Delhi AQI Today: पराली नहीं ये है खराब AQI का कारण, सालों से नहीं मिला दिल्ली को एक भी ‘क्लीन एयर डे'
Delhi AQI Today: सर्दियों की एक ऐसी सुबह, जब हल्की ठंड के साथ धुंध की मोटी चादर शहर को ढक ले, तब दिल्ली वाले सबसे पहले जिस चीज़ को देखते हैं, वह है-AQI। यह वही संख्या है जो तय करती है कि हम खुली हवा में सांस ले पाएंगे या नहीं। मंगलवार की शाम हवा में यह जहर इतना बढ़ गया कि लोग घरों की खिड़कियां भी बंद करने लगे।
धुंध के पीछे छुपी सड़कें, आंखों में हल्की जलन और सांस में भारीपन... राजधानी एक बार फिर उस दौर में पहुंच चुकी है जब हवा में मौजूद हर कण एक चेतावनी बन जाता है। दिल्ली का AQI 380 के पार पहुंचने के साथ हालात चिंता बढ़ाने वाले हो गए हैं और कई इलाकों में हवा 'गंभीर' स्तर से भी ऊपर चली गई है।

आज किस स्तर पर है AQI लेवल?
दिल्ली में बुधवार सुबह हवा की गुणवत्ता बेहद खराब दर्ज की गई। 3 दिसंबर 2025 की सुबह 5:57 बजे राजधानी का AQI 380 रहा, जो 'बहुत हानिकारक' श्रेणी में आता है। आसमान बादलों से घिरा है और तापमान 10.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
प्रदूषण के प्रमुख कारणों में PM2.5 का स्तर 224 और PM10 का स्तर 306 रहा, दोनों ही बेहद खतरनाक माने जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी खराब हवा में लंबे समय तक रहने से सांस की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है और जिन लोगों को पहले से दिल या फेफड़ों की समस्या है, उन पर इसका असर और ज्यादा गंभीर हो सकता है।
कई इलाकों में AQI 400 से ऊपर
सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के अनुसार, मंगलवार शाम 4 बजे दिल्ली का 24 घंटे का औसत AQI 372 रहा। शहर के 39 स्टेशनों में से 16 ने 400 से ज्यादा का स्तर दिखाया। इनमें बुराड़ी, आनंद विहार, मुंडका, बवाना, विवेक विहार, रोहिणी, सोनिया विहार, अशोक विहार और पंजाबी बाग शामिल हैं।
अगले कुछ दिनों तक राहत की उम्मीद नहीं
एयर क्वालिटी अर्ली वॉर्निंग सिस्टम का कहना है कि आने वाले दिनों में हवा 'बहुत खराब' रहेगी। रात में धुंध और बढ़ सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक, दिन में हल्की धूप रहेगी लेकिन हवा की रफ्तार धीमी बनी रहेगी। शाम और रात में उत्तर दिशा से करीब 10 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है।
प्रदूषण में सबसे बड़ा योगदान ट्रांसपोर्ट का
मंगलवार को दिल्ली के प्रदूषण में सबसे बड़ा स्थानीय योगदान ट्रांसपोर्ट सेक्टर का रहा, जो 18.4 प्रतिशत दर्ज हुआ।
इसके बाद उद्योगों और NCR के आसपास के शहरों का योगदान रहा-नोएडा (8.2%), गाजियाबाद (4.6%), बागपत (6.2%), पानीपत (3.3%) और गुरुग्राम (2.9%)। बुधवार को भी ट्रांसपोर्ट से होने वाला प्रदूषण लगभग 15 प्रतिशत तक रहने का अनुमान है।
AQI क्यों बढ़ रहा है?
दिल्ली में AQI बढ़ने के कई कारण होते हैं-धुआं, धूल, वाहन, उद्योग और मौसम की स्थिति। AQI एक ऐसा पैमाना है जो आठ प्रमुख प्रदूषकों के आधार पर हवा की गुणवत्ता बताता है। सबसे खतरनाक PM2.5 होता है, जो इतना छोटा होता है कि फेफड़ों के अंदर तक पहुंचकर खून में भी घुस सकता है। इसी वजह से इस स्तर के बढ़ने पर लोगों में सांस की बीमारी, सीने में दर्द और खांसी जैसी दिक्कतें बढ़ जाती हैं।
खेतों में पराली जलने का असर
उत्तर भारत में हर साल सर्दियों में पराली जलने से धुआं तेजी से बढ़ता है। पंजाब, हरियाणा और आसपास के राज्यों में जलने वाली पराली का धुआं हवा के साथ दिल्ली-NCR तक पहुंच जाता है। यह धुआं खासकर PM2.5 को काफी बढ़ा देता है, जिससे हवा ज्यादा जहरीली हो जाती है।
10 साल का डेटा: दिल्ली सबसे प्रदूषित शहर
क्लाइमेट ट्रेंड्स की रिपोर्ट के अनुसार, 2015 से 2025 के बीच दिल्ली ने एक भी 'क्लीन एयर डे' नहीं देखा। दिल्ली सबसे प्रदूषित शहर बना हुआ है, उसके बाद नोएडा का AQI 515 तक पहुंच गया। कोच बिहार, किशनगंज और कूलताली जैसे कई छोटे जिलों की हवा भी खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है।
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