गंभीर की बढ़ी मुश्किलें, HC ने कहा- केस तो बन रहा है, मांगा डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन
नई दिल्ली, मई 24: कोरोना की दूसरी लहर के बीच पूर्व क्रिकेटर और पूर्वी दिल्ली से बीजेपी सांसद गौतम गंभीर की दवा बांटने के मामले में मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। दिल्ली हाई कोर्ट में सोमवार को औषधि नियंत्रण विभाग को निर्देश दिया कि जब सब कुछ कम आपूर्ति में था तो भाजपा सांसद गौतम गंभीर द्वारा बड़ी मात्रा में फैबीफ्लू और जरूरी कोविड-19 दवा की खरीद की जांच शुरू करें। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि केस तो बन रहा है, वहीं डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन भी मांगा है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने ड्रग कंट्रोलर से एक हफ्ते के अंदर जांच को लेकर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। साथ ही दिल्ली पुलिस को आदेश दिया है कि वर्तमान में राजनेताओं के कोविड -19 ड्रग्स की जमाखोरी की जांच कर रही है। उससे संबंधित सामग्री को ड्रग कंट्रोलर को सौंपने के लिए कहा है। वहीं अदालत ने गंभीर को पक्षकार बनाने के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि हमने सिर्फ जांच के आदेश दिए हैं, कार्रवाई करने के लिए नहीं कहा है।
अदालत ने यह स्वीकार किया है कि इसके पीछे गंभीर के अच्छे इरादे हो सकते हैं, लेकिन संकट के समय अदालत ने इसे "जिम्मेदार व्यवहार" नहीं माना है। अदालत ने कहा कि गौतम गंभीर ने इसे सर्वोत्तम हितों के साथ किया होगा। हमारा मुद्दा यह है कि क्या यह एक जिम्मेदार व्यवहार है, जब सब कुछ कम आपूर्ति में है? क्या यह एहसास नहीं होना चाहिए था कि यह दूसरों के लिए भी कम आपूर्ति हो जाएगी? जिसको अन्य लोगों को भी भुगतना पड़ा होगा।
वहीं दिल्ली हाई कोर्ट ने मेडिकल ऑक्सीजन से जुड़े आरोपों पर आप विधायक प्रीति तोमर और प्रवीण कुमार का भी संज्ञान लिया। तोमर और कुमार के खिलाफ आरोपों के संबंध में अदालत ने कहा कि ड्रग कंट्रोलर द्वारा इसी तरह की कवायद की जानी चाहिए और सप्ताह के भीतर एक स्थिति रिपोर्ट दायर की जानी चाहिए।












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