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शिवराज सिंह चौहान इस मायने में हैं मोदी और शाह से भी बड़े नेता, हार कर भी जीता दिल

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भोपाल। मध्यप्रदेश में 13 साल 13 दिन शासन करने वाले शिवराज सिंह चौहान इस बार भले ही जीत का चौका ना लगा पाए हों लेकिन उन्होंने अब तक के सबसे सफलतम मुख्यमंत्री के रूप में जरूर अपनी पहचान स्थापित की है। वे इस चुनाव में सरकार बनाने की बाजी भले ही हार गए हों लेकिन वे 'दिल' जीतने में सफल रहे और यही कारण है कि हार के बावजूद शिवराज सिंह चौहान. किसी के निशाने पर नहीं हैं, बल्कि उनके विरोधी गण भी उनकी तारीफ के पुल बांध रहे हैं।

'शिवराज सिंह ने अपनी हार भी विनम्रता से स्वीकार की'

'शिवराज सिंह ने अपनी हार भी विनम्रता से स्वीकार की'

ये शिवराज सिंह के महान व्यक्तित्तव का ही प्रमाण है कि उन्होंने सत्ता गंवाने के बाद भी हार भी विनम्रता से स्वीकार की है, उन्होंने कांग्रेस से अपेक्षाकृत ज्यादा वोट और महज पांच कम सीटें मिलने के बावजूद जोड़-तोड़ से सरकार बनाने की अलोकतांत्रिक कोशिशें नहीं की और ना ही सत्ता लोभ दिखाया, हालांकि वो जानते हैं कि इस बार की हार में राज्य के मुद्दे कम केंद्र की नीतियों का ज्यादा अहम रोल है लेकिन फिर भी उन्होंने हाथ जोड़कर जनता के फैसले का सम्मान किया है और उनसे गलतियों की क्षमा मांगी और हार की जिम्मेदारी खुद पर ली, उनका यही गुण उन्हें पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से भी ज्यादा बड़ा नेता बनाता है।

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अपने पुराने साथियों का किया दिल से धन्यवाद

अपने पुराने साथियों का किया दिल से धन्यवाद

प्रदेश के मामा के रूप में विख्यात शिवराज सिंह चौहान, जाते-जाते अपने उन लोगों को भी नही, भूले, जिन्होंने उनका 13 सालों तक 24 घंटे लगातार साथ दिया है, सीएम हाउस छोड़ने से पहले उन्होंने अपने पर्सनल स्टाफ को फेयरवेल पार्टी दी और सबका दिल से धन्यवाद किया, उन्होंने इस सिलसिले में एक भावुक पोस्ट भी लिखी है, जो ये बताने के लिए काफी है कि 'शिवराज' तो 'शिवराज 'हैं। उनकी पोस्ट के एक-एक शब्द उनकी सादगी, प्रेम, सच्चाई और सज्जनता का परिचय बखूबी देते हैं।

नम्रता और प्रेम से किया सभी का धन्यवाद

शिवराज सिंह चौहान ने लिखा है कि आज निवास पर अपने वृहद परिवार के साथ भोजन करने का सुखद अनुभव प्राप्त किया, जो मेरे साथ पिछले 13 वर्षों से परछाई की तरह और हर चुनौती में मेरे साथ खड़ा रहे, वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर सुरक्षाकर्मियों तक अपने पर्सनल स्टॉफ के साथ बिताए ये पल जीवनभर अविस्मरणीय रहेंगे, निवास के रखरखाव से लेकर स्वच्छता और सौंदर्य तक की देखभाल करने वाले सभी साथियों के साथ आज समय बिताकर मन आनंदित हो गया, आप सभी से मेरा इतना गहरा नाता बन चुका है, जो विस्मृत होना संभव नहीं है, आप सभी का हृदय से धन्यवाद।

अटल के अंदाज में दिया अपना त्यागपत्र, नहीं किया जोड़-तोड़

सरकारें बनती-बिगड़ती रहती हैं, सीएम आते-जाते रहते हैं. लेकिन इस तरह से अपने हर साथी को कोई याद नहीं करता है, उन्होंने तो जीत पर राहुल गांधी, कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया को बधाई भी दी और उन्हें घर पर आमंत्रित भी किया जिसकी वजह से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को भी शिवराज सिंह की तारीफ करने के लिए विवश होना पड़ा, पूरे चुनाव प्रचार के दौरान भले ही कांग्रेस और भाजपा के दिग्गज नेताओं ने एक-दूसरे पर छींटाकशी की हो लेकिन शिवराज सिंह चौहान ने भाषा की मर्यादा नहीं खोई और नम्रतापूर्वक अपना इस्तीफा राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को ठीक उसी तरह से सौंप दिया जिस तरह से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने साल 1996 में त्यागपत्र दिया था।

'ना हार में, ना जीत में, किंचित नहीं भयभीत मैं'

'ना हार में, ना जीत में, किंचित नहीं भयभीत मैं'

शिवराज सिंह चौहान ने अपने इस वक्त में भाजपा के आदर्श और अपने प्रिय अटल बिहारी बाजपेयी की उस लाइन को भी दोहराया जिसमें उन्होंने कहा था कि 'ना हार में, ना जीत में, किंचित नहीं भयभीत मैं, कर्तव्‍य पथ पर जो भी मिले, ये भी सही वो भी सही।' जो ये बताने के लिए काफी है कि शिवराज सिंह केवल अटल बिहारी को अपना आदर्श कहते नहीं थे बल्कि मानते भी थे और ये उनकी इस सज्जनता का ही परिणाम है कि उन्होंने इतना लंबा शासन राज्य पर किया है।

शिवराज सिंह की वजह से ही हुआ कांटे का मुकाबला

शिवराज सिंह की वजह से ही हुआ कांटे का मुकाबला

शिवराज सिंह की वजह से ही राज्य में नेक टू नेक मुकाबला हुआ और बेहद मामूली अंतर से पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है, तो उसकी वजह सिर्फ यही है कि 13 साल मुख्यमंत्री रहते हुए भी उन्होंने अहंकार नहीं दिखाया। एक नेता के तौर पर वह लोगों से जुड़े रहे, पूरे प्रदेश में घूमते रहे और अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को नाराज नहीं किया।

शिवराज सिंह की लोकप्रियता में कमी नहीं

आज पार्टी उनकी बहुमत में नहीं, सत्ता उनके हाथ में नहीं, सीएम की कुर्सी उनसे दूर हो गई लेकिन उनकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं हुई जिसका अंदाजा आप सोशल मीडिया पर आए कमेंट्स से लगा सकते हैं, उनके आधिकारिक टिवट्‍र अकाउंट पर जो प्रतिक्रियाएं मिल रहीं हैं, उससे साबित होता है कि लोग उन्हें कितना पसंद करते हैं। लोगों ने उनके लिए लिखा है कि बस कीजिये मामा अब रुलाइयेंगे क्या। लोगों ने शिवराज की हार पर अफसोस जाहिर किया। उन्होंने कहा कि सर मैं बता नहीं सकता कि मुझे और मेरे परिवार को कितना बुरा लग रहा है। सर बस 5 साल हम आपको बहुत मिस करेंगे। उसके बार मध्यप्रदेश में फिर शिवराज होगा।

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English summary
BJP made it neck and neck due to Shivraj Singh Chouhan, wins Heart, He is Real Mama. Chouhan had taken BJP to those heights in the last election, upping the BJP count of 142 seats in the 2009 elections.
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