दिल्ली: 'हत्यारे' चाइनीज मांझे पर बैन में देरी के लिए कौन है जिम्मेदार?
दिल्ली। दिल्ली में चाइनीज मांझा लगातार मौत का कहर बरपाता रहा लेकिन इस पर बैन लगाने में आखिर दिल्ली सरकार को 16 अगस्त तक का समय क्यों लग गया? इस मुद्दे पर फिलहाल दिल्ली की आप सरकार और केंद्र सरकार के प्रतिनिधि लेफ्टिनेंट गवर्नर नजीब जंग के बीच फिर से ठन गई है। कांग्रेस ने आप सरकार पर बैन में देरी करने का आरोप लगाया है।
लेकिन चार लोगों की जान ले चुके और कइयों को घायल कर चुके चाइनीज मांझे पर हो रहे इन आरोपों प्रत्यारोंपों की राजनीति के बीच आइए जानते हैं कि आखिर बैन लगाने में कैसे इतनी देरी हो गई?
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9 जुलाई को फ्लाईओवर पर युवक की गर्दन कटी
दिल्ली निवासी 28 साल के मुकेश शर्मा की गर्दन गाजियाबाद के फ्लाईओवर पर चाइनीज मांझे में उलझ गई। गर्दन कटने से वह बुरी तरह घायल हो गए और हॉस्पिटल में उनकी मौत हो गई।
2 अगस्त - हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा, 'नोटिफिकेशन कब लाओगे'
मई मेें दिल्ली निवासी जुल्फिकार हुसैन ने चाइनीज मांझे पर बैन लगाने के लिए जनहित याचिका डाली। उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट की दो जजों की बेंच ने 15 अगस्त को चाइनीज मांझे के व्यापक उपयोग होने की बात कहते हुए आप सरकार से इस पर बैन लगाने के लिए नोटिफिकेशन जारी करने के बारे में पूछा था।
दिल्ली सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया था कि इस नोटिफिकेशन पर एलजी के अप्रूवल का इंतजार है और तब तक सरकार कुछ नहीं कर सकती। आप सरकार ने कोर्ट को बताया था कि वह जल्दी से ज्ल्दी इस धागे के उपयोग पर बैन लगाएगी। सरकार इस पर बैन लगाने की तैयारी में जुटी है और इसकी प्रकिया चल रही है।
11 अगस्त - फिर से हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार को चेताया
जुल्फिकार हुसैन की याचिका की सुनवाई करते हुए फिर 11 अगस्त को दिल्ली हाई कोर्ट ने 15 अगस्त से पहले दिल्ली सरकार और नगर निगम से जनता को चाइनीज मांझे के खतरों के बारे में आगाह करने को कहा था लेकिन मांझे की बिक्री पर कोई रोक नहीं लगी।

15 अगस्त - चाइनीज मांझे ने ली तीन की जान
15 अगस्त को चाइनीज मांझे ने तीन साल की बच्ची और चार साल के बच्चे की जान ले ली। माता पिता के साथ 15 अगस्त को जा रही सांची गोयल होंडा सिटी कार की खुली छत से सर निकाले हुए थी तभी मांझे से उसकी गर्दन कट गई। वह अपनी मां की गोद में गिर पड़ी। उसकी गर्दन से खून बह रहा था। सांची को हॉस्पीटल ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई।
जनकपुरी में चार साल के हैरी की मौत सांची की तरह हुई। वह भी परवार के साथ शॉपिंग करने जा रहा था और कार की छत से झांक रहा था जब उसकी गर्दन चाइनीज मांझे में उलझने की वजह से कट गई। हॉस्पिटल पहुंचते-पहुंचते हैरी की जान चली गई।
15 अगस्त को ही पश्चिमी दिल्ली के इलाके में 22 साल के युवक की मौत बाइक से जाते समय चाइनीज मांझे से गर्दन कटने की वजह से हुई।

16 अगस्त - बैन लगाने के लिए जागी दिल्ली सरकार
15 अगस्त को जब बच्चों की मौत की खबर वायरल हो गई और इस पर हंगामा शुरू हो गया तब दिल्ली सरकार अचानक जागी। 16 अगस्त को दिल्ली सरकार ने चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध लगा दिया। दिल्ली सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर नायलोन, प्लास्टिक या चाइनीज मांझा-जिस पर शीशा, लोहा या कोई धारदार चीज लगी हो- को बनाने, बेचने, सप्लाई करने पर पूरी तरह बैन लगा दिया। सिर्फ कॉटन या प्राकृतिक धागे से ही पतंग उड़ाने की इजाजत दी गई जिसके ऊपर मेटल या शीशा न चढ़ा हो। इस प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के लिए एक लाख जुर्माना और पांच साल की जेल की सजा का प्रावधान किया गया।

बैन लगाने में किसने की देरी?
दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बैन लगाने में देरी के लिए एलजी नजीब जंग और पर्यावरण सचिव को जिम्मेदार ठहराया। सिसोदिया ने कहा कि एलजी ने नोटिफिकेशन में अप्रूवल देने में चार दिन लगा दिए जबकि पर्यावरण सचिव ने इस फाइल को अप्रूव करने में सात दिन की देरी लगाई।
मनीष सिसोदिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, 'नोटिफिकेशन का फाइल 9 अगस्त को एलजी ऑफिस से दिल्ली सरकार के पास आया। उसी दिन दिल्ली के पर्यावरण मंत्री और मुख्य सचिव ने इस पर फैसला लेकर फाइल को पर्यावरण सचिव के पास भेजा जिसने मंजूरी देने में अगले सात दिन की देरी लगा दी। एलजी ने इस फाइल को एप्रूव करने में चार दिन की देरी लगाई थी।'
सिसोदिया ने एलजी से अनुरोध किया कि पर्यावरण सचिव के खिलाफ कर्तव्य में लापरवाही बरतने और चाइनीज मांझे के केस को हल्के में लेने के लिए कड़ी कार्रवाई की जाए।
सिसोदिया के आरोप का एलजी ऑफिस ने किया खंडन
दिल्ली के उप मुख्यमंत्री के आरोपों का तुरंत एलजी ऑफिस के प्रवक्ता ने तुरंत खंडन किया। एलजी ऑफिस ने कहा कि यह फाइल 8 अगस्त को आई और 9 अगस्त को इसे दिल्ली सरकार के अप्रूवल के लिए भेज दिया गया। एलजी ऑफिस का यह भी कहना है कि एलजी के पास ड्राफ्ट नोटिफिकेशन भेजा गया था न कि फाइनल नोटिफिकेशन।
दिल्ली सरकार के आरोपों पर कार्रवाई करते हुए एलजी ऑफिस ने पर्यावरण सचिव से इस मुद्दे पर सफाई देने को कहा है।
ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में क्या है
इस नोटिफिकेशन में दिल्ली सरकार ने चाइनीज मांझे पर बैन के लिए जनता से सुझाव और आपत्तियों को मंगाया है जिसे 60 दिन के अंदर फाइल किया जा सकता है। इसके बाद सरकार फाइनल नोटिफिकेशन लाएगी। तब तक चाइनीज मांझे पर बैन रहेगा।
पिछले साल से ही ऑफिसों के बीच घूम रही थी फाइल
सरकारी रिकॉर्ड से पता चलता है कि चाइनीज मांझे वाली फाइल पिछले साल से ही पर्यावरण सचिव, मुख्य सचिव, पर्यावरण मंत्री, मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के ऑफिसों के बीच घूम रही थी।
कांग्रेस ने आप सरकार पर लगाया देरी का आरोप
दिल्ली कांग्रेस ने चाइनीज मांझे पर बैन में लगी देरी के लिए आप सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इस पर बैन लगाने के लिए आप सरकार 15 अगस्त के बाद जागी क्योंकि वह चाइनीज मांझे के आयातकों को फायदा पहुंचाना चाहती थी।
क्या है चाइनीज मांझा
चाइनीज मांझा चीन में नहीं बनता। वह भारत में ही बनाया जाता है। चाइनीज मांझा नायलोन के तार से बना होता है। इसके ऊपर शीशा या कोई मेटल लगाया जाता है ताकि इसी धार तेज हो सके। इस धागे की धार इतनी तेज होती है इससे कटकर कई पक्षियों की जान जा चुकी है। चाइनीज मांझा काफी लोकप्रिय है क्योंकि यह सस्ता है और आसानी से नहीं टूटता। इसलिए पतंग उड़ाने में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है जो जान के लिए खतरा बनता है।












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