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पाकिस्तान की तरफ से गुजरात पर Locust अटैक, 26 साल बाद किसानों को दिखाई दिए 'घुसपैठिया'

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गांधीनगर। ढ़ाई दशक बाद गुजरात में फिर टिड्डी दल का खतरा पैदा हो गया है। यहां पाकिस्तान बॉर्डर के नजदीकी गांवों में किसानों ने फसलों में टिड्डियां देखी हैं। कृषि वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि बनासकांठा जिले की कृषित भूमि टिड्डियों की जद में है। इनसे कई गांवों के किसान भयभीत हो उठे हैं। टिड्डों की वृद्धि रोकने के लिए टिड्डी चेतावनी संगठन एवं सरकार के नियंत्रण विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। जहां-जहां टिड्डियों का समूह आने की आशंका है, वहां के स्थानीय निवासियों को तुरंत कृषि विभाग से संपर्क करने के लिए कहा गया है।

बनासकांठा जिले में 26 साल बाद नजर आया टिड्डी दल

बनासकांठा जिले में 26 साल बाद नजर आया टिड्डी दल

संवाददाता के अनुसार, उत्तर गुजरात में बनासकांठा जिले के सुईगांव सबसे पहले टिड्डीयों का दल देखा गया है। यह गांव पाकिस्तान बॉर्डर के नजदीक है। ऐसा माना जा रहा है कि जिले में 26 साल बाद एक बार फिर टिड्डीयों का व्यापक-हमला हुआ है। ये टिड्डी दल पाकिस्तान से इधर आ रहे हैं। गुजरात से पहले राजस्थान में टिड्डी दल ने एंट्री ले ली थी। बहरहाल, वैज्ञानिकों और कीट नियंत्रण प्रभाग के अधिकारियों की सलाह पर किसानों ने खेतों में दवा का छिडकाव शुरू कर दिया है।

2 हजार किमी तक जा सकती हैं टिड्डियां, समंदर पार करने में सक्षम

2 हजार किमी तक जा सकती हैं टिड्डियां, समंदर पार करने में सक्षम

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि नमी के मौसम के कारण टिड्डी समंदर को आसानी से पार कर लेती हैं। टिड्डी भूखी रहकर करीब दो हजार किलोमीटर तक उड़ सकती हैं। जिस कारण यमन से कच्छ होते हुए नमी के क्षेत्र से टिड्डी के प्रवेश की आशंका बनी हुई है। यमन, सूडान व अरब देशों से पाकिस्तान होते हुए टिड्डी भारत में आने का अनुमान है। पूर्व में इन देशों में बचाव के संसाधन नहीं होने के कारण पश्चिमी भारत में भी टिड्डी आसानी से पहुंचती हैं।

किसानों के लिए कुछ भी नहीं बच पाता, आपदा से कम नहीं ये आफत

किसानों के लिए कुछ भी नहीं बच पाता, आपदा से कम नहीं ये आफत

टिड्डीयों का खतरा किसानों के लिए किसी आपदा से कम नहीं होता। खासतौर पर राजस्थान में यह देखा जा चुका है कि जहां फसलें हैं यदि वहां टिड्डी दल आ जाए तो किसानों के लिए कुछ भी नहीं बच पाता। फसलों के साथ ही अन्य पौधे, फलदार बगीचे आदि भी नष्ट हो जाते हैं। टिड्डी एक स्थान पर बैठते ही वहां अंडे दे देती हैं। एक टिड्डी एक साथ एक सौ अस्सी अंडे देती हैं। जो बीस दिनों बाद जीव बनकर तैयार हो जाते हैं।

35 हजार लोगों जितना भोजन चट कर सकता है टिड्‌डी दल

35 हजार लोगों जितना भोजन चट कर सकता है टिड्‌डी दल

कहा जाता है कि वयस्क ​टिड्‌डी हवा बहने की दिशा में 100 किमी की गति से भी ज्यादा उड़ सकती है। हर दिन ताजा भोजन उनकी पसंद होता है और अपने वजन जितना खाने में सक्षम होती हैं। अंदाजा है कि फसलों पर टिड्‌डी दल टूट पड़े तो रोजाना 35 हजार लोगों के भोजन जितना खाद्य चट कर सकता है।

1993 में बरबादी देख चुके हैं यहां के किसान

1993 में बरबादी देख चुके हैं यहां के किसान

इससे पहले गुजरात में टिड्डी के समूह 1993 में आए थे, तब किसानों की फसलों को भारी नुकसान हुआ। बनासकांठा के सीमा क्षेत्र में एक किलोमीटर के क्षेत्र को प्रभावित किया था। इसलिए, दुबारा टिड्डी देखे जाने के बाद लोकोमोटिव नियंत्रण विभाग ने दवा छिड़कने और इसे नियंत्रित करने की कोशिश की है। राज्य के कृषि विभाग के कर्मचारी बनासकांठा पहुंच गये हैं।

भारत-पाक की 270 किमी सीमा में लगते गांवों में अलर्ट

भारत-पाक की 270 किमी सीमा में लगते गांवों में अलर्ट

बनासकांठा से पहले राजस्थान में बाड़मेर और जैसलमेर जिले के गांवों में टिड्डी दल को देखा जा चुका है और वहां पर टिड्डी को मारने का काम लगातार जारी है। टिड्डी विभाग ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां तक कैंसिल कर दीं। विभाग द्वारा भारत-पाक की 270 किलोमीटर सीमा में लगते गांवों में अलर्ट जारी कर सर्वे भी किया जा रहा है। बता दें कि, 2010 में पाकिस्तान से सटे बाड़मेर जिले में ही सुंदरा गांव में टिड्डी दल का असर देखा गया था।

यह भी पढ़ें: पाक की ओर से आने वाले 'घुसपैठियों' को रोकने के लिए 'अलर्ट', स्पेशल मशीनें तैयार, देखें VIDEO

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English summary
26 years later, Locust swarms descend at Gujarat's Banaskantha
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