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उमर खालिद की जमानत याचिका: पीएम के लिए 'जुमला' शब्द पर दिल्ली हाईकोर्ट का एतराज

उमर खालिद की जमानत याचिका: दिल्ली हाईकोर्ट ने पूछा- पीएम के लिए 'जुमला' शब्द क्यों

नई दिल्ली, 27 अप्रैल: पूर्वोत्तर दिल्ली में 2020 में हुए दंगों के मामले में जेल में बंद एक्टिविस्ट उमर खालिद की जमानत याचिका पर बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई है। सुनवाई को दौरान अदालत ने उमर खालिद के सरकार की आलोचना के लिए इस्तेमाल किए शब्दों पर एतराज जताया। कोर्ट ने कहा कि भारत के प्रधान मंत्री के लिए 'जुमला' शब्द का इस्तेमाल करना क्या ठीक है। अदालत ने कहा कि सरकार की आलोचना करने की भी सीमा एक लक्ष्मण रेखा होनी चाहिए।

उमर खालिद की

उमर के वकील ने बुधवार को कोर्ट को अमरावती में दी गई उनकी स्पीच सुनाई। उमर खालिद के वकील त्रिदीप पेस ने कोर्ट में कहा कि सरकार की आलोचना अपराध नहीं हो सकता है। सरकार के खिलाफ बोलने वाले के लिए किसी व्यक्ति को यूएपीए के आरोपों के साथ 583 दिनों तक जेल में रखने की कोई परिकल्पना नहीं है। हम इतने असहिष्णु नहीं हो सकते। इस तरह तो लोग अपनी बात नहीं रख सकेंगे।

इस पर अदालत ने उमर खालिद के भाषण में सरकार और पीएम को निशाना बनाने वाले शब्दों को लेकर एतराज जताया। कोर्ट ने उमर के वकील से सवाल किया कि भाषण में शाहीन बाग की औरतों द्वारा पहाड़ के नीचे लाए जाने की बात कही गई है, इसमें ऊंट किसे कहा जा रहा है।

हाईकोर्ट ने आगे कहा कि हमारे सामने सवाल यह है कि खालिद ने जगह-जगह जो भाषण दिए और उसके बाद नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में जो दंगे हुए, उनके बीच किसी तरह का लिंक है या नहीं? यह स्थापित किया जाए।

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