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Metro In Dino Review: बॉलीवुड की जरूरत अनुराग बासु की फ्रेश कहानी वाली फिल्म, म्यूजिकल नहीं मैजिकल है

हिंदी सिनेमा जिसे बॉलीवुड के नाम से पहचाना जाता है। इससे इन दिनों आम लोग थोड़ छिटके से महसूस कर रहे हैं। वजह ये है कि अच्छी फिल्मों का ना आना। या फिर ये कहें कि रीमेक फिल्म ही बनाना। नई कहानी, जिसे हम फ्रेश फिल्म कह सकें वो बॉलीवुड से कोसो दूर है। लेकिन ये इंतजार अब थोड़ा खत्म हो गया है। क्योंकि अनुराग बासु ने अपनी ही फिल्म लाइफ इन अ मेट्रो का सीक्वल मेट्रो इन दिनों लेकर आए हैं। ये एक फ्रेश फिल्म है। म्यूजिकल फिल्म है। इसकी ताकत दर्शकों को सिनेमाघर तक खींच लाने की है।

Metro In Dino Film Review

फिल्म की कहानी में पांच कहानी है। पांचवी कहानी को हम कच्ची लोई कह सकते हैं। इसलिए चार कहानी के बारे में पहले बात करते हैं। एक न्यूक्लियर फैमली है, कपल की शादी को 15-17 साल हो गए हैं। लेकिन अब शादी से उन्हें बोरियत महसूस हो रही है। इसलिए दोनों ऑप्शन की तलाश में निकल जाते हैं। उनकी एक बेटी है जो 15 साल की है। वो इस बात से परेशान है। क्योंकि ये नहीं पता चल पा रहा है कि वो स्ट्रेट है या लेस्बियन है।

दूसरी कहानी लव बर्ड्स की है। जो लॉन्ग डिस्टेंस में रहते हैं। लेकिन झिल नहीं पाता और शादी कर लेते हैं। फिर करियर के अतिरिक्त दबाव में आ जाते हैं। तीसरी कहानी एक लड़की की है, जो अपने जीवन में सही साथी की तलाश में है। चौथी कहानी में दो बुजुर्ग हैं, जो जवानी में अपने प्यार में थे। लेकिन शादी नहीं कर पाए। अब कॉलेज के रीयूनियन में मिलते हैं। ये अभी आपको कहानी लग रही है, लेकिन इसमें रिश्तों की खूबसूरती है। इमोशन है, प्यार है और तकरार है।

एक्टर्स जो किरदार को अपना बना गए
फिल्म में अनुपम खेर, नीना गुप्ता, सास्वत चटर्जी, अली फजल, फातिमा सना शेख, पंकज त्रिपाठी, कोंकणा सेन शर्मा, आदित्य रॉय कपूर और सारा अली खान हैं। अगर सतही तौर पर कहें तो इन सभी का काम कमाल का है। इसमें मेरी तरफ से ये जोर रहेगा कि अनुराग बासु ने इनसे अच्छा काम करवाया है। पिछले कुछ समय से पंकज त्रिपाठी हर फिल्म में एक स्टाइल में नजर आते हैं। लेकिन यहां उनको देखना सबसे अच्छा लगता है। ऐसा लगता ही नहीं है कि ये वो एक्टर है जिसे पहले किसी फिल्म में देखा है। सारा अली खान को अभी भी अपनी एक्टिंग में बहुत मेहनत करने की जरूरत है। लेकिन इस फिल्म में उन्होंने अपनी पूरी एक्टिंग निकालने की कोशिश की है। जिसमें वो थोड़ा वो अच्छी लगी हैं। अली फजल का काम अलग हटकर दिखा है।

फिल्म के सच्चे और कड़वे पहलू
फिल्म की कहानी फ्रेश से लगती है। इसके इमोशन से आप कनेक्ट करते हैं। कई बार स्क्रीन पर आप देखते हुए खुद में भी खो जाते हो। फिल्म में एंकर इसका म्यूजिक है। जो कहानी को आगे ले जाता है। ऐसा लगता है कि मानो किसी मुशायरे में बैठे हैं और आपके मन पसंद शायर अपनी शायरी सुनाए जा रहा है। फिल्म में थोड़ा रुहानीपन है। फिल्म को अच्छी ये बात भी बनाती है कि इसमें कोई हीरो नहीं है। कोई हीरोइन नहीं है। लेकिन सब हीरो-हीरोइन हैं। ओल्ड स्कूल से लेकर मॉर्डन ऐज के रिश्तों की कहानी है। लेकिन बिना जबरदस्ती का ज्ञान दिए, ये फिल्म बहुत कुछ कह जाती है।

फिल्म की कमजोर कड़ी ये है कि कई बार इसमें म्यूजिक हावी होता समझ आता है। ऐसा लगता है कि वो कहानी के फ्लो को रोकता है। फिल्म को आप एक सांस में देख सकते हैं। लेकिन सेकेंड हाफ में सांस थोड़ा और रोकनी पड़ती है। क्योंकि यहां मामला हल्का सा स्लो हो जाता है। दूसरी खामी ये भी है कि फिल्म का जितना बज बनना चाहिए था। उतना नहीं बना। जिसका बुरा असर फिल्म पर पड़ सकता है।

अनुराग बासु का कमाल
फिल्म की कहानी, स्क्रीनप्ले और डायरेक्शन ये सब अनुराग बासु ने किया है। इन तीनों ही कुर्सी पर वो फिट बैठे हैं। उन्हें फिल्मों में एक्सपेरिमेंट के लिए जाना जाता है। इसमें भी उन्होंने खूब एक्सपेरिमेंट किए हैं। जैसे कई बार एक्टर्स बर्थोल ब्रेख्त की एक्टिंग थ्योरी को फॉलो करते हैं। (हालांकि एक्टिंग थ्योरी पर बात फिर कभी) म्यूजिक कहानी को आगे बढ़ाता है। क्योंकि उन्होंने उसे ही फिल्म का एंकर बना दिया है। लूडो के बाद अनुराग बासु कोई फिल्म लेकर आए हैं। जो अच्छी है। थिएटर में देखी जा सकती है। अनुराग के भाई अभिषेक बासु ने इसे शूट किया है। साथ में उनका नाम भी आता है। टेक्निकल पॉइंट से फिल्म अच्छी है। पिक्चराइजेशन बहुत कमाल है। सबकुछ बहुत चमकीला है, लेकिन कुछ भी आंखों में चुभता नहीं है। ये सारे पहलू फिल्म को अच्छा बनाते हैं।

म्यूजिकल फिल्म के एक खामी
फिल्म एक म्यूजिक फिल्म है। जिसके गाने अनुराग शर्मा, नीलेश मिसरा, मोमिन खान कैसर उल जाफरी, संदीप श्रीवास्तव और मयूर पुरी ने लिखे हैं। बैक ग्राउंड स्कोर के साथ सभी गानों को प्रीतम ने कंपोज किया है। फिल्म में गाने बहुत खूबसूरत लगे हैं। लेकिन इसकी एक ही खामी है। 159 मिनट की फिल्म जब आप देख कर निकलते हैं, तब 'जमाना लगे' की दो लाइनों के अलावा कोई गाना आपके जेहन में नहीं रहता है। जो बतौर दर्शक भी आपको खटकती है।

बात पते की
ख़ैर, फिल्म अच्छी बनी है। इसकी लंबाई मत देखिएगा। क्योंकि जितनी कहानी फिल्म में दिखाई गई हैं, उनको जस्टीफाई करने के लिए इतना वक्त ठीक है। मेट्रो इन दिनों की कहानी हमारे और आपके बीच से निकली हुई लगती है। जो थिएटर में देखी जा सकती है। ये म्यूजिकल फिल्म है, इसे देखने के लिए थोड़ा अच्छा थिएटर चुनिएगा। जिसका साउंड अच्छा हो, तभी मजा आएगा। बाकी अगर आप ओटीटी पर देखना चाहते हैं, तो फिर मजा आप भूल जाइएगा। मेरी बात यहीं तक। आप भी फिल्म देखिए अपनी राय बनाइए और कमेंट में हमें भी बताइए।

फिल्म: मेट्रो इन दिनों
स्टार कास्ट: अनुपम खेर, नीना गुप्ता, सास्वत चटर्जी, अली फजल, फातिमा सना शेख, पंकज त्रिपाठी, कोंकणा सेन शर्मा, आदित्य रॉय कपूर और सारा अली खान

डायरेक्टर: अनुराग बासु
रेटिंग: 3.5 स्टार्स

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