Delhi Chunav 2025: कांग्रेस त्रिकोणीय मुकाबले के लिए लगा रही जोर, किसे देगी झटका? 5 प्वाइंट में समझिए
Delhi Chunav 2025: 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस दिल्ली में आम आदमी पार्टी के भरोसे टिकी थी। हालांकि, न तो उसे फायदा मिला और न ही आम आदमी पार्टी का ही खाता खुलने का सपना पूरा हो पाया। लेकिन, दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अपने दम पर ही गंभीर खिलाड़ी बन चुकी है। 2013 के बाद पहली बार ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस मैदान में पूरा दमखम लगा रही है।
2013 में दिल्ली की सत्ता हाथ से निकलने से पहले के 15 साल कांग्रेस का यहां की सरकार में पूरी तरह से दबदबा था। 1998 में जब उसने बीजेपी को सत्ता से बेदखल किया,तब उसे 47.76% वोट मिले थे और वह 52 सीटें लेकर सरकार बनाई थी।

Delhi Chunav 2025: दिल्ली में 'आप'की बढ़त के साथ कैसे गिरता गया कांग्रेस का ग्राफ?
2003 में कांग्रेस का वोट शेयर और बढ़कर 48.13% तक पहुंच गया, हालांकि सीटें घटकर 47 रह गईं। 2008 में शीला दीक्षित के तीसरे कार्यकाल में पार्टी को 40.31% वोट मिले और उसने 43 सीटों के साथ 10 साल की एंटीइंकंबेंसी को नाकाम बनाकर सरकार बनाई। लेकिन, 2012 में आम आदमी पार्टी के उदय के साथ ही कांग्रेस पर ग्रहण लगना शुरू हो गया।
2013 में पार्टी का वोट शेयर घटकर मात्र 24.55% रह गया और सीटें घटकर 8 तक पहुंच गईं। 2015 के बाद से तो सफाया ही सफाया हो रहा है। उस साल वोट शेयर गिरकर 9.56% रह गया और 2020 में यह और लुढ़कर 4.26% तक आ गिरा। इन दोनों चुनावों में पार्टी खाता खोलने के लिए भी तरस गई।
Delhi Chunav 2025: 1) कांग्रेस ने इस बार मजबूत प्रत्याशियों पर लगाया है दांव
इस बार कांग्रेस पार्टी बहुत ही मजबूती के साथ चुनाव लड़ने की तैयारी में दिख रही है। पार्टी ने अबतक 47 उम्मीदवारों की दो लिस्ट जारी की है और चुन-चुनकर प्रत्याशियों को टिकट दिया है। नई दिल्ली सीट पर आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के खिलाफ संदीप दीक्षित को उतारना और जंगपुरा में मनीष सिसोदिया को पूर्व मेयर फरहाद सूरी से टक्कर दिलाना, इसी रणनीति का हिस्सा है। कालकाजी में भी आतिशी मार्लेना को कड़ी चुनौती देने की योजना है। यही स्थिति बाकी अन्य सीटों पर भी नजर आ रही है।
Delhi Chunav 2025: 2) आम आदमी पार्टी की घेराबंदी के लिए हर तरह से कमर कस चुकी है कांग्रेस
इंडिया ब्लॉक का हिस्सा होने के बावजूद दिल्ली में इस बार कांग्रेस पार्टी के नेता जिस तरह से आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ आक्रामक हैं, उससे साफ है कि अबकी बार सियासी 'दोस्ती' की जगह पेशेवर राजनीति की तैयारी हो चुकी है। कांग्रेस के दिग्गज नेता अजय माकन ने यूं केजरीवाल को 'फर्जीवाल' और 'राष्ट्रद्रोही' कहकर निशाना नहीं साधा है। वहीं संदीप दीक्षित ने आप सरकार की योजनाओं को लेकर उपराज्यपाल से फर्जीवाड़ा की शिकायत की है और केजरीवाल पर पंजाब पुलिस की इंटेलिजेंस से निगरानी करवाने की भी शिकायत दर्ज करवाई है।
Delhi Chunav 2025: 3) अहम रोल निभाने की रणनीति
दिल्ली में 2013 के चुनावों के बाद पहली बार कांग्रेस अभी से लड़ाई में नजर आ रही है। जबकि, मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी अभी तक औपचारिक तौर पर चुनाव मैदान में उतरी भी नहीं है और न ही एक भी उम्मीदवार ही घोषित किए हैं। ऐसे में कांग्रेस की पूरी कोशिश है कि मुकाबले को त्रिकोणीय बनाया जाए।
वह हर हाल में आम आदमी पार्टी के पाले में गए अपने वोट बैंक का बड़ा हिस्सा वापस लेने के लिए जोर लगा रही है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव पूरी दिल्ली में न्याय यात्रा निकालकर कांग्रेस के पक्ष में माहौल तैयार करने की कोशिश कर चुके हैं। कांग्रेस मतदाताओं को यह बताने के प्रयास में है कि इस बार वह भी निर्णायक भूमिका निभाने को तैयार है। पार्टी भाजपा-विरोधी एंटी-इंकंबेंसी वाले वोट लेने की रणनीति पर काम कर रही है।
Delhi Chunav 2025: 4) कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए'आप' हुई मजबूर
दिल्ली के पिछले तीन विधानसभा चुनावों के वोटिंग पैटर्न का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि कांग्रेस का जो वोट घटा है, वही आम आदमी पार्टी में शिफ्ट हुआ है। यह वोट बैंक मूल रूप से झुग्गी-झोपड़ियों, सुरक्षित सीटों और मुस्लिम बहुल इलाकों के हैं।
कांग्रेस नेताओं के आक्रामक अंदाज को देखते हुए ही आप नेताओं ने भी इंडिया ब्लॉक की मित्र पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और उसपर बीजेपी के साथ मिलीभगत तक का आरोप लगा रही है। आप नेता तो यहां तक आरोप लगा रहे हैं कि कांग्रेस चुनाव लड़ने के लिए बीजेपी से पैसे ले रही है।
Delhi Chunav 2025: 5) 'आप'को इंडिया ब्लॉक से सहयोग मांगने की पड़ रही है जरूरत
कांग्रेस के प्रभाव को कम करने के लिए आम आदमी पार्टी ने दिल्ली चुनावों में इंडिया ब्लॉक से सहायता मांगनी शुरू कर दी है। माकन के आरोपों पर पार्टी ने कांग्रेस को इंडिया ब्लॉक से निकलवाने तक की धमकी दे डाली। हालांकि, कांग्रेस पर उनकी धमकियों का कोई असर नहीं दिखा है।
आप की पूरी कोशिश है कि मुकाबला किसी भी तरह से त्रिकोणीय न होने पाए, क्योंकि अगर भाजपा-विरोधी वोट का कांग्रेस-आप में बंटवारा हुआ तो फायदा बीजेपी को मिल सकता है और तीसरी बार सत्ता में वापसी का मंसूबा पाल रही आम आदमी पार्टी को झटका लग सकता है। क्योंकि, वह लगातार तीसरी बार सरकार बनाकर कांग्रेस की शीला दीक्षित के रिकॉर्ड की बराबरी करने की कोशिशों में लगी हुई है।
जबकि, इसके ठीक उलट बीजेपी भी 1998 में सत्ता गंवाने के बाद अभी नहीं तो कभी नहीं वाली रणनीति के साथ चुनाव मैदान में उतरने की योजना बना चुकी है। ऐसे में जैसे-जैसे चुनाव के तारीख नजदीक आएंगे, यहां का मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है। संभावना है कि चुनाव आयोग जनवरी की शुरुआत में ही चुनाव तारीखों की घोषणा कर सकता है।
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