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Section 377 decriminalised: क्या है समलैंगिकता....पढ़िए, सोचिए और समझिए

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    नई दिल्ली। भारत में दो वयस्कों के बीच समलैंगिक संबंध बनाना अब अपराध नहीं है, मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने गुरुवार को दो वयस्कों के बीच सहमति से बनाए गए समलैंगिक संबंधों को अपराध मानने वाली धारा 377 से बाहर कर दिया है। मामले की सुनवाई करते हुए सीजेआई दीपक मिश्रा ने कहा कि इस मामले को लेकर मानसिकता बदलने की जरूरत है। कोई भी शख्‍स अपने व्यक्तित्व से बच नहीं सकता। सुप्रीम कोर्ट के इस बड़े फैसले के बाद एलबीजीटी समुदाय में जबरदस्त खुशी की लहर है तो वहीं उन लोगों के गाल पर आज तमाचा पड़ा है, जो कि, ये कहते थे कि समलैंगिकता एक मानसिक बीमारी है।

    'समलैंगिकता' का आखिर अर्थ है क्या?

    'समलैंगिकता' का आखिर अर्थ है क्या?

    हमारे देश में समलैंगिकता एक ऐसा विषय है, जिसे हमेशा समाज में घृणा की नजर से ही देखा गया है। सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब लोगों का शायद इसके प्रति नजरिया और सोच बदलेगी। लोगों को समझना होगा कि आखिर 'समलैंगिकता' का अर्थ है क्या?

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     LGBT समुदाय यानी Queer समुदाय

    LGBT समुदाय यानी Queer समुदाय

    समलैंगिकता का अर्थ किसी व्यक्ति का समान लिंग के प्रति आकर्षित होना है। वो दो पुरुष या दो महिलाएं भी हो सकती हैं। इनके लिए आज अंग्रेजी में LGBT शब्द प्रयोग होता है। जिसमें L का मतलब है 'लेस्बियन 'यानी कि किसी महिला का महिला के प्रति आकर्षित होना या प्यार करना। G का मतलब होता है 'गे' यानी कि मर्द का मर्दे के प्रति आकर्षित होना या प्यार करना, B का मतलब bisexual यानी कि एक महिला या पुरूष का महिला और पुरूष दोनों से प्यार करना और T का मतलब होता है ट्रांसजेंडर, यानी कि जिनका सेक्स जन्म के वक्त कुछ और बड़े होने पर कुछ और हो जाता है। इन्हीं को मिलाकर LGBT समुदाय यानी Queer समुदाय बना है।

    सामान्य व्यक्तियों की तरह होती हैं इनकी इच्छाएं

    सामान्य व्यक्तियों की तरह होती हैं इनकी इच्छाएं

    समलैंगिक हर धर्म, जाति और समुदाय में हैं और एक नार्मल व्यक्ति की ही तरह होते हैं, उनकी भी जरूरतें वो ही होती हैं जो कि एक सामान्य नर या नारी की होती हैं लेकिन हमारे समाज में इन्हें अभी तक उपेक्षा, मजाक औऱ तिरस्कार ही नसीब हुआ है, जिसके कारण लोगों को ट्रांसजेंडर सड़कों पर ताली बजाते और पैसे मांगते दिखते हैं लेकिन ऐसा नहीं है, इन्हें भी जीने का, पढ़ने लिखने का हक है, जब प्रकृति ने उन्हें वैसा बनाया है तो इन्हें समाज में इज्जत क्यों नहीं मिलती है, ये एक बड़ा सवाल है, जिसका उत्तर शायद अभी किसी के पास नहीं है।

    समलैंगिकता के कारक अभी स्पष्ट नहीं

    समलैंगिकता के कारक अभी स्पष्ट नहीं

    समलैंगिकता के कारक अभी स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन आनुवंशिकी और जन्म से पूर्व का हार्मोन के प्रभाव (जब शिशु गर्भ में पल रहा होता है) और वातावरण कभी कभार इसके कारक माने जाते हैं। वैज्ञानिकों ने यह भी दर्शाया है कि समलैंगिकता केवल मनुष्यों में ही नहीं बल्कि बहुत सी पशु प्रजातियों में भी पाई जाती है।

    समलैंगिकों को भी प्यार हो सकता है...

    समलैंगिकों को भी प्यार हो सकता है...

    अन्य लोगों के समान ही समलैंगिकों को भी प्यार हो सकता है और उनके भी जीवन-पर्यन्त संबंध हो सकते हैं। बहुत से देशों में समलैंगिक अपने जोड़ीदार से वैधानिक रूप से विवाह नहीं कर सकते। हालांकि उनके भी वैसे ही संबंध हो सकते है, जैसे विषमलैंगिकों के। शादी के बजाए कुछ देशों या राज्यों में समलैंगिकों के लिए 'नागरिक संयोजन' या 'घरेलू भागीदारी' का भी प्रावधान है। इन प्रावधानों के अंतर्गत विवाह से संबंधित कुछ सुरक्षा और लाभ मिलते हैं।

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    English summary
    In a historic judgement,consensual gay sex is not a crime, the Supreme Court ruled today. This brings a successful end to a fight against Section 377 of the Indian Penal Code (IPC) that began in 1994.

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