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Happy Teacher's Day: मिलिए छात्रों के Real हीरो आनंद कुमार से, जिन्होंने कमजोरी को बनाई अपनी ताकत

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नई दिल्ली। भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन 5 सितंबर को 'शिक्षक दिवस' के रूप में मनाया जाता है। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन देश के दूसरे राष्ट्रपति थे। राजनीति में आने से पहले उन्होंने अपने जीवन के 40 साल अध्यापन को दिए थे, सर्वपल्ली राधाकृष्णन का मानना था कि बिना शिक्षा के इंसान कभी भी मंजिल तक नहीं पहुंच सकता है इसलिए इंसान के जीवन में एक शिक्षक का होना बहुत जरूरी है, क्योंकि बिना गुरु के इंसान सही रूप में सफलता अर्जित ही नहीं कर सकता है इसलिए राधाकृष्णन को सम्मान देते हुए उनके जन्मदिन को 'शिक्षक दिवस' का रूप दे दिया गया।

छात्रों के Real हीरो हैं आनंद कुमार

छात्रों के Real हीरो हैं आनंद कुमार

बात शिक्षक दिवस की हो और सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार का नाम ना लिया जाए, भला ऐसा हो सकता है क्या, आनंद कुमार एक शिक्षक ही नहीं बल्कि वो इंसान हैं, जिन्होंने लोगों को ये बताया कि अभाव आपकी प्रगति में बाधा तो बन सकते हैं लेकिन आपकी प्रगति को रोक नहीं सकते हैं। छात्रों के लिए मसीहा बने आनंद कुमार ने अपनी कमजोरी को ही अपनी शक्ति बनाते हुए आदर्श शिक्षक की जो नायाब तस्वीर पेश की है, उसके आगे हर कोई शीश झुकाता है।

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पैसों के अभाव के कारण टूटा था सपना

पैसों के अभाव के कारण टूटा था सपना

मालूम हो कि बिहार की सुपर-30 कोचिंग के संस्थापक आनंद कुमार का जन्म पटना में हुआ और इनके पिता डाक विभाग में चिठ्ठी छांटने का काम करते थे। बंधी हुई आमदनी की वजह से चलने वाले घर में जन्मे इस बच्चे को बहुत जल्द आर्थिक अभाव और महंगी पढ़ाई का मोल समझ आ गया था।

आनंद कुमार को शुरू से ही गणित में काफी रूचि थी

सरकारी स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण करने वाले आनंद कुमार को शुरू से ही गणित में काफी रूचि थी, उन्होंने भी इंजीनियर बनने का सपना देखा था, ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने नंबर थ्योरी में पेपर सब्मिट किए थे जो मैथेमेटिकल स्पेक्ट्रम और मैथेमेटिकल गैजेट में पब्लिश हुए थे।

आनंद कुमार ने लिया अहम फैसला

आनंद कुमार ने लिया अहम फैसला

जिसके बाद उन्हें क्रैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ने के लिए बुलावा भी आया, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनका सपना पूरा नहीं हो सका, बस इसी दुख को उन्होंने अपनी ताकत बनाकर प्रण किया कि वो देश के गरीब बच्चों का भविष्य संवारेंगे।

हार्ट अटैक के चलते पिता का हुआ निधन

लेकिन इसी बीच 23 अगस्त, 1994 को हार्ट अटैक के चलते उनके पिता का निधन हो गया,उनके पिता डाक विभाग में थे, इसलिए उन्हें अपने पिता की जगह डाक विभाग में नौकरी मिल रही थी लेकिन उन्होंने इस नौकरी को ना करने का फैसला किया। पिता के निधन के बाद पूरा घर गरीबी की चपेट में आ गया, घर चलाने के लिए आनंद की मां ने घर में पापड़ बनाना शुरू किया जिसे कि आनंद और उनके भाई घर-घर बांटा करते थे।

'रामानुजम स्कूल ऑफ मैथेमेटिक्स' नाम से कोचिंग खोली

'रामानुजम स्कूल ऑफ मैथेमेटिक्स' नाम से कोचिंग खोली

इसके कुछ समय बाद हालात को सुधारने के लिए आनंद ने अपने ही घर में 'रामानुजम स्कूल ऑफ मैथेमेटिक्स' नाम से कोचिंग खोली, जिसमें शुरू-शुरू में दो विद्यार्थी आए, जिनसे आनंद ने 500 रूपए फीस ली थी, इसी दौरान उनके पास एक ऐसा छात्र आया, जिसने कहा कि वह ट्यूशन तो पढ़ना चाहता है लेकिन उसके पास पैसे नहीं हैं, उस छात्र में आनंद को अपनी छवि दिखी और उसके बाद से वो उसे पढ़ाने में जुट गए, दिन-रात की मेहनत के चलते वो छात्र आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में सफल हुआ।

2002 में हुई सुपर 30 की स्थापना

बस यहीं से उनके दिमाग में सुपर 30 का ख्याल आया और उन्होंने 2002 में सुपर 30 की स्थापना की, जिसमें उन गरीब बच्चों को पढ़ाया जाता है, जो कि आर्थिक तंगी की वजह से आईआईटी जैसे संस्थान में जाने की तैयारी नहीं कर पाते हैं। संस्थान का खर्चा आनंद खुद अपने पैसों से चलाते हैं और इस बारे में वह कहते हैं कि सुपर 30 को बड़ा करने के लिए पैसे नहीं चाहिए लेकिन हां ,आपके सपने जरूर चाहिए।

महावीर अवॉर्ड

साल 2019 में आनंद कुमार को शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए भगवान महावीर फाउण्डेशन की ओर से महावीर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।

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English summary
Meet Super 30 founder Anand Kumar On this teachers day, he is real hero for all Students.
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