OPINION: अरविंद केजरीवाल के सामने कौन?

OPINION: दिल्ली में चुनावी दंगल का आगाज हो चुका है। 5 फरवरी को वोटिंग और 8 फरवरी शनिवार को नतीजे आएंगे। पिछले एक दशक से राजधानी की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी तीसरी पारी खेलने के लिए पूरे दमखम के साथ मैदान में उतरी है। वहीं, प्रमुख विपक्षी पार्टी नए जोश और जुनून के साथ चुनावी कुरुक्षेत्र में कूद चुकी है। तो कांग्रेस भी इस बार दोगुनी ताकत के मुकाबला कर रही है। लेकिन इन सब के बीच सबके जेहन में एक सवाल है कि अरविंद केजरीवाल के सामने कौन?

सीएम फेस से इतर एक बात का कॉमन है कि भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस, दोनों दल के निशाने पर अरविंद केजरीवाल ही हैं। ऐसा लग रहा है वैचारिक मुद्दे और Governance से कहीं अधिक एक चेहरा सियासी रुप से सबसे अधिक प्रभावी है।

Arvind Kejriwal

अगर अतीत के नतीजों पर गौर करें तो 2015 में भारतीय जनता पार्टी ने अन्ना आंदोलन में अरविंद केजरीवाल के सहयोगी रहे किरण बेदी को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया। किरण बेदी को कृष्णानगर सीट से चुनाव में उतारा था। इस चुनाव में बेदी का मुकाबला सीधा अरविंद केजरीवाल से था। हालांकि, इस चुनाव में केजरीवाल ने बेदी को पटखनी दे दी थी। बीजेपी 32 के आंकड़े से 3 सीट पर पहुंच गई। वहीं आप 28 से 67 सीटों पर चली गई। बेदी खुद की कृष्णानगर सीट भी नहीं बचा पाईं।

दिल्ली में अन्ना आंदोलन के बाद दिल्ली में एक नई पार्टी का उभार हुआ था। शीला दीक्षित सरकार के खिलाफ भारी रोष था। बीजेपी ने 2013 के विधानसभा चुनाव में नए चेहरे हर्षवर्धन को मुख्यमंत्री फेस घोषित किया। हालांकि, दिल्ली के इस त्रिकोणीय मुकाबले में भी हर्षवर्धन बीजेपी को पूर्ण बहुमत नहीं दिला पाए।

हालांकि 2020 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 8 सीटों पर जीत दर्ज की। यह संख्या 2015 के मुकाबले 5 ज्यादा था। बीजेपी के वोट प्रतिशत में भी इजाफा हुआ। 2015 में पार्टी को 24 प्रतिशत वोट मिले थे, जो 2020 में बढ़कर 30 प्रतिशत हो गया।

पिछले दस सालों में दिल्ली की राजनीति में अपना वजूद खो चुकी कांग्रेस पार्टी इस बार पूरे दमखम के साथ चुनावी दंगल में उतर चुकी है। मगर सवाल एक है कि कांग्रेस की तरफ कौन होगा सीएम का चेहरा? पिछले दो चुनावों की बात करें तो कांग्रेस दिल्ली के अंदर अपना खाता तक नहीं खोल पाई। सवाल है कि क्या कांग्रेस के आने से दिल्ली चुनाव दिलचस्प मोड़ आया है?

देश में कई सियासी चुनौती वाले राज्यों में नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बीजेपी जीत चुकी है, लेकिन बस एक दिल्ली बाकी है। इसकी कसक अभी भी बांकी है। पिछले 26 साल की राजनीति को देखें तो 1999, 2014, 2019, 2024 चार बार देश का लोकसभा चुनाव बीजेपी ने जीत लिया लेकिन दिल्ली जीतने में असफल रही।

सवाल है कि क्या इस बार के चुनाव में सबकी लड़ाई एक से है? क्या बीजेपी और कांग्रेस बिना सीएम फेस के ही चुनाव में प्रभावी तरीके से उतरना की रणनीति पर काम कर रही है या किसी के पास कोई दमदार विकल्प नहीं है?

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