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Delhi Rohini Accident: दिल्ली के रोहिणी में खुले ड्रेन में गिरकर युवक की मौत, जनकपुरी हादसे से नहीं लिया सबक?

Delhi Rohini Accident: दिल्ली में सुरक्षा और सार्वजनिक संरचनाओं की लापरवाही एक बार फिर महंगी साबित हुई। राजधानी के रोहिणी सेक्टर 32 में मंगलवार को एक युवक की मौत हो गई, जब वह खुले ड्रेन में गिर गया।

मृतक की पहचान बिरजू कुमार (32) के रूप में हुई, जो बिहार के समस्तीपुर जिले के रहने वाले थे। यह हादसा चार दिन पहले जानकीपुरी में हुए बाइक हादसे की याद दिलाता है, जिसमें एक 25 वर्षीय युवक की मौत हुई थी।

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Delhi Open Drain Death: कैसे हुआ हादसा, स्थानीय लोगों ने क्या बताया?

सूत्रों के अनुसार, बिरजू कुमार महाशक्ति काली मंदिर के पास खुले ड्रेन में गिर गए। घटना की सूचना बेगंपुर पुलिस स्टेशन को लगभग शाम 7:45 बजे मिली। ANI ने बताया कि रेस्क्यू टीम तुरंत मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक युवक की मौत हो चुकी थी। स्थानीय निवासी सुनिल कुमार ने कहा, यह युवक बिरजू कुमार हैं। वे समस्तीपुर, बिहार से हैं। रात में खुले ड्रेन में गिर गए। प्रशासन को सूचना दी गई और उन्होंने शव को अपने कब्जे में लिया।

एक अन्य व्यक्ति तेजपाल यादव ने दावा किया कि उन्होंने 112 पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन ने समय पर कार्रवाई नहीं की, जिससे युवक की जान बचाई नहीं जा सकी। तेजपाल ने कहा, "युवक कल से ड्रेन में पड़ा था। उसके मित्रों ने पुलिस प्रशासन को दोपहर 4 बजे सूचना दी थी, लेकिन कार्रवाई केवल मेरी कॉल के बाद हुई।"

Janakpuri Pit Incident: जनकपुरी में बाइक हादसे नहीं लिया सबक

चार दिन पहले जनकपुरी में भी एक युवक की मौत हुई थी। 25 वर्षीय युवक, जो एक निजी बैंक में काम करता था, प्रोफेसर जोगिंदर सिंह मार्ग पर DJB द्वारा खोदी गई गड्ढ़े में गिर गया था। पुलिस ने बताया कि युवक का शव और बाइक 20 फीट गहरे गड्ढ़े में पाए गए। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

दिल्ली में लगातार ऐसे हादसों के पीछे एक बड़ी वजह सार्वजनिक सुरक्षा और निगरानी की कमी मानी जा रही है। खुला गड्ढा और अधूरी निर्माण परियोजनाएं नागरिकों के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सुरक्षा उपायों का अभाव, समय पर सूचना का न मिलना और त्वरित कार्रवाई न होना इन घटनाओं को और अधिक जानलेवा बनाता है।

सरकारी व्यवस्था की चूक इंसानी जान पर भारी

यह स्पष्ट है कि प्रशासन और संबंधित विभागों की सतर्कता और जवाबदेही में कमी की वजह से आम नागरिकों की जान जोखिम में पड़ती है। लोकल लोग और नागरिक सोशल मीडिया पर लगातार प्रशासन से खुले ड्रेन, अधूरी पाइपलाइन और निर्माण स्थलों पर बैरियर, चेतावनी बोर्ड और रोशनी की व्यवस्था करने की मांग कर रहे हैं।

रोहिणी और जनकपुरी की घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि राजधानी में अधूरी और असुरक्षित सार्वजनिक संरचनाओं के कारण आम नागरिकों की जान को खतरा है। प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा इंतजामों की कमी ने यह साबित किया कि इन हादसों को रोकने के लिए नियमित निरीक्षण, समय पर कार्रवाई और नागरिक जागरूकता बेहद जरूरी है। अगर सुरक्षा के उपाय नहीं किए गए तो भविष्य में ऐसे हादसे दोहराए जा सकते हैं। दिल्ली वासियों के लिए यह एक चेतावनी है कि सरकारी तंत्र की कमजोरी आम लोगों के लिए जानलेवा हो सकती है।

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