OPINION: दिल्ली सरकार अपने लक्ष्य 2025 के नजदीक, 8 साल में रिकॉर्ड स्तर तक प्रदूषण में सुधार
दिल्ली सरकार ने अपने बीते आठ साल के कार्यकाल के दौरान प्रदूषण नियंत्रण नीति में कई अहम बदलाव किए। जिसकी वजह से राज्य में तेजी से बढ़ते प्रदूषण को काफी हद तक नियंत्रण किया जा सका।
दिल्ली में पिछले कुछ वर्षों के भीतर प्रदूषण नियंत्रण नीति में कई अहम बदलाव किए गए। प्रदूषण फैलाने पर सख्ती भी बढ़ी। दिल्ली सरकार ने इसके लिए कई अहम मॉडल और स्ट्रक्चर भी तैयार किए। इसके साथ पॉलिशी में कई खास प्रावधान जोड़े गए। परिणाम ये हुआ कि दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर दुगुनी रफ्तार से नियंत्रण पाया गया। राष्ट्रीय राजधानी में इन नए बदलवाओं को कारण ही खराब होते एक्यूआई स्तर पर नियंत्रण पाया गया।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्ली में प्रदूषण की स्तिथि पर काबू पाने की बात को जिस दावे के साथ कह रहे हैं, उसके पीछे सरकार का उतना ही ठोस प्रयास भी शामिल है। 50वें पर्यावरण सप्ताह की शुरुआत में ही सीएम केजरीवाल ने बड़े दावे के साथ कहा कि पिछले 5 दशक में दुनिया के लगभग सभी देशों में प्रदूषण स्तर तेजी से बढ़ा है। उन्होंने कहा कि भारत के शहर, कस्बे या गांवों तक ये प्रदूषण पहुंचा। लेकिन दिल्ली जैसे शहर में सरकार ने प्रदूषण स्तर को काफी हद तक कम कर दिया। यहां पिछले आठ सालों में स्कूल, अस्पताल, सड़कें, फ्लाईओवर सब बन रहे हैं, लेकिन प्रदूषण बढ़ने के बजाय घट चुका है।

दिल्ली सरकार प्रदेश में प्रदूषण स्तर को घटाने के लिए हरित क्षेत्र के विकास को बढ़ावा दे रही है। यमुना की सफाई के अलावा नदी के दोनों किनारों पर ग्रीनबेल्ट विकसित करने की योजना है। दिल्ली के पर्यावरण एवं वन मंत्री गोपाल राय का कहना है कि मुख्यमंत्री केजरीवाल के नेतृत्व में पर्यावरण सम्मेलन अभियान पूरे राज्य में किए जाएंगे। दिल्ली में इको क्लब, आरडब्लूए, धार्मिक संस्थान, व्यापारी संगठनों के साथ मिलकर इसी तरह के पर्यावरण सम्मलेन का आयोजन किया जाना है।
दिल्ली सरकार पर्यावरण सम्मेलन के जरिए पौधे वितरण का काम करेगी। दावा किया जा रहा है कि इसके जरिए हरित क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही राज्य में प्रदूषण की स्थिति से निपटा जा सकेगा। इसके अलावा पर्यावरण सम्मेलन के कार्यक्रम के जरिए प्लास्टिक प्रदूषण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए नुक्कड़ नाटक और गीत भी तैयार किए जा रहे हैं।
दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग की ओर से एक और खास पहल की। जिसके तहत पर्यावरण सम्मेलन में लघु फिल्म दिखाई गई। इसके अलावा ईको क्लब, आरडब्ल्यूए और फारेस्ट गार्डों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
इसके अलावा ई- वाहनों के प्रयोग को बढ़ावा देने से भी प्रदूषण नियंत्रण को गति दे रहा है। दिल्ली में लगातार वन क्षेत्रों के संरक्षण के साथ वृक्षारोपड़ को बढ़ावा देने का का कार्य किया जा रहा है। पिछले एक दशक के भीतर काफी सुधार हुआ है। 2013 में दिल्ली के कुल क्षेत्रफल के 20 प्रतिशत हिस्से में पेड़ थे जबकि 2023 में ट्री कवर्ड एरिया 23 प्रतिशत हो चुकी है। जबकि 2016 के मुकाबले 2022 में दिल्ली में पीएम-2.5 व पीएम-10 में 30 प्रतिशत में भी कमी आई।












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