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Diwali 2019: पटाखों से नुकसान इसलिए मनाइए इकोफ्रेंडली दिवाली

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नई दिल्ली। दिवाली खुशियों, प्यार और रोशनी का पर्व है, इस दिन लोग दिए जलाकर अपनी खुशी को व्यक्त करते हैं लेकिन पिछले कुछ वक्त से त्योहार के नाम पर हम अपने पर्यावरण को लगातार प्रदूषित करते जा रहे हैं, जिसका नतीजा ये हुआ है कि आज प्रदूषण खतरनाक रूप धारण कर चुका है लेकिन अगर अभी भी स्थिति को संभाला नही गया तो आने वाली स्थिति और भयानक होगी, क्या आपको पता है कि दिवाली के पटाखों की आवाज से कान के पर्द तक फट सकते हैं।

पटाखों से होता है सिर्फ नुकसान

पटाखों से होता है सिर्फ नुकसान

पटाखों में कॉपर, कैडियम, लेड, मैग्नेशियम, सोडियम,जिक, नाइट्रेट एवं नाइट्राइट जैसे घातक रसायन मिले होते हैं। इसमें 125 डेसीबल से ज्यादा ध्वनि होती है। जिससे इंसान बहरा भी हो सकता है। इससे निकलने वाली चिगारी से सांस एवं त्वचा की बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है।

यह पढ़ें: Diwali 2019: जानिए लक्ष्मी-गणेश की पूजा और मुहूर्त का समय

पटाखों से मरीजों और वृद्धों को भी काफी परेशानी होती है..

पटाखों से मरीजों और वृद्धों को भी काफी परेशानी होती है..

डॉक्टरों के मुताबिक पटाखों से आम जन ही नहीं घरों और अस्पतालों में। पालतू पशु-पक्षियों की हालत और खराब होती है। इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक का भी खतरा रहता है। मानसिक अशांति और घबराहट के साथ उल्टी होना आम बात है।

पल भर की खुशी के लिए ना खरीदें जीवन भर का गम

कई बार नर्वस सिस्टम भी गड़बड़ा जाता है, इसलिए जरा देर की खुशी के साथ हम उम्र भर का गम क्यों खरीदें इसलिए हर किसी को थोड़ा सा सजग रहने की जरूरत है और इसी वजह से लोगों को इकोफ्रेंडली दिवाली मनाने की सलाह दी जा रही है।

 'इकोफ्रेंडली' पटाखों संग मनाएं सुरक्षित दिवाली

'इकोफ्रेंडली' पटाखों संग मनाएं सुरक्षित दिवाली

पटाखों के शौकीनों के लिए इस दीपावली पर बाजार में इकोफ्रेंडली पटाखे आए हैं, जिससे आपका पटाखे जलाने का शौक भी पूरा हो जाएगा और वो भी वायुमंडल को नुकसान पहुंचाए बगैर। पटाखे फोड़ना कोई बुरी बात नहीं है, बस थोड़ा ध्यान देने की जरूरत है, दीपावली खुशियों का त्योहार है तो क्यों न हम इस दीपावली पर वायुमंडल को नुकसान पहुंचाए बगैर इकोफ्रेंडली पटाखों से अपने इस शौक को पूरा करें इसलिए सुरक्षित दिवाली संग मनाएं शुभ दीपावली।

यह पढ़ें: Diwali 2019: जानिए क्या होते हैं ग्रीन पटाखे?

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English summary
Diwali celebrations are associated with pollution rather than their traditional significance. Here is how to bring back the true spirit of Diwali.
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