस स्टेशन सीसीटीवी से सुस​ज्जित हैं, लेकिन टेक्नोलॉजी की लापरवाही के कारण 20% कैमरे बंद स्थिति में हैं।

समिति की बैठक 5 वर्षों में केवल 4 बार हुई

समिति की बैठक 5 वर्षों में केवल 4 बार हुई

महिला सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में सूबे में एक समिति भी बनाई गई। जिसके अनुसार, समिति की बैठक एक साल में 4 से 5 बार आयोजित की जाएगी। मगर, सचाई यह है कि समिति की बैठक बीते पांच वर्षों में केवल चार बार हो पाई है।

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English summary
crime against womens in Gujarat statistics: latest Report
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