• search
क्विक अलर्ट के लिए
अभी सब्सक्राइव करें  
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

Guru Arjan Dev Ji shaheedi Purab: जानिए सिखों के पांचवें गुरु अर्जुन देव जी से जुड़ी खास बातें

|

नई दिल्ली। अपना पूरा जीवन धर्म और लोगों की सेवा के लिए न्योछावर करने वाले सिखों के पांचवें गुरु अर्जुन देव जी का 26 मई को बलिदान दिवस है। वो न केवल सभी धर्मों को एक समान दृष्टि से देखते थे बल्कि दिन रात संगत और सेवा में लगे रहते थे। गुरु अर्जुन देव जी का जन्म 15 अप्रैल, साल 1563 में हुआ था। उनके पिता गुरु रामदास सिखों के चौथे गुरू थे और उनकी माता का नाम बीबी भानी था। गुरु अर्जुन देव जी शांत स्वभाव और कुशाग्र बुद्धि वाले थे। साथ ही उन्हें गुरूबाणी कीर्तन करना भी काफी पसंद था।

Guru Arjan Dev Ji shaheedi Purab, Guru Arjan Dev Ji shaheedi, Guru Arjan Dev Ji shaheedi diwas, Guru Arjan Dev Ji, sikh, sikh guru, fifth guru of sikh, guru, arjun dev ji, shaheedi diwas, गुरु अर्जुन देव जी शहीदी पूरब, गुरु अर्जुन देव जी शहीदी दिवस, गुरु अर्जुन देव जी, अर्जुन देव जी, सिख गुरु, गुरु, सिखों के पांचवें गुरु

उनके इन श्रेष्ठ गुणों को देख पिता रामदास ने केवल 18 साल की उम्र में ही उन्हें गुरुगद्दी सौंप दी थी। गुरुगद्दी पर बैठते ही उन्होंने वो सभी काम पूरे करने शुरू कर दिए, जिन्हें उनके पिता ने आरंभ किया था। गुरु अर्जुन देव ने सिखों को अपनी कमाई का दसवां हिस्सा धार्मिक और सामाजिक कार्यों में लगाने के लिए प्रेरित किया। बाद में इसे धर्म का अंग बना दिया गया। ऐसे मानवीय कार्य में सभी लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा भी लेने लगे थे। गुरु अर्जुन देव जी का विवाह साल 1579 में माता गंगा के साथ हुआ था। दोनों के पुत्र का नाम हरगोविंद सिंह था, जो बाद में सिखों के छठे गुरु बने।

अर्जुन देव ने ही अमृतसर में हरमंदिर साहिब गुरुद्वारे की नींव रखवाई थी, जिसे आज स्वर्ण मंदिर के नाम से जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस गुरुद्वारे का नक्शा खुद अर्जुन देव जी ने बनाया था। गुरु अर्जुन देव जी ने भाई गुरदास के सहयोग से गुरु ग्रंथ साहिब का संपादन किया था। उन्होंने गुरु वाणियों का वर्गीकरण भी रागों के आधार पर किया। गुरु अर्जुन देव जी ने धर्म के लिए अपने प्राणों तक की आहुति दे दी। दरअसल अकबर की मौत के बाद उसका बेटा जहांगीर मुगल साम्राज्य का शासक बना। उसी दौरान जहांगीर के बेटे खुसरो ने बगावत कर दी और जहांगीर ने उसे गिरफ्तार करने का आदेश दिया।

वो पंजाब की ओर भागा और तरनतारन में गुरु अर्जुन देव जी के पास पहुंचा। गुरु जी ने उसका स्वागत किया। बाद में जहांगीर ने मौका मिलता देख गुरु जी को उल्टे सीधे आरोप लगाकर गिरफ्तार कर लिया। उन्हें शहीद करने का डर दिखाकर अपनी मर्जी के कार्य करवाने की कोशिश की लेकिन गुरु जी ने झूठ का साथ देने से साफ इनकार कर दिया और शहादत को चुना। फिर जहांगीर ने उन्हें शहीद करने का हुकम दिया और लाहौर में कई यातनाएं दीं।

पहले दिन गुरु जी को गर्म तवे पर बैठाया गया और उनके ऊपर गर्म रेत डाली गई। इसके अलावा उन्हें और भी कई तरह के कष्ट दिए गए। फिर गुरु जी के अर्धमूर्छित शरीर को रावी नदी में बहा दिया गया। उनकी याद में रावी नदी के किनारे पर ही गुरुद्वारा डेरा साहिब बनवाया गया था, जो वर्तमान में पाकिस्तान में स्थित है।

प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना: लाभार्थियों का सत्यापन हुआ शुरू, पात्रता की भी हो रही जांच

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Guru Arjan Dev Ji shaheedi Purab 2020 know all about fifth guru of sikhs arjan dev ji
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more