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National Sports Day 2020: मेजर ध्यानचंद कैसे बने हॉकी के जादूगर, जानिए उनसे जुड़ी 10 खास बातें

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नई दिल्ली। मेजर ध्यानचंद, वो नाम जिसे हॉकी दुनिया का जादूगर कहा जाता है। जब भी हॉकी खेल की बात आती है, तो उसमें मेजर ध्यानचंद का नाम सबसे पहले जहन में आ जाता है। ऐसा कहा जाता है कि उनके जैसा हॉकी खिलाड़ी ना पहले कभी था और ना ही आज कोई है। हॉकी स्टिक से उनकी कुछ ऐसी दोस्ती थी, कि जब भी कोई उन्हें खेलता देख ले, तो वो देखता रह जाता था। उन्हीं की बदौलत भारत तीन बार (1928, 1932 और 1936) हॉकी में ओलंपिक गेम्स में गोल्ड मेडल जीत पाया था। जिस समय वह हॉकी खेलते थे, उस समय को भारतीय हॉकी का स्वर्ण काल तक कहा जाता है।

    Hockey legend Dhyan Chand: Once got Invitation from Hitler to play for Germany | Oneindia Sports
    'हॉकी के जादूगर' कहा जाता था

    'हॉकी के जादूगर' कहा जाता था

    'हॉकी के जादूगर' कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद में बॉल पर नियंत्रण करने की अद्भुत कला था। उन्होंने साल 1948 में हॉकी से अपने रिटायरमेंट की घोषणा की थी। उन्होंने अपने पूरे अंतरराष्ट्रीय करियर में 400 से अधिक गोल किए हैं। भारत सरकार ने उन्हें साल 1956 में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। इसके साथ ही उनके जन्म दिवस 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है और इस दिन देश के राष्ट्रपति- राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड, अर्जुन अवॉर्ड और द्रोणाचार्य अवॉर्ड से खिलाड़ियों को सम्मानित करते हैं। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की आत्मकथा 'गोल' साल 1952 में प्रकाशित हुई थी। तो चलिए अब इस महान खिलाड़ी से जुड़ी 10 खास बातें जान लेते हैं।

    मेजर ध्यानचंद का खेल देख हिटलर भी हुए हैरान

    मेजर ध्यानचंद का खेल देख हिटलर भी हुए हैरान

    • ध्यान सिंह 16 साल की उम्र में भारतीय सेना में शामिल हुए थे और वहां हॉकी खेलना शुरू कर दिया था। वह रात को भी प्रैक्टिस किया करते थे, जिसके बाद उनके साथी खिलाड़ियों ने उन्हें 'चंद' कहकर संबोधित करना शुरू कर दिया।
    • एक बार मैच के दौरान ध्यानचंद विपक्षी टीम से एक भी गोल हासिल नहीं कर पाए थे। कई बार असफल होने के बाद, उन्होंने मैच रेफरी से गोल पोस्ट के माप के बारे में शिकायत की और फिर सच में ये पाया गया कि गोल पोस्ट की आधिकारिक चौड़ाई अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार नहीं थी।
    • साल 1936 के बर्लिन ओलंपिक में भारत के पहले मैच के बाद, ध्यानचंद की जादुई हॉकी देखने के लिए हॉकी मैदान पर लोगों की भीड़ जमा होने लगी थी। तब जर्मनी के एक अखबार ने इस हेडिंग के साथ खबर प्रकाशित की थी- 'ओलंपिक कैंपस में अब एक जादू का शो है।' फिर अगले दिन बर्लिन की दिवारों पर पोस्टर लग गए, जिनपर लिखा था, 'हॉकी स्टेडियम जाओ और भारतीय जादूगर का जादू देखो'।
    • जानकारी के अनुसार, एक बार जब हिटलर जर्मनी के खिलाफ हो रहे मैच में ध्यानचंद का खेल देख रहे थे, तो उन्होंने ध्यानचंद को जर्मनी में बसने का प्रस्ताव दिया और साथ ही कहा कि सेना भी उन्हें कर्नल की रैंक दी जाएगी। लेकिन ध्यानचंद ने मुस्कुराते हुए इस प्रस्ताव को अपनाने से इनकार कर दिया था।
    • साल 1936 के ओलंपिक में जर्मनी के खिलाफ हो रहे मैच में गोलकीपर की हॉकी ध्यानचंद के मुंह पर लग गई थी, जिससे उनका दांत टूट गया था। तब वह प्राथमिक उपचार के बार दोबारा ग्राउंड पर लौटे और खिलाड़ियों से बोले की अब कोई गोल ना मारा जाए। उन्होंने ऐसा जर्मन खिलाड़ियों को ये बताने के लिए कहा था, कि बॉल पर कैसे नियंत्रण किया जाता है। उनके ऐसा कहने के बाद खिलाड़ बार बार बॉल जर्मनी के गोलपोस्ट पर ले जाते और फिर अपने कोर्ट में ले आते।
    अमेरिका और जापान को हराया

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    • जब 1935 में हॉकी की टीम ऑस्ट्रेलिया में थी, तब ध्यानचंद की मुलाकात क्रिकेट खिलाड़ी डॉन ब्रैडमैन से हुई। ध्यानचंद का खेल देखने के बाद डॉन ब्रैडमैन ने कहा, 'वह हॉकी में उसी तरह गोल करते हैं जैसे क्रिकेट में रन बनाए जाते हैं।'
    • ऐसा कहा जाता है कि वियना (ऑस्ट्रिया) के लोगों ने मेजर ध्यानचंद की मूर्ति तक बनवाई थी। जिसमें उनके चार हाथ और उनमें चार हॉकी स्टिक दिखाई गई थीं। जिसके जरिए उनकी बॉल पर मास्ट्री और स्टिक पर नियंत्रण को दिखाया गया था। हालांकि वर्तमान में ऐसी कोई मूर्ति मौजूद नहीं है और ना ही इससे संबंधित कोई दस्तावेज मौजूद हैं।
    • नीदरलैंड में हॉकी स्टिक के अंदर चुंबक होने की संभावना के कारण अधिकारियों ने ध्यानचंद की हॉकी स्टिक को तोड़ दिया था।
    • ध्यानचंद ने कई यादगार मैच खेले हैं। हालांकि उनका कहना था कि उनके लिए अपना सर्वश्रेष्ठ मैच 1933 में 'बेटन कप' के लिए हुआ मैच था। जो 'कलकत्ता कस्टम' और 'झांसी हीरोज' के बीच खेला गया था।
    • 1932 में ओलंपिक में भारत ने अमेरिका और जापान को 24-1 और 11-2 से हराया था। इन 35 में से 12 गोल ध्यानचंद ने किए थे। वहीं उनके भाई रूप सिंह ने 13 गोल किए थे। इस शानदार खेल के लिए दोनों भाइयों को 'हॉकी ट्विन्स' तक कहा जाने लगा था।

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    English summary
    National Sports Day 2020 know ten interesting facts about hockey player major dhyan chand on his birthday
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