दर्शकों के बीच फिर से देशभक्ति से लबरेज फिल्म लेकर आ रहे हैं अक्षय कुमार, पोस्टर किया रिलीज

मुंबई, अक्टूबर 15। दशहरे के मौके पर बॉलीवुड के दो बड़े अभिनेताओं ने अपने-अपने बहुत बड़े प्रोजेक्ट का ऐलान किया है। एक तरफ सनी देओल ने 'गदर 2' का मोशन पोस्टर रिलीज किया तो वहीं दूसरी तरफ अक्षय कुमार ने अपने अपकमिंग प्रोजेक्ट 'गोरखा' का पोस्टर रिलीज किया। अक्षय कुमार ने सोशल मीडिया पर अपनी अगली फिल्म का पोस्टर रिलीज किया है। आपको बता दें कि अक्षय की ये फिल्म इंडियन आर्मी की गोरखा रेजिमेंट के मेजर जनरल इयान कार्डोजो के जीवन पर आधारित होगी। इस फिल्म का डायरेक्शन राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता संजय पूरन सिंह चौहान ने किया है।

इसी साल आनंद एल राय के साथ अक्षय की ये तीसरी फिल्म

इसी साल आनंद एल राय के साथ अक्षय की ये तीसरी फिल्म

अक्षय ने फिल्म का पोस्टर जारी करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा है, "कभी-कभी आपके सामने इतनी प्रेरणादायक कहानियां आ जाती हैं कि आप उन पर फिल्म बनाना ही चाहते हैं। गोरखा भी ऐसे ही एक महान युद्ध नायक मेजर जनरल इयान कार्डोजो के जीवन पर आधारित।" आपको बता दें कि अक्षय कुमार ने इस साल के अंदर ही डायरेक्टर आनंद एल राय की तीसरी फिल्म को साइन किया है। इससे पहले अक्षय 'अतरंगी रे' और 'रक्षा बंधन' को साइन कर चुके हैं।

कौन थे मेजर जनरल इयान कार्डोजो?

कौन थे मेजर जनरल इयान कार्डोजो?

गोरखा फिल्म में अक्षय कुमार जिस मेजर का किरदार निभाएंगे, उनका नाम पाकिस्तान के साथ हुए 1962, 1965 और 1971 के युद्ध में महान नायकों में लिया जाता है। आपको बता दें कि इयान कार्डोजो पांचवीं गोरखा राइफल्स के मेजर जनरल थे। साल 1971 के युद्ध में एक ऐसी परिस्थिति आ गई थी जब इयान कार्डोज़ो को खुद ही अपना पैर काटना पड़ा था। दरअसल जंग के दौरान एक ऑपरेशन में इयान कार्डोज़ो का पैर लैंडमाइन पर पड़ गया था और लैंडमाइन पर पड़ते ही एक धमाका हुआ। धमाके के बाद इयान कार्डोज़ो को जब पता चला कि उनका पैर बुरी तरह से घायल है तो उन्होंने बिना यह परवाह किए कि पैर काटने से उनकी मौत हो सकती है अपना पैर काट दिया था।

1815 में बनी थी पहली गोरखा रेजिमेंट

1815 में बनी थी पहली गोरखा रेजिमेंट

मेजर जनरल इयान कार्डोजो जिस गोरखा रेजिमेंट का हिस्सा थे, उसका गठन अंग्रेजों ने साल 1815 में हिमाचल प्रदेश के सुबाथू में किया था। हालांकि इससे पहले साल 1809 में कांगड़ा में गोरखा सेना के साथ संघर्ष के बाद महाराजा रणजीत सिंह ने भी गोरखाओं की भर्ती की थी। गोरखा पहाड़ी क्षेत्रों में युद्ध करने में माहिर होते हैं और इन्हें इनकी बहादुरी और वीरता के लिए जाना जाता है।

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