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POCSO (पॉक्सो) कानून क्या है, जानिए इसके प्रावधान?

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      Impeachment Motion क्या है, CJI Dipak Mishra पर Opposition का प्रस्ताव | महाभियोग | वनइंडिया हिंदी

      नई दिल्ली। इस वक्त पूरे देश में मासूमों के साथ हो रही रेप की घटनाओं पर खासा गुस्सा है, लोग जगह-जगह प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकार से इस मुद्दे पर गहन चिंतन करते हुए एक अहम कदम उठाया है।  उसने 'पाक्सो ऐक्ट' में बदलाव किया है, जिसके तहत अब 12 साल तक की बच्ची से रेप के दोषियों को मौत की सजा मिलेगी। सरकार की ओर से रखे गए इस प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। शनिवार को प्रधानमंत्री आवास पर केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया। अब सरकार इसके लिए अध्यादेश लाएगी।

      अब सवाल ये उठता है कि आखिर 'पाक्सो ऐक्ट' या POCSO act है क्या..तो चलिए जानते हैं उसके बारे में विस्तार से.....

      'पाक्सो ऐक्ट' या POCSO act

      'पाक्सो ऐक्ट' या POCSO act

      POCSO का पूरा नाम है The Protection Of Children From Sexual Offences Act या प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रेन फ्राम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट । ये विषेष कानून सरकार ने साल 2012 में बनाया था। इस कानून के जरिए नाबालिग बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराध और छेड़छाड़ के मामलों में कार्रवाई की जाती है।

      गंभीर अपराधों से सुरक्षा प्रदान

      गंभीर अपराधों से सुरक्षा प्रदान

      यह एक्ट बच्चों को सेक्सुअल हैरेसमेंट, सेक्सुअल असॉल्ट और पोर्नोग्राफी जैसे गंभीर अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है। वर्ष 2012 में बनाए गए इस कानून के तहत अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा तय की गई है।

      यह अधिनियम पूरे भारत पर लागू होता है

      यह अधिनियम पूरे भारत पर लागू होता है

      यह अधिनियम पूरे भारत पर लागू होता है, पॉक्सो कनून के तहत सभी अपराधों की सुनवाई, एक विशेष न्यायालय द्वारा कैमरे के सामने बच्चे के माता पिता या जिन लोगों पर बच्चा भरोसा करता है, उनकी उपस्थिति में होती है।

      यदि किसी बच्चे का यौन शोषण हुआ है तो...

      यदि किसी बच्चे का यौन शोषण हुआ है तो...

      यदि अभियुक्त एक किशोर (टीनएज) है, तो उसके ऊपर किशोर न्यायालय अधिनियम में केस चलाया जाएगा। इस एक्ट में ये भी नियम है कि यदि कोई व्यक्ति यह जनता है कि किसी बच्चे के साथ गलत कृत्य हुआ तो उसके इसकी रिपोर्ट नजदीकी थाने में देनी चाहिए, यदि वो ऐसा नहीं करता है तो उसे 6 महीने तक की जेल हो सकती है।

      बच्चे की मेडिकल जांच के लिए भी प्रावधान

      बच्चे की मेडिकल जांच के लिए भी प्रावधान

      पुलिस की यह जिम्मेदारी बनती है कि मामले को 24 घंटे के अन्दर बाल कल्याण समिति की निगरानी में लाये ताकि CWC बच्चे की सुरक्षा और संरक्षण के लिए जरूरी कदम उठा सके। इस अधिनियम में बच्चे की मेडिकल जांच के लिए प्रावधान भी किए गए हैं, जो कि इस तरह की हो ताकि बच्चे के लिए कम से कम पीड़ादायक हो। मेडिकल जांच बच्चे के माता-पिता या किसी अन्य व्यक्ति की उपस्थिति में किया जाना चाहिए, जिस पर बच्चे का विश्वास हो, और पीड़ित अगर लड़की है तो उसकी मेडिकल जांच महिला चिकित्सक द्वारा ही की जानी चाहिए।

      इस केस की सुनवाई बंद कमरे में करने का प्रावधान है

      इस केस की सुनवाई बंद कमरे में करने का प्रावधान है

      इस केस की सुनवाई बंद कमरे में करने का प्रावधान है और इस दौरान बच्चे की पहचान गुप्त रखना भी जरूरी है। स्पेशल कोर्ट, उस बच्चे को दिए जाने वाली मुआवजे की राशि भी तय कर सकता है।

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      English summary
      The Protection of Children from Sexual Offences Act (POCSO Act) 2012 was formed to protect children from offenses of sexual abuse, sexual harassment and pornography and to provide a child-friendly system for the trial of these offences.

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