कंगना ने फिर पार की हदें, 'भीख में आजादी' के बाद अब बोलीं- गांधी जी चाहते थे कि भगत सिंह...

मुंबई, 16 नवंबर: फिल्म एक्ट्रेस कंगना रनौत ने एक बार फिर भारत के आजादी के आंदोलन और इसके नायकों को निशाना बनाते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखी है। खासतौर से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के लिए कंगना ने काफी निचले स्तर पर जाकर टिप्पणी की है। कंगना ने इंस्टा और फेसबुक पर कुछ तस्वीरें और वीडियो शेयर करते हुए कहा है कि हमने नायकों को ठीक से नहीं चुना। गांधीजी तो भगत सिंह को फांसी दिलाना चाहते थे। वहीं नेताजी सुभाष चंद्र बोस से भी उनके विचार नहीं मिलते थे।

अब क्या बोलीं हैं कंगना रनौत

अब क्या बोलीं हैं कंगना रनौत

कंगना रनौत ने फेसबुक पोस्ट में लिखा है- या तो आप गांधीवादी हो सकत हैं या नेता जी के समर्थक। तुम दोनों के नहीं हो सकते। इनमें से एक को चुनें। जिन्होंने आजादी की लड़ाई लड़ी उन्हें अपने मालिकों के हवाले कर दिया। उन लोगों में लड़ने के लिए गर्म खून नहीं था लेकिन वे सत्ता के भूखे और धूर्त थे। वो लोग (गांधी जी) हैं जिन्होंने हमें सिखाया है कि अगर कोई आपको थप्पड़ मारे तो एक और थप्पड़ के लिए दूसरा गाल बढ़ा दो। क्या ऐसे मिली थी आजादी, तो फिर ऐसे आजादी नहीं भीख मिलती है। अपने नायकों को बुद्धिमानी से चुनें।

'गांधी जी चाहते थे भगत सिंह की फांसी'

'गांधी जी चाहते थे भगत सिंह की फांसी'

कंगना रनौत ने आगे लिखा है- गांधी ने कभी भगत सिंह या नेता जी का समर्थन नहीं किया। ऐसे सबूत हैं कि गांधी जी भगत सिंह को फांसी दिलाना चाहते थे। तो आपको चुनने की जरूरत है कि आप किसका समर्थन करते हैं क्योंकि उन सभी को अपनी स्मृति के एक बॉक्स में रखना और हर साल उन सभी को जन्म की वर्षगांठ की शुभकामनाएं देना पर्याप्त नहीं है। वास्तव में यह सिर्फ बेवकूफ नहीं है बल्कि बेहद गैर-जिम्मेदाराना और सतही है। हमें इतिहास और अपने नायकों को जानना चाहिए। इसके साथ-साथ कंगना ने इंस्टा पर कुछ वीडियो शेयर करते हुए ये बताने की कोशिश की है कि आजादी के बारे में जो वो कह रही हैं, वही सच है।

कंगना के इस बयान के बाद शुरू हुआ था विवाद

कंगना रनौत बीते हफ्ते टीवी चैनल टाइम्स नाउ के एक कार्यक्रम में पहुंची थीं। यहां कंगना ने कहा कि 1947 में भारत को मिली आजादी तो दरअसल एक भीख थी। देश तो आजाद 2014 में हुआ है। उनके इस बयान पर काफी विवाद हुआ और ज्यादातर गैर भाजपाई दलों, सामाजिक संगठनों, फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों, लेखकों ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। तमाम लोगों के इसे आजादी के आंदोलन और स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान कहने के बावजूद कंगना बयान पर अड़ गईं और नए-नए तर्क देना शुरू कर दिया।

 पूछा- 1947 में कौन सी जंग हुई

पूछा- 1947 में कौन सी जंग हुई

अपने बयान पर कंगना एक के बाद एक अजीब तर्क (या कुतर्क) देकर उसे ठीक बताने की कोशिश कर रही हैं। कंगना रनौत से उनका पद्मश्री लौटाने की मांग के बाद शनिवार को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में कहा कि वो पद्मश्री भी वापस कर देंगी और माफी भी मांग लेंगी, अगर कोई उन्हें बताए कि आखिर 1947 में कौन सी लड़ाई लड़ी गई थी।

फिर बोलीं- अंग्रेजों पर मुकदमें क्यों नहीं चले

फिर बोलीं- अंग्रेजों पर मुकदमें क्यों नहीं चले

1947 में जंग का सबूत मांगने के बाद कंगना ने रविवार (14 नवंबर) को किए अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा कि यदि हम भारत में किए गए असंख्य अपराधों के लिए अंग्रेजों को जिम्मेदार नहीं ठहराते हैं, तब भी हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों का अनादर कर रहे हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारे राष्ट्र निर्माताओं ने भारत में किए गए अनगिनत अपराधों के लिए, हमारे देश के धन को लूटने से लेकर हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को बेरहमी से मारने से लेकर हमारे देश को दो भागों में विभाजित करने के लिए, स्वतंत्रता के समय में किए गए अनगिनत अपराधों के लिए अंग्रेजों को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। इस सबके बाद आज उन्होंने एक बार फिर गांधी जी और आजादी के आंदोलन पर पोस्ट की है।

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