Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Edwin Lutyens कौन थे, जिनकी प्रतिमा राष्ट्रपति भवन में हटाकर भारत के पहले गवर्नर जनरल की लगेगी?

Edwin Lutyens Statue Replaces With Rajagopalachari: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 'मन की बात' कार्यक्रम में ऐलान किया कि राष्ट्रपति भवन में ब्रिटिश आर्किटेक्ट एडविन लुटियंस की प्रतिमा को हटाकर, स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर-जनरल सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।

यह कदम 'उपनिवेशवाद के प्रतीकों' से मुक्ति और 'भारतीय संस्कृति के प्रतीकों' को अपनाने की दिशा में देखा जा रहा है। लेकिन आखिर एडविन लुटियंस कौन थे, जिनकी मूर्ति अब हटाई जा रही है? आइए जानते हैं इस बदलाव की पूरी कहानी ...

Edwin Lutyens Biography

प्रधानमंत्री मोदी ने रेडियो संबोधन में कहा कि आजादी के बाद भी राष्ट्रपति भवन में ब्रिटिश दौर की मूर्तियां मौजूद हैं, जबकि भारत के महान नेताओं को वहां सम्मानित नहीं किया गया। उन्होंने 'आजादी का अमृत महोत्सव' के दौरान लाल किले से दिए 'पंच-प्राण' का जिक्र करते हुए गुलामी की मानसिकता से मुक्ति पर जोर दिया। राष्ट्रपति भवन का यह बदलाव इसी दिशा में एक कदम है।

  • प्रतिमा का रिप्लेसमेंट: एडविन लुटियंस की प्रतिमा को हटाकर राजगोपालाचारी (राजाजी) की प्रतिमा लगाई जाएगी। राजाजी को मोदी ने 'सत्ता को सेवा के रूप में देखने वाले' नेता बताया, जिनका संयम और स्वतंत्र सोच भारतीयों के लिए प्रेरणा है।
  • राजाजी उत्सव: 23 फरवरी को राष्ट्रपति भवन के केंद्रीय प्रांगण में राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण होगा। इसके बाद 24 फरवरी से 1 मार्च तक एक प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी, जहां राजाजी की उपलब्धियां दिखाई जाएंगी। पीएम ने लोगों से अपील की कि मौका मिले तो प्रदर्शनी जरूर देखें।
  • यह फैसला 'डिकोलोनाइजेशन' की प्रक्रिया का हिस्सा है, जहां ब्रिटिश विरासत के प्रतीकों को भारतीय नायकों से बदलने पर फोकस है।

Who Was Edwin Lutyens: एडविन लुटियंस कौन थे?

एडविन लुटियंस (पूर्ण नाम: सर एडविन लैंडसीर लुटियंस) 20वीं सदी के सबसे प्रसिद्ध ब्रिटिश आर्किटेक्ट थे, जिन्होंने पारंपरिक शैलियों को आधुनिक जरूरतों के साथ जोड़कर अनोखी इमारतें डिजाइन कीं। वे इंग्लैंड में कंट्री हाउसेस, युद्ध स्मारकों और पब्लिक बिल्डिंग्स के लिए मशहूर हुए, लेकिन भारत में उनकी पहचान 'नई दिल्ली' के डिजाइनर के रूप में है।

  • 29 मार्च 1869 को लंदन के केंसिंगटन में जन्मे लुटियंस 13 बच्चों में 10वें थे। उनके पिता कैप्टन चार्ल्स ऑगस्टस हेनरी लुटियंस सैनिक और चित्रकार थे, जबकि मां मैरी थेरेसा गैलवे आयरलैंड से थीं। बचपन में रुमेटिक फीवर की वजह से उनका स्वास्थ्य कमजोर रहा, इसलिए वे पब्लिक स्कूल या यूनिवर्सिटी नहीं गए। 1885 में केंसिंगटन स्कूल ऑफ आर्ट में पढ़ाई की और 1887 में आर्किटेक्ट फर्म में अप्रेंटिसशिप की।
  • लुटियंस ने सरनेम 'लैंडसीर' से इंस्पायर्ड होकर पारंपरिक इंग्लिश स्टाइल्स सीखीं। गार्डन डिजाइनर गर्ट्रूड जेकिल से मिलने के बाद उनका स्टाइल बदला - उन्होंने सरलता और उद्देश्यपूर्ण डिजाइन पर फोकस किया। 1896 में 'मुनस्टेड वुड' हाउस से उन्हें पहचान मिली।
  • प्रमुख योगदान: उन्होंने इंग्लैंड में कई कंट्री हाउसेस डिजाइन किए। प्रथम विश्व युद्ध के बाद वॉर मेमोरियल्स बनाए, जैसे द सेनोटाफ (लंदन)। लेकिन सबसे बड़ा काम भारत में: 1912 में ब्रिटिश राज की नई राजधानी 'नई दिल्ली' की योजना बनाई। सर हर्बर्ट बेकर के साथ मिलकर राष्ट्रपति भवन (तब वाइसरॉय हाउस), नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक, इंडिया गेट और संसद भवन जैसे स्मारकों को डिजाइन किया। नई दिल्ली का सेंट्रल एरिया आज भी 'लुटियंस दिल्ली' कहलाता है, जो राजनीतिक और अभिजात वर्ग का प्रतीक है।
  • व्यक्तित्व और मृत्यु: लुटियंस शर्मीले थे, लेकिन मजाकिया और रचनात्मक। वे 'पार्ट मिस्टिक' कहलाते थे - गहराई वाली सोच रखते थे। 1 जनवरी 1944 को 74 साल की उम्र में लंदन में उनका निधन हुआ।

लुटियंस की विरासत आज भी नई दिल्ली की भव्य इमारतों में जीवित है, लेकिन यह फैसला ब्रिटिश काल के प्रतीकों से दूरी बनाने का संकेत है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+