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विचार: बलात्कार रोकने के लिए POCSO (पॉक्सो) के साथ मानसिकता में भी बदलाव की जरूरत

By अकांक्षा सिंह
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    कठुआ, इंदौर, सूरत, उन्नाव.... ये वो चंद शहर हैं जो पिछले कई दिनों से सुर्खियों में हैं। इन सभी शहरों में पिछले दिनों ऐसी घटनाएं देखने को मिलीं, जिसने देश में रह रहे हर शख्स को अंदर से झकझोर दिया। कठुआ में 8 साल की बच्ची से रेप और हत्या, इंदौर में 4 महीने की बच्ची से बलात्कार के बाद हत्या, सूरत में 11 साल की लड़की का दुष्कर्म और हत्या। इन घटनाओं पर देशभर में इतना आक्रोश है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट की बैठक में पॉक्सो एक्ट में बदलाव करने का फैसला लिया है। यानि अब 12 साल से कम बच्ची का रेप का दोषी पाए जाने पर आरोपी को फांसी की सजा सुनाई जाएगी।

    Rape

    देश को अंदर तक झकझोर देने वाली घटनाओं पर आखिर एक्शन लेते हुए सरकार ने कहा कि 12 साल से कम बच्ची से रेप का दोषी पाए जाने पर फांसी की सजा के प्रावधान के लिए सरकार अध्यादेश लाएगी। बच्चियों के बलात्कारियों को फांसी की सजा देने की मांग पिछले काफी वक्त से देश में उठ रही है और अब सरकार ने भी इसपर फैसला ले लिया है, लेकिन क्या वाकई ये फैसला बच्चियों का बलात्कार रोकने में सक्षम होगा? क्या पॉक्सो एक्ट में होने वाला ये संशोधन लोगों में ये डर बिठा पाएगा कि वो ऐसे घिनौने काम करने से पहले सौ बार सोचेंगे?

    अगर सजा पर बात की जाए तो बच्चियों से बलात्कार करने वाले को कठोर से कठोरतम सजा होनी चाहिए और किसी भी लोकतंत्र में फांसी की सजा से कठोर सजा नहीं लिखी है। बच्चियों से बलात्कार के आरोपी के लिए भी इससे बड़ी सजा नहीं हो सकती, लेकिन क्या फांसी की सजा बलात्कार रोकने का हल है? बात अगर आंकड़ों की करें तो बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन क्राई (चाइल्ड राइट्स एंड यू) के मुताबिक भारत में हर 15 मिनट में एक बच्चे के साथ यौन अपराध जैसी घटना घटती है। नाबालिगों के खिलाफ बीते 10 सालों में यौन अपराधों की संख्‍या में 500 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हुई है। 

    जब देश में बच्चियों से बलात्कार के मामले इस तेजी से बढ़ रहे हों तो क्या फांसी ही इसे रोकने का एकमात्र रास्ता है? बलात्कार को लेकर कानून तो साल 2012 में निर्भया के वक्त भी कड़े किए गए थे, फांसी की सजा तो निर्भया के बलात्कारियों को भी हुई थी, लेकिन क्या उन्हें सजा मिली? क्या उससे देश में बलात्कार के मामलों में कोई कमी आई?नहीं! देश में बच्चियों से बलात्कार रोकने का एकमात्र तरीका फांसी या लोगों में कानून का डर बिठाना नहीं है। ये मुद्दा डर और कानून से ज्यादा मानसिकता का है। अगर रेप को किसी भी तरीके से रोका जा सकता है तो वो लोगों की मानसिकता बदल कर। अपनी बच्चियों को सुरक्षित करने के लिए, उन्हें उनका बचपन लौटाने के लिए हमें लोगों की सोच को बदलना ही होगा। लोगों की इस विकृत मानसिकता को बदलना सरकार की भी उतनी ही जिम्मेदारी है, लेकिन जब खुद सरकार 'रेप कल्चर' की हिस्सेदार हो तो वो ऐसा कैसे करेगी?

    जिन लोगों को जनता ने देश की कमान सौंपी है, जब वो खुद ही अपराधियों के पक्ष में खड़े रहेंगे तो फिर कोई भी कानून बना लीजिए, इस देश की बेटियों को आप नहीं बचा पाएंगे। हाल ही में भाजपा के वरिष्ठ नेता ने महिला पत्रकारों के लिए कहा कि बिना बॉस संग 'सोए' वो रिपोर्टर नहीं बन सकतीं। भाजपा सांसद हेमा मालिनी का कहना है कि ऐसे मामलों को 'पब्लिसिटी' मिल रही है, इसलिए ऐसा हो रहा है। मुलायम सिंह पहले ही कह चुके हैं कि 'लड़के तो लड़के होते हैं, उनसे गलतियां हो जाती हैं।' और सिर्फ यही नहीं, इस फेहरिस्त में और भी कई नेता हैं। क्या ये 'रेप कल्चर' को बढ़ावा देना नहीं है? जब देश संभालने वाले ही इस तरह की बयानबाजी करेंगे, तो फिर किसी कानून का डर लोगों को अपराध करने से कैसे रोकेगा?

    कठुआ, सूरत और इंदौर में जो उन नन्हीं मासूम बच्चियों के साथ हुआ, उसे सोचकर ही मेरी रूह कांप उठती है। इतना घिनौना समाज बना दिया है हमने अपनी बेटियों के लिए कि आज 4 महीने की बच्ची भी सुरक्षित नहीं है। ये सुरक्षा उसे कानून तब तक नहीं दे सकता, जब तक कि उसे एक सुरक्षित समाज नहीं मिल पाएगा। इस समाज को सुरक्षित बनाने की जिम्मेदारी सबसे पहले सरकार की है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर कठुआ, इंदौर और सूरत जैसी घटनाएं होती रहेंगी और आप अपना 56 इंच का सीना पीट कर कहते रहिएगा कि हम उन्हें फांसी की सजा दिलवाएंगे।

    ये भी पढ़ें: POCSO (पॉक्सो) कानून क्या है, जानिए इसके प्रावधान?

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    English summary
    Will Death Penalty And Amendment In POCSO Act Stop Rape Of Children? This Is Issue Is Bigger Than That!

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