Delhi Chunav 2025: दिल्ली के दिल से उतरे 'आप', बौखलाहट में लगाया BJP पर 15 करोड़ के ऑफर का आरोप, जानें सच
Delhi Chunav 2025: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने शानदार जीत दर्ज की और 70 में से 48 सीटें जीतकर सरकार बनाने का रास्ता साफ कर लिया। वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) सिर्फ 22 सीटों पर सिमट गई।
चुनाव नतीजों से ठीक पहले AAP ने BJP पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का बड़ा आरोप लगाया। AAP का दावा था कि बीजेपी ने उनके 16 विधायकों को 15-15 करोड़ रुपये का ऑफर दिया, ताकि वे पार्टी छोड़कर BJP में शामिल हो जाएं। लेकिन अब इस मामले में एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) की जांच में कोई सबूत नहीं मिला है।

क्या था पूरा मामला?
AAP के नेता अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह ने चुनाव के नतीजों से एक दिन पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि बीजेपी ने 'ऑपरेशन लोटस' के तहत उनके विधायकों को खरीदने की कोशिश की। AAP विधायक मुकेश अहलावत ने तो एक मोबाइल नंबर भी शेयर किया और दावा किया कि उन्हें इसी नंबर से बीजेपी की ओर से ऑफर मिला था।
इसके बाद दिल्ली बीजेपी ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए उपराज्यपाल (LG) विनय सक्सेना से शिकायत की। LG ने मामले की जांच के आदेश दिए और ACB ने केजरीवाल और संजय सिंह को नोटिस भेजकर सबूत मांगे।
ACB की जांच में क्या सामने आया?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ACB के जॉइंट कमिश्नर मधुर वर्मा ने पुष्टि की है कि AAP नेताओं के आरोपों का कोई प्रमाण नहीं मिला। जांच में कोई भी ऑडियो, वीडियो या अन्य सबूत नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि AAP विधायकों को 15 करोड़ रुपये के ऑफर दिए गए थे।
अब क्या होगा?
- सूत्रों की मानें तो ACB इस शिकायत को दिल्ली पुलिस को भेज सकती है, ताकि झूठे आरोप लगाने वालों पर एक्शन लिया जा सके।
- BJP का कहना है कि AAP ने झूठे आरोप लगाकर चुनावी माहौल को प्रभावित करने की कोशिश की, इसलिए इस पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
AAP के नेताओं ने सबूत क्यों नहीं दिए?
जब ACB ने अरविंद केजरीवाल और मुकेश अहलावत को नोटिस भेजकर आरोपों को साबित करने के लिए कहा, तो उन्होंने कोई बयान दर्ज नहीं कराया और न ही कोई सबूत पेश किया। यहां तक कि जब ACB की टीम केजरीवाल और संजय सिंह के घर जांच के लिए पहुंची, तो उन्हें अंदर जाने की इजाजत नहीं दी गई।
क्या BJP के खिलाफ मामला होगा?
अब तक BJP के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है। अगर AAP कोई ठोस सबूत पेश नहीं करती, तो यह मामला जल्द ही बंद हो सकता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि AAP अपने दावों पर टिकी रहती है या यह सिर्फ चुनावी रणनीति का हिस्सा था।












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