समुद्र साफ तो लोग खुश और कारोबार चकाचक

जेरूसलम, 10 जून। गजा में कई सालों बाद समुद्र का पानी बिलकुल नीला है, पानी में सीवेज का कोई निशान नहीं है. हवा में जो खुशबू फैली है वह नमकीन और सुखद है, जिससे गजा में समुद्र तट पर जाने वालों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण का एहसास हो रहा है. बिना ट्रीट किया हुआ सीवेज सालों से गजा के समुद्र में सीधे बहता आया है, जिसके कारण पर्यावरणीय आपदा पैदा हुई है और संकरी तटीय पट्टी में बंद लोगों के लिए उपलब्ध तैराकी के कुछ किफायती अवसरों में से एक खत्म हो गया.
पर्यावरण अधिकारियों का कहना है कि यह माहौल अलग है क्योंकि तटीय एन्क्लेव में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वित्त पोषित सीवेज ट्रीटमेंट सुविधाओं ने अपने ऑपरेशन को तेज कर दिया, जिससे प्रदूषण कई सालों में सबसे कम हो गया है.
दूसरे देश जैसा एहसास
52 साल के सहर अबू बशीर कहती हैं, "हम पहले नहीं आ सकते थे क्योंकि समुद्र प्रदूषित था और अगर हम आते तो हमारे बच्चे वायरस और त्वचा से जुड़ी बीमारी के साथ घर वापस लौटते."
समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत करते हुए चार बच्चों की मां ने कहा, "आज इलाका साफ है और समुद्र भी स्वच्छ है. हमें ऐसा लगा जैसे हम दूसरे देश में आ गए."
गंदे पानी से माइक्रोप्लास्टिक निकालने में सब्जियां आएंगी काम
इस हफ्ते लंबा रेतीला समुद्री तट चेतावनी वाले लाल रंग के झंडे से मुक्त दिखा, लाल रंग के झंडे के जरिए उन लोगों को चेतावनी दी जाती थी जो तैराकी के लिए समुद्र में जाते थे लेकिन सीवेज का पानी उनके लिए घातक साबित होता था.
समुद्र का तट साफ होने से पानी के किनारे मेज लगाकर लोग बैठ अपना समय बिता रहे हैं, इसी बीच कुछ बच्चे पानी में खेलने के लिए रबर वाले रिंग के साथ मस्ती कर रहे हैं. कुछ इलाकों में तो घोड़े के मालिक अपने जानवर को साफ पानी से नहलाते भी दिखे.

साफ समुद्र से कारोबार भी बढ़ा
हमास द्वारा संचालित पर्यावरण गुणवत्ता और जल प्राधिकरण ने कहा कि समुद्र में फेंके गए सीवेज को अब आंशिक रूप से ट्रीट किया गया, जिससे 65 फीसदी समुद्र तट सुरक्षित और स्वच्छ हो पाया. आगे भी इसे विस्तारित करने की योजना है.
एनवायरमेंटल रिसोर्स के डायरेक्टर मोहम्मद मेस्लेह ने कहा, "गजा पट्टी में गर्मी का मौसम पिछले वर्षों की तुलना में अपेक्षाकृत सुरक्षित होगा क्योंकि समुद्र के पानी की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है."

गजा का कुल क्षेत्रफल 375 वर्ग किलोमीटर है और यहां 23 लाख फलस्तीनी रहते हैं. गरीबी और बेरोजगारी के चलते अधिकतर लोग विदेश की यात्रा नहीं कर सकते हैं. स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के मुताबिक यहां बेरोजगारी की दर करीब 50 फीसदी है.
समुद्र तट के पास स्थित एक रेस्तरां के मालिक का कहना है, "जब प्रदूषण नहीं होगा तो मेरे रेस्तरां में कई ग्राहक होंगे. इससे मुझे कुछ नया करने के लिए पैसे मिल पाएंगे. नए साल के लिए इस स्थान को तैयार करने के लिए धन आएगा."
एए/वीके (रॉयटर्स)
Source: DW












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