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Parashurama Jayanti:भगवान गणेश को दिया दंड, धरती पर हैं जीवित, जानें परशुराम भगवान से जुड़ी पौराणिक कथाएं

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नई दिल्ली, 14 मई: हिंदू कैलेंडर के मुताबिक वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को परशुराम जयंती मनाई जाती है। ये शुभ दिन आज 14 मई 2021 को है। आज के दिन परशुराम जयंती मनाई जा रही है। इस दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। भगवान परशुराम का जन्म त्रेता युग में हुआ था। इनके पिता ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका थीं। हिंदू शास्त्रों के अनुसार भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। परशुराम जयंती के दिन भगवान परशुराम की विधि-विधान से पूजा की जाती है। हिंदू शास्त्रों के मुताबिक परशुराम अपने माता-पिता के एक आज्ञाकारी पुत्र थे लेकिन उग्र स्वभाव के भी थे। आइए जानें भगवान परशुराम से जुड़ी पौराणिक कथाएं।

Parashurama Jayanti 2021

अपनी ही मां का किया था वध

पौराणिक कथाएं के मुताबिक भगवान परशुराम माता रेणुका और ॠषि जमदग्नि की चौथी संतान थे। वे इतने आज्ञाकारी की थे कि अपने पिता के कहने पर उन्होंने अपनी ही मां का वध कर दिया था। पिता के आदेश के बाद भगवान परशुराम ने अपनी मां रेणुका का सिर उनके धड़ से अलग कर दिया था। इसके बाद परशुराम ने भगवान शिव की तपस्या कर मातृ-हत्या के पाप से मुक्ति पा ली थी। तपस्या से खुश होकर भगवान शिव ने भगवान परशुराम त्युलोक के कल्याणार्थ परशु अस्त्र दिया था। इसी वजह से उन्हें परशुराम कहा जाता है।

भगवान गणेश को किया था दंडित

न्याय के भगवान कहे जाने वाले परशुराम ने एक बार भगवान गणेश को भी दंड दिया था। पुराण के अनुसार, एक बार भगवान परशुराम भगवान शिव से मिलने कैलाश पर्वत गए थे। लेकिन भगवान गणेश ने उन्हें भगवान शिव से नहीं मिलने दिया। इस बात से क्रोधित होकर परशुराम ने फरसे से भगवान गणेश का एक दांत तोड़ दिया था। इसके बाद से ही गणपति एकदंत कहलाते हैं।

Parashurama Jayanti 2021

भगवान परशुराम को क्यों कहा जाता है भार्गव

कहा जाता है कि भगवान परशुराम ने ही भारत के लगभग सारे गांव बसाए थे। पौराणिक कथाओं की मानें ते भगवान परशुराम ने ही वाण चलाकर गुजरात से लेकर केरल तक समुद्र को पीछे धकेल दिया था। जिससे नई नई भूमि मिली थी। इसलिए उन्ंहे भार्गव नाम से भी जाना जाता है। भार्गव के अलावा भगवान परशुराम को भृगुपति, रामभद्र, भृगुवंशी नाम से भी जाना जाता है।

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आज भी धरती पर जीवित हैं परशुराम

हिंदू मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि परशुराम हर युग में मौजूद रहे हैं। भगवान परशुराम सात चिरंजीवी लोगों में एक हैं। इसलिए ऐसा कहा जाता है कि वह आज भी धरती जीवित हैं। परशुराम त्रेतायुग से लेकर द्वापरयुग में भी थे।

English summary
Parashurama Jayanti 2021 significance hindu values related to lord Parashurama
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